ऐसे बदला बिहार क्रिकेट - बदहाली से चढ़ते सूरज का वैभवशाली सफर, चमकने लगे हैं सूर्यवंशी समेत कई सितारे

पूर्व रणजी क्रिकेटर और चयनकर्ता सुनील बताते हैं कि बिहार में वैभव जैसे ही 16-17 साल के पृथ्वीराज भी एक शानदार टैलेंटेड बैटर हैं. वो NCA से भी ट्रेनिंग लेकर आये हैं.

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Vaibhav Sooryavanshi
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  • राकेश तिवारी ने बिहार क्रिकेट को प्रोफेशनल ढंग से विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है
  • 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी की सफलता बिहार क्रिकेट के बेहतर संगठन और टूर्नामेंट्स के कारण संभव हुई है
  • बिहार के साकिब हुसैन और मो. इज़हार ने आईपीएल में जगह बनाकर प्रदेश के क्रिकेट विकास को नई ऊँचाई दी है
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चीन की एक मशहूर कहावत है, 'एक बच्चे को पालने में पूरे गांव को लगना पड़ता है.' खेल के मैदान पर अक्सर इस कहावत की मिसाल पेश की जाती है. अंडर-19 वर्ल्ड चैंपियन वैभव सूर्यवंशी की कामयाबी के लिए भी ये मिसाल उतनी ही सटीक नजर आती है. बिहार क्रिकेट में ये एक कमाल का इत्तिफ़ाक भी हुआ है कि 14 साल के जीनियस क्रिकटर वैभव सूर्यवंशी ने जैसे-जैसे पिछले तीन-चार साल में कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ीं उसी दौरान बिहार क्रिकेट संघ के कामकाज, टूर्नामेंट और बिहार की टीमों का संवरना भी शुरू हुआ. 

वैभव समेत तीन खिलाड़ी IPL में 

NDTV से बात करते हुए बिहार क्रिकेट संघ के पूर्व अध्यक्ष राकेश तिवारी कहते हैं, 'वैभव का चमकना इत्तिफ़ाक नहीं है. उसमें ईश्वरीय गुण है और वो एक जीनियस है. हमारे लिए गर्व की बात रही कि हम उसे सही वक्त पर पहचान पाये और उसे आगे बढ़ाने के लिए हर संभव कोशिश भी की. आप देखें, बिहार की टीमें मुश्ताक अली, विजय हजारे और रणजी -सभी लेवल पर एलीट ग्रुप में शामिल हो गई गई है. अंडर-19 बिहार की टीम लगातार एलीट लेवल में खेल रही हैं. इन सबका फ़ायदा भी वैभव को मिला है.'

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पूर्व अध्यक्ष राकेश तिवारी ये भी कहते हैं, 'वैभव समेत हमारे दूसरे खिलाड़ियों ने भी IPL में जगह बनानी शुरू कर दी है. वैभव सूर्यवंशी के अलावा साक़िब हुसैन और मो. इज़हार ने भी IPL में जगह बनाई है. आनेवाले वक्त में ये नंबर्स और बढ़ेंगे.'

IPL खेलेंगे बिहार के 145-150 किमी/घंटा रफ़्तार वाले गेंदबाज

IPL ऑक्शन में बिहार के साक़िब हुसैन को कोलकाता नाइटराइडर्स के बाद हैदराबाद टीम में जगह मिली है. उनके कोच सौरभ कुमार सिंह/सौरभ सिंह ‘राबिन' कहते हैं, '20 साल के साकिब हुसैन एक गरीब मज़दूर के बेटे हैं. उनमें कमाल का टैलेंट है. उन्होंने हाई परफ़ोरमेंट सेंटर बेंगलुरु में भी ट्रेनिंग ली है. वो 145 से 50 किलोमीटर/ घंटा की रफ़्तार से गेंद डालते हैं.'

उसी तरह पूर्व अध्यक्ष राकेश तिवारी मो. इजहार की तारीफ करते हुए कहते हैं, 'मो. इज़हार बिहार में सुपौल के रहने वाले हैं. उनके पिता सुपाल एक मस्जिद में इमाम हैं. मुश्ताक अली टूर्नामेंट में उन्होंने मध्य प्रदेश के ख़िलाफ़ 4 विकेट झटके थे.'

NDTV से राकेश तिवारी कहते हैं, 'ये सभी क्रिकेटर्स इसलिए भी अच्छा कर पा रहे हैं, क्योंकि पूर्व क्रिकेटरों की मदद से हमने एक स्ट्रक्चर तैयार किया. हमारा काम था खांडवप्रस्थ को इंद्रप्रस्थ बनाना. वैभव में दुनिया ने बिहार क्रिकेट की एक झलक देखी है. आनेवाले टाइम में आपसब बिहार क्रिकेट का ‘शोले'  देखेंगे.'

