Mohammad Siraj on Comeback in Team India T20 WC 2026 Squad: मोहम्मद सिराज की यह मौजूदगी किसी तय योजना का हिस्सा नहीं थी. न इस टी20 वर्ल्ड कप की, न ही इस टूर्नामेंट की पहली रात की. एक दिन पहले तक उनकी ज़िंदगी बिल्कुल अलग दिशा में जा रही थी. लंबे घरेलू सीजन के बाद वह ब्रेक लेने वाले थे. मैड्रिड में रियल मैड्रिड बनाम रियल सोसिदाद का मैच देखने के टिकट पहले से थे. रमजान नजदीक था, परिवार के साथ वक्त बिताने की तैयारी थी. क्रिकेट, कम से कम फिलहाल, एजेंडा में नहीं था.
फिर अचानक हालात बदले. हर्षित राणा चोटिल हो गए और किस्मत ने सिराज का दरवाज़ा खटखटाया. कॉल सूर्यकुमार यादव की थी, और शुरुआत में सिराज को लगा कि शायद मज़ाक हो रहा है. उन्होंने हंसते हुए कहा भी “मजाक मत करो.” लेकिन यह मजाक नहीं था. देखते ही देखते वह फिर से भारतीय जर्सी पहनकर वर्ल्ड कप का मुकाबला खेलने जा रहे थे एक ऐसा टूर्नामेंट, जिसे लेकर उन्होंने खुद को पहले ही बाहर मान लिया था.
बाद में सिराज ने माना कि यह सब किसी सपने जैसा लगा. टी20 फॉर्मेट में लंबे समय से मौके न मिलने के कारण उन्हें लगने लगा था कि अब यह चैप्टर बंद हो चुका है. लेकिन फोन आया, और सब बदल गया. उस वक्त वह घर पर परिवार के साथ थे. उन्होंने बस इतना कहा ऊपरवाले ने चाहा तो रास्ता अपने आप बन गया.
अमेरिका के खिलाफ वर्ल्ड कप के पहले ही मैच में उन्हें सीधे प्लेइंग इलेवन में उतारा गया. और उन्होंने वही किया, जिसकी टीम इंडिया को सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी नई गेंद से शुरुआती ब्रेकथ्रू और आखिर में मैच पर लगाम. 29 रन देकर तीन विकेट का आंकड़ा उनकी भूमिका को पूरी तरह नहीं बताता. प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार भले ही सूर्यकुमार यादव को मिला, लेकिन मैच की दिशा शुरुआती ओवरों में सिराज ने ही तय की.
उनकी योजना बिल्कुल साफ थी नई गेंद से स्टंप्स पर हमला, विकेट टू विकेट गेंदबाज़ी. यही उनका तरीका है, चाहे कोई भी फॉर्मेट हो. गेंद को पूरे ज़ोर से सही जगह पिच करना और प्रोसेस पर भरोसा रखना. मैच से एक रात पहले भी उनके दिमाग में यही था अपने हथियारों पर भरोसा और सही एग्ज़ीक्यूशन.
उनके फोन के वॉलपेपर पर आज भी एक शब्द लिखा है “BELIEF”. यह उनके सफ़र की याद दिलाता है और उन्हें ज़मीन से जोड़े रखता है. सिराज के लिए तैयारी सिर्फ़ नेट्स या ड्रिल्स तक सीमित नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और तैयार रहने की आदत है. भारतीय क्रिकेट में बिताए सालों ने उन्हें सिखाया है कि कब और कैसे मौके के लिए तैयार रहना है.
वर्ल्ड कप का दबाव अलग होता है, भावनाएँ भी उफान पर होती हैं. लेकिन सिराज ने उस दबाव को अनुशासन में बदला. निजी योजनाओं या छूटे हुए पलों पर नहीं, बल्कि सही समय पर सही गेंद डालने पर ध्यान रखा.
जिस रात उन्हें बर्नबेउ की रोशनी में फुटबॉल देखना था, उस रात वह फ्लडलाइट्स के नीचे गेंद थामे खड़े थे. टिकट की जगह हाथ में मैच बॉल थी. आराम की जगह अचानक मिला बुलावा. सिराज ने इसे सहजता से स्वीकार किया जो लिखा है, वही होता है. और उस रात उनकी कहानी सीम मूवमेंट, स्विंग और तीन अहम विकेट्स के रूप में लिखी गई.














