India s New Zealand: गुजरे रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में न्यूजीलैंड (Ind vs nz Final) को 96 में रन से हराकर लगातार दूसरी और कुल मिलाकर तीसरी बार वर्ल्ड कप जीतने के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल है, तो वहीं साल 1993 विश्व कप व विजेता टीम के सदस्य और तृणमूल कांग्रेस के सांसद को कुछ अलग ही दिखाई पड़ रहा है क्योंकि जिस चश्मे वह घटना विशेष को देख रहे हैं, उस लेंस से देखने वाले वह इकलौते दिखाई पड़ रहे हैं. दरअसल वर्ल्ड कप जीतने के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव, बीसीसीआई पूर्व अध्यक्ष जय शाह और हेड कोच गौतम गंभी ट्रॉफी के साथ पास ही के हनुमान मंदिर गए और खिताबी जीत के लिए ईश्वर का शुक्रिया अदा किया. इसी पहलू को लेकर विश्व कप विजेता टीम के सदस्य रहे कीर्ति आजाद ने X पर लंबा-चौड़ा पोस्ट किया. बाद में संसद के गलियारे में हरभजन सिंह ने इस सवाल पर जवाब भी दिया.
कीर्ति आजाद के इस इस बड़े कमेंट पर सबसे पहले पटना लौटे टीम इंडिया के सदस्य ईशान किशन से सवाल पूछा गया था. और इशान किसी भी पचड़े से बचते हुए इसका जवाब देने से परहेज किया. और यह एकदम समझा जा सकता है, लेकिन हरभजन सिंह ने कीर्ति के इस कमेंट को राजनीति से प्रेरित करार दिया
इसमें कुछ भी गलत नहीं: हरभजन सिंह
आजाद के कमेंट को लेकर पूछे गए सवाल पर हरभजन सिंह ने कहा, 'यह बहुत ही बेतुकी सी बात है. हैरान हूं कि इस बात को लेकर भी राजनीति की जा रही है कि वो मंदिर क्यों गए? मंदिर जाएं, गुरुद्वार जाएं, मस्जिद जाएं..या फिर कहीं भी जाएं. जो कुछ उन्होंने भगवान से मांगा है और अगर वह उनकी मन्नत पूरी होती है, तो फिर उनकी जहां मर्जी, वहां जाएं. पर राजनीति नहीं करनी चाहिए.' उन्होंने कहा, 'कीर्ति भैय्या खुद क्रिकेटर रहे हैं. मुझे उनसे ऐसी बात की उम्मीद नहीं थी. यह बहुत ही दु्र्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी बातें साथी क्रिकेटर की तरफ से आईं. शायद वो राजनीति को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं. वह खुद भूल गए हैं कि वह खिलाड़ी हैं. देश वर्ल्ड कप जीता है और यह बहुत बड़ी बात है. आप राजनीति करने के बजाय खुशी मनाएं. सभी धर्म एक ही हैं. कोई मंदिर जाए, मस्जिद जाए, लेकिन रास्ता एक ही है. अगर वो हनुमान जी के मंदिर गए हैं, भगवान शिव के मंदिर गए हैं, या गुरुद्वारे गए हैं, तो बात एक ही है. कोई फर्क नहीं है. ये उनकी आस्था है. वो उनकी आस्था है और किसी की आस्थान लेकर ऐसे सवाल नहीं उठने चाहिएं'