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पहली बार डिस्ट्रिक्ट टूर्नामेंट से चमके वैभव सूर्यवंशी 

पूर्व रणजी क्रिकेटर और बिहार क्रिकेट संघ के चयनकर्ता सुनील सिंह कहते हैं, 'यहां हमेशा से काफ़ी टैलेंट रहा है. पूर्व अध्यक्ष राकेश तिवारी सर की लीडरशिप में हमने 2023 में बिहार के 38 ज़िलों के क्रिकेटर्स का डोमेस्टिक टूर्नामेंट करवाया. इसमें करीब 150 मैच का आयोजन किया गया. वैभव को पहली बार पहचान यहीं मिली.'

चयनकर्ता सुनील कहते हैं, 'वैभव 2023 के डोमेस्टिक टूर्नामेंट की खोज हैं. 6 साल पहले उस टूर्नामेंट में वैभव सूर्यवंशी ने समस्तीपुर के लिए खेलते हुए से बेहतरीन प्रदर्शन किया और सबकी नजरों में आ गए. इस टूर्नामेंट से हमने कई टैलेंट सर्च किये. राकेश सर ने फिर वैभव सूर्यवंशी को सीधे उसी उम्र में अंडर-19 और एलीट वर्ग की बिहार टीम के लिए रणजी खेलने का मौक़ा दिया. और इसलिए वैभव आज किसी गेंदबाज़ से नहीं डरता है.'

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‘वैभव की तरह कई हुनरमंद क्रिकेटर'

पूर्व रणजी क्रिकेटर और चयनकर्ता सुनील बताते हैं कि बिहार में वैभव जैसे ही 16-17 साल के पृथ्वीराज भी एक शानदार टैलेंटेड बैटर हैं. वो NCA से भी ट्रेनिंग लेकर आये हैं. बिहार की ओर से अंडर-23 और अंडर-19 में  शतक भी लगाये और ढेर सारे रन बनाये हैं. 

सनील कुमार सिंह कहते हैं, 'आज की बिहार टीम के कप्तान साकिबुल गनी-कप्तान, बिपिन सौरभ और आकाश राज, पीयूष कुमार जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी इसी दौर और हमारे स्ट्रक्चर से निकले हैं. आकाश राज तो कमाल के टैलेंटेड खिलाड़ी हैं. जल्दी ही आप इनका नाम भी सुनेंगे. 2022-23 के अंडर-23 एलीट वर्ग में उन्होंने करीब 1300 रन बनाये और इंडिया में टॉप 10 खिलाड़ियों में शामिल रहे.'

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चयनकर्ता सुनील गर्व से बिहार के IPL स्टार्स के भी नाम लेते हैं. वो कहते हैं,'वैभव के अलावा हमारे  दो और लड़के साकिब हसन और मो इज़हार तो IPL में भी आ गए हैं. वो भी हमारी ही टैलेंट सर्च का नतीजा हैं. इन सबमें पूर्व अध्यक्ष राकेश कुमार का अमूल्य योगदान है. बिहार में पहले ढंग का एक ग्राउंड नहीं होता था. अब तो मोइनुल हक स्टेडियम भी बननेवाला है, राजगीर का स्टेडियम भी है.' 

कोच और कॉमेनेटेटर सौरभ कुमार कहते हैं, 'दरभंगा के आयुष लोहारुका भी प्रतिभा के धनी खिलाड़ी हैं. 22 साल के दरभंगा के आयुष ने फ़र्स्ट क्लास और लिस्ट-ए के मैचों में पिछले दो साल में बिहार के लिए सबसे ज़्यादा रन जोड़े हैं. उन्होंने कई शतक भी लगाए हैं. उसी तरह बिपिन सौरभ हैं, साकिबुल गनी, साकिब हुसैन हैं जो 145 किमी प्रति घंटा की रफ़्तार से गेंद फेंकते हैं और मो. इज़हार जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी हैं. यहां बहुत टैलेंट है.'

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विवाद, टूटने के दौर से गौरव तक

बिहार क्रिकेट संघ के चयनकर्ता सुनील सिंह बताते हैं कि पहले भी बिहार क्रिकेट के जलवा रहा है. हमारी टीम यूनिवर्सिटी स्तर रोहिंग्टन बैरिया में ऑल इंडिया में तीसरे स्थान तक रही है. 

सुनील खुद भी एक लेफ़्ट आर्म पेसर- ऑलराउंडर रहे हैं. वो कहते हैं, 'बिहार क्रिकेट में पहले जमशेदपुर के इलाके से कई क्रिकेटर आए. बाद में पटना से कई क्रिकेटर आए. बिहार क्रिकेट को पहले मान्यता नहीं थी. इसका बिहार क्रिकेट को बहुत नुकसान हुआ. ईशान किशन भी जूनियर स्तर पर बिहार से ही खेले.'

