नोएडा STF ने साॅल्वर गैंग को दबोचा, 2 लाख में हो रही थी पेपर की डील, जानें पूरा मामला

फिजिकल हैंडीकैप्ड कैंडिडेट्स को मानवीय मदद के लिए उपलब्ध कराये जाने वाले लेखक के मामले में फर्जीवाडा कर सॉल्वर गैंग मोटी कमाई कर रहा था, लेकिन अब एसटीएफ के निशाने पर साल्वर गैंग के साथ उनकी मदद करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. 

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नोएडा:

एसटीएफ नोएडा यूनिट ने कर्मचारी चयन आयोग की ओर से आयोजित सीजीएस परीक्षा 2025 में फिजिकल हैंडीकैप्ड कैंडिडेट्स को फर्जी दस्तावेज के आधार पर लेखक उपलब्ध करा कर नकल कराने और फर्जी पीएच प्रमाण पत्र के आधार पर परीक्षा दिलाने का काम कर रहे साल्वर गैंग के 11 लोगों को गिरफ्तार किया है. इनके पास से 16 फर्जी पीएच मेडिकल प्रमाण पत्र, 13 मोबाइल और 3 निर्वाचन कार्ड, 14 लाख 75 हजार रुपए नकद और अन्य सामान बरामद हुआ है. एसटीएफ उपनिरीक्षक जावेद आलम सिद्दकी ने फेज दो थाने में मुकदमा दर्ज कराया है.

गैंग का लीडर कौन

इस मामले में विराट कुमार, दुर्गेश कुमार, जय प्रकाश मौर्या , चेतन शर्मा , बसंती लाल कुमावत, रोहित कुमार सिंह, नरेंद्र सिंह, अमित कुमार, सरवन कुमार और शरद यादव को एसटीएफ की टीम ने गौर सीटी टावर डी-1, आदर्श परीक्षा केंद्र फेज-2 और होटल टाउन हाउस सेक्टर-121 से गिरफ्तार किया है, इनमें से सागर पांडेय गैंग का लीडर बताया जा रहा है. एसटीएफ नोएडा यूनिट के एएसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि 12 सितंबर से 26 सितंबर तक कर्मचारी चयन आयोग की ओर से कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (सीजीएल) टीयर-1 परीक्षा कराई जा रही है.

लेखक के लिए क्या नियम

इसमें इनपुट मिला था कि पीएच कैंडिडेट को गैर कानूनी तरीके से लेखक उपलब्ध कराया जा रहा है. नियमानुसार आयोग की ओर से पीएच कैंडिडेट को लेखक दिया जाता है, विशेष परिस्थितियों में वे स्वयं भी लेखक ले सकते हैं. लेकिन लेखक का लेवल परीक्षार्थी से एक लेवल नीचे का हो सकता है. जबकि यहां बीटेक और इससे ज्यादा पढ़े लिखे लेखकों को अनधिकृत तरीके से परीक्षा केंद्र में प्रवेश कराकर कैंडिडेट के साथ बैठाकर प्रश्नपत्र हल कराया जा रहा था. एसटीएफ ने यहां से तीन लोगों को गिरफ्तार किया. 

सॉल्वर को दिए जाते हैं 1 घंटे के इतने रुपये

रोहित और नरेंद्र आदर्श परीक्षा केंद्र का सेंटर हेड और इनोवेटिव व्यू कंपनी का कर्मचारी है. अमित कुमार फर्जी पीएच प्रमाण पत्र पर परीक्षा देने वाला है. सॉल्वर ज्यादातर बीटेक, एमएससी और बीएससी पास युवक शमिल होते हैं, जिनको एक घंटे की परीक्षा का 10 हजार रुपए दिए जाते हैं. कैंडिडेट से सॉल्वर उपलब्ध कराने के नाम पर दो लाख रुपए लिए जाते है. यही नहीं फर्जी हैंडीकैप्ड प्रमाण पत्र तैयार करके भी कैंडिडेट को परीक्षा में बैठाते हैं. इसके लिए 50 हजार रुपए में डील होती है.

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