- १४ साल के बिहार के वैभव सूर्यवंशी ने अंडर-१९ वर्ल्ड कप में ज़िंबाब्वे के खिलाफ १७५ रनों की यादगार पारी खेली
- वैभव ने ८० गेंदों में १५ चौकों और १५ छक्कों की मदद से उच्च स्ट्राइक रेट के साथ शानदार बल्लेबाज़ी की
- एशिया कप के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ २६ रन बनाकर आउट होने के बाद वैभव ने वर्ल्ड कप में जबरदस्त वापसी की
Vaibhav Sooryavanshi: तकरीबन पांच दशक पहले 1983 वर्ल्ड कप में कप्तान कपिल देव ने ज़िंबाब्वे के ख़िलाफ़ 175 रनों की यादगार पारी खेली थी. 46 साल बाद अंडर-19 वर्ल्ड कप में 14 साल के बिहार के वैभव सूर्यवंशी ने ज़िंबाब्वे की राजधानी हरारे में 175 रनों की पारी खेलकर सबको दंग कर दिया. एक्सपर्ट्स मानें ना माने वैभव में फ़ैन्स नया सचिन भी देखने लगे हैं. भारत को रिकॉर्ड छठा वर्ल्ड कप ख़िताब दिलाकर वैभव ने एशिया कप के फ़ाइनल में अपने साथ जुड़े विवाद को भी धो डाला.
वैभव ने क्या राज़ खोले
वैभव सूर्यवंशी मैन ऑफ़ द मैच के ख़िताब से नवाज़े गए. उन्होंने STAR SPORTS पर मैच प्रेज़ेन्टेशन के बाद अपनी विशाल 175 रनों की पारी के राज़ खोले. वैभव ने कहा कि इस पारी को लेकर वो अपनी खुशी नहीं ज़ाहिर कर सकते. उन्होंने कहा, “मुझे अपने हुनर पर भरोसा था. मुझे उम्मीद थी कि किसी बड़े मैच में मैं ज़रूर बड़ा करूंगा.”
80 गेंद, 175 रन, 150 रन बाउंड्रीज़ से
14 साल के वैभव सूर्यवंशी डेढ़ महीने पहले एशिया कप के फ़ाइनल की शिकस्त की यादों को पीछे छोड़कर वर्ल्ड कप में उतरे.. और फ़ाइनल में इंग्लैंड के गेंदबाज़ों की धज्जियां उड़ा दी. 80 गेंद पर 15 चौके और 15 छक्कों के सहारे वैभव के बेमिसाल 175 रन वर्ल्ड कप के सुनहरे इतिहास में दर्ज हो गये. अब दुनिया भर के क्रिकेट फ़ैन्स इस पारी को कपिल देव की पारी की तरह बरसों याद रखेंगे.
दुबई में 21 दिसंबर को एशिया कप के फ़ाइनल में वैभव सूर्यवंशी 10 गेंदों पर 26 रन बनाकर आउट हुए, पाक खिलाड़ी से झड़प भी हुई. पाकिस्तान ने वो फ़ाइनल जीता और सिर्फ़ 14 साल के वैभव आलोचनाओं का शिकार बन गए.
वैभव ने सिर्फ़ डेढ़ महीने के अंदर जवाब दे दिया. इस बार बोवकर नहीं कपिल देव की तरह वर्ल्ड कप में 175 रनों की विशाल मैचविनिंग पारी खेलकर
वैभव सूर्यवंशी के कोच मनीष ओझा कहते हैं, “इस तरह की बैटिंग ना पहले देखी गई थी ना ही देखी जाएगी. मुझे लगता है अब वैभव तो सीनियर स्तर पर मौका दिया जाना चाहिए. मैं तो उन्हें ईशान किशन के साथ ओपनिंग करते देखना चाहता हूं.”
16 साल के सचिन की यादें ताज़ा
तकरीबन 37 साल पहले जब साढ़े 16 साल के सचिन तेंदुलकर ने इमरान ख़ान, वसीम अकरम और वकार युनूस की गेंदों का कराची जाकर सामना किया, तब नन्हे सचिन की काबिलियत का शायद ही किसी को अंदाज़ा रहा हो.
37 साल बाद जब विराट कोहली जैसे दिग्गज सचिन के वनडे शतकों के रिकॉर्ड से आगे निकले हैं तो एकबार फिर बिहार के समस्तीपुर के इस वैभवशाली सूर्य पर सबकी नज़रें टिक गई हैं. उनके फ़ाइनल के 175 के स्कोर ने भारतीय क्रिकेट की दुनिया को जश्न मनाने का शानदार तोहफ़ा दे दिया है.
एशिया कप का फ़ाइनल, पाक खिलाड़ी से झड़प
तकरीबन डेढ़ महीने पहले दबई में हुए एशिया कप के फ़ाइनल में वैभव पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 26 रनों पर आउट हुए और बाहर निकलते हुए उन्होंने जो इशारा किया उसे लेकर उनकी खूब आलोचना भी हुई. लेकिन वैभव ने बहुत जल्दी सबक लिया और एक इतिहास कायम कर दिया.
मौजूदा वर्ल्ड कप वैभव के लिए एक उगता सूरज साबित हुआ है. जहां फ़ाइनल की 175 पारी के अलावा पूरे टूर्नामेंट के 7 मैचों में उन्होंने 1 शतक और 3 अर्धशतक के साथ भारत के लिए सबसे ज़्यादा 439 रन जोड़े.
वैभव ने इस टूर्नामेंट में 175, 68, 30, 52, 40, 72 और 2 रनों के साथ कुल 439 रन बनाए.
फ़ाइनल में वैभव ने 80 गेंदों में 175 रनों की पारी खेली. उन्होंने 15 चौके, 15 छक्के लगाए. उनका स्ट्राइक रेट 219 का रहा.
वर्ल्ड कप में वैभव: बात अगर वर्ल्ड कप में वैभव के रिकॉर्ड की करें तो उन्होंने मौजूदा संस्करण में 7 मैचों में 439 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने 3 अर्द्धशतक और एक शतक लगाया. फ़ैन्स अब वैभव की तुलना कपिल देव से लेकर सचिन तेंदुलकर तक करने लगे हैं. दरअसल वैभव का शानदार सफ़र शुरू हो गया है.