चयनकर्ता सुनील बताते हैं कि 2018 में बिहार को क्रिकेट को मान्यता मिली. तबतक बिहार क्रिकेट एक कमरे के सचिव के घर-दफ़्तर से ही चलता था. 2019 में राकेश तिवारी ने 6 साल में कई बदलाव किए. उन्होंने बिहार क्रिकेट के दफ्तर को कॉरपोरेट ऑफ़िस बना दिया. वो कहते हैं कि अब बिहार क्रिकेट प्रोफेशनल तरीके से चलता है. 

बिहार-झारखंड के इंटरनेशनल स्टार्स

बिहार-झारखंड राज्यों से कई खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर धूम मचा चुके हैं. मौजूदा वर्ल्ड कप खेल रहे ईशान किशन पटना के रहनेवाले हैं और झारखंड के लिए खेलते हैं. 

कीर्ति आज़ाद 1983 विश्व विजेता टीम के सदस्य थे. झारखंड और टीम इंडिया के पूर्व कप्तान एमएस धोनी के बारे में दुनिया सब जानती ही है. सबा करीम टीम इंडिया के लिए विकेटकीपर बैटर रह चुके हैं. स्पिन गेंदबाज़ शाहबाज नदीम टीम इंडिया के लिए 2 टेस्ट मैचों में टीम की नुमाइंदगी कर चुके हैं. टीम इंडिया के गेंदबाज़ पेसर  आकाश दीप और मुकेश कुमार बंगाल के लिए खेलते हैं. 

बिहार क्रिकेट लीग -BCL का आयोजन 

बिहार के कई रणजी क्रिकेटर्स बताते हैं कि 2021 में बिहार क्रिकेट लीग BCL के आयोजन से भी वहां के क्रिकेट में बहुत बदलाव आया. यूरोस्पोर्ट पर इसका लाइव प्रसारण भी हुआ था. सुनील कुमार कहते हैं, 'इसकी वजह से दुनिया को बिहार के क्रिकेटिंग टैलेंट का पता चला. कोरोना और दूसरी वजहों से ये तभी हो नहीं पाया. लेकिन एक बार फिर से इसे शुरू करने की कोशिश की जा रही है.'

BCL का आयोजन पटना ऊर्जा स्टेडियम में किया गया था. जावागल श्रीनाथ से लेकर सुब्रतो मुखर्जी तक ने इसमें अपना नोल निभाया था. कई क्रिकेटर्स और कोच मानते हैं कि एकबार फिर अगर ये शुरू हो पाया तो बिहार क्रिकेट से टैलेंट की भरमार हो जाएगी.

इंटरनेशनल स्टेडियम, हॉस्टल की सुविधा

बिहार की राजधानी पटना के मोइनुल हक़ स्टेडियम में 1996 वर्ल्ड कप के मैच का भी आयाजन हुआ. लेकिन अक्सर वो विवादों में भी घिरा रहा. 25,000 की क्षमता वाले इस स्टेडिम को तोड़कर 45,000 की क्षमता वाला नया स्टेडियम बनाया जा रहा है. 

पूर्व अध्यक्ष राकेश तिवारी कहते हैं, 'पहले आपने कई बार मोइनुल हक़ स्टेडियम में क्रिकेट मैच और उसके साथ विवादों की ख़बर देखी है. लेकिन अब 550 करोड़ रुपये के मोइनुल हक़ स्टेडियम का शिलान्यास होनेवाला है. यहां हॉस्टल की सुविधा भी रहेगी. गांव-घर के टैलेंटेड बच्चे यहां आकर क्रिकेट खेलेंगे और भारतीय टीम में भी जगह बनाएंगे. मुझे इसका पूरा विश्वास है.'

राजगीर के इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के बारे में बताते हुए राकेश तिवारी कहते हैं, बिहार सरकार ने भी हमारी मदद की है. नीतीश सरकार ने राजगीर में तैयार शानदार स्टेडियम हमें हैंडओवर किया है. वहां भी सभी तरह की सुविधाएं मौजूद हैं. यहां दुनिया भर के क्रिकेटर आएंगे तो उसे सराहे बिना नहीं रहेंगे. हम उम्मीद करते हैं कि इन स्टेडियमों में जल्दी ही अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैचों का भी आयोजन होगा.

बिहार क्रिकेट की तरक्की और वैभव सूर्यवंशी की बात करते हुए उनके पिता संजीव सूर्यवंशी एक पुराने इंटरव्यू में कहते हैं, 'अगर बिहार क्रिकेट संघ (BCA) के अध्यक्ष राकेश तिवारी सर ने मदद नहीं की होती तो इसे बिहार से खेलने का मौक़ा ही नहीं मिल पाता. हमें अपनी ज़मीन तक बेचनी पड़ी. लेकिन राकेश तिवारी सर ने मेरे बच्चे में आगे बढ़ने की क्षमता देखी और वो बड़ा सफ़र कर पा रहा है.'

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