- ऋषभ पंत ने 2017 में पिता की मृत्यु के बाद अपने करियर में सकारात्मक जिम्मेदारी लेना सीखा और मजबूत बने
- 2018 में एडिलेड टेस्ट में पंत ने सबसे ज्यादा ग्यारह कैच लेकर रिकॉर्ड बनाया और ज़िन्दगी की गंभीरता समझी
- कोविड-19 महामारी के बाद पंत ने युवा खिलाड़ियों के लिए वित्तीय जागरूकता और क्रिकेट में फोकस की अहमियत बताई
टीम इंडिया के धमाकेदार विकेटकीपर बैटर ऋषभ पंत (Rishabh Pant) इन दिनों घरेलू क्रिकेट में खुद को मांजकर बड़े मौके का इंतजार कर रहे हैं. कई बार मैदान और मैदान के बाहर एक्सीडेंट और चोट से उबर चुके ऋषभ पंत ने मुंबई के एक इवेंट में बच्चों और युवाओं से अपने फाइटर बनने के राज से पर्दा उठाया. उन्होंने बताया कि कैसे उनकी 2017 में अपने पिता की मौत के बाद उन्हें बड़ा सदमा हुआ था और उनके करियर पर प्रभाव आ सकता था. पंत कहते हैं, 'मैंने बहुत कम उम्र में अपने पिता को खो दिया था.. लेकिन उसी समय यह आपको सकारात्मक तरीके से जिम्मेदारी लेना सिखाता है."
‘पिताजी गए तो, जिम्मेदारी..'
2018 में एडिलेड में एक ही टेस्ट में सबसे ज्यादा 11 कैच का रिकॉर्ड बनाने वाले पंत बताते हैं, 'इसने (पिता के जाने ने) मुझे वास्तव में मजबूत बनाया. लेकिन ज़िन्दगी को गंभीरता से लेने का बड़ा अहसास COVID-19 (महामारी) के बाद आया.' वो ये भी कहते हैं, 'जब आप एक युवा के रूप में खेल रहे होते हैं, तो आप वास्तव में अपने पैसे या फाइनेंस वित्त के बारे में नहीं सोच रहे होते हैं और आप केवल क्रिकेट खेलने पर ध्यान फोकस कर रहे होते हैं.'
पिछले साल इंग्लैंड में लीड्स टेस्ट की दोनों पारियों में शतकीय पारियां खेलने वाले पंत ने ये भी कहा, 'मेरे दिमाग में, मैं केवल भारत के लिए खेलना चाहता था और मेरा एकमात्र यही सपना था- बस भारत के लिए मैच जीतना. बाकी सब चीजें अपने-आप होती गईं. मुझे लगता है बाकी सभी चीजें इसका बाइप्रोडक्ट हैं.ट
‘पागलपन की जरूरत'
49 टेस्ट में 8 शतकीय पारियां खेलने वाले पंत ने युवाओं से ये भी कहा, 'मेरे जीवन में मेरा ध्यान एक तरह से बहुत ही सिंगुलर रहा है. मुझे लगता है कि आपको कुछ हासिल करने के लिए अपने में एक पागलपन लाने की जरूरत होगी. मैं इसी में यकीन करता हूं.'
*वर्क-लाइफ बैलेंस पर पंत हुए बेबाक *
अंतर्राष्ट्रीय मैचों में 9 शतक लगा चुके कमाल की बात ये भी है कि ऋषभ पंत ने वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर भी खुलकर अपनी राय रखी. पंत ने कहा, 'आजकल, हम वर्क-लाइफ बैलेंस के बारे में बात करते हैं. मुझे लगता है कि लोगों को यह समझने की जरूरत है कि पहले आपको कड़ी मेहनत करनी होती है. अपने काम के बारे में पागलपन होना चाहिए. फिर जीवन में एक समय आएगा जब आप आराम कर सकते हैं और पीछे बैठ सकते हैं. लेकिन एक युवा के रूप में, अपनी सीमाओं को बढ़ाना सबसे अच्छी चीज है. क्योंकि, फिर रिकवरी के लिए बहुत वक्त है.'
‘हार्डवर्क और सीखने की ललक'
पंत युवाओं से पहले अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए हार्डवर्क की अपील करते हैं. वो कहते हैं, 'एक बार जब आप 35 या 45 (वर्ष) की उम्र में जाते हैं, तो आप अधिक सुरक्षित सोच और योजना बनाना चाहेंगे. लेकिन उससे पहले बस आप खुद को अच्छी तरह सख़्ती से आजमा लें. आप जहां भी जाएं सीखने की कोशिश करें और फिर उससे कुछ बढ़िया और सुंदर ही निकलता है.'
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