इंडियन प्रीमियर लीग (Indian Premier Leauge) के मैच धुआंधार अंदाज में जारी हैं. बल्लेबाजों का धुरंधर अंदाज दिखना शुरू हो गया है, तो मैच आगे बढ़ने की दिशा में बल्लेबाजों के और बड़े-बड़े कारनामे देखने को मिलेंगे. स्टेडियम में दर्शक खचाखच दिख रहे हैं, टीवी पर विज्ञापनों की बाढ़ है. हर बार की तरह आईपीएल सदाबहार है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेगा टूर्नामेंट के एक मैच के आयोजन पर कितनी रकम खर्च होती है? इसमें कहां-कहां से पैसा आता है? ब्रॉडकास्टर एक मैच से आखिर कितनी रकम कमाता है? बीसीसीआई को एक मैच से कितना पैसा मिलता है..वगैरह-वगैरह..? चकरा गए न? इतना आसान जवाब नहीं है! चलिए हम आपको पूरे मैच की व्यवस्था बताते हैं कि पैसा कहां-कहां से आकर कहां जाता है और किस हिस्सेदार को कितनी रकम (अनुमानित या लगभग) मिलती है?
1. करीब इतनी कमाई होती है 1 आईपीएल मैच से
किसी एक मैच से संपूर्ण व्यवस्था या हिस्सेदारों को 200 से लेकर 300 करोड़ प्लस (मोटे तौर पर या लगभग) भारतीय रुपयों की कमाई होती है. मैच के आयोजन पर 12 से लेकर 20 करोड़ रुपये का कुल खर्च आता है. अब बिजनेस मॉडल कुछ ऐसा है, तो खर्च के बाद कमाई कई गुना या कहीं ज्यादा होती है. यह पैसा कई स्रोतों से आता है. ऐसे में आप समझ सकते हैं कि इस साल पूरे आईपीएल से BCCI के खजाने में कितनी रकम आने जा रही है
2. इतने स्रोतों से होती है मैच से कमाई
1. मीडिया राइट्स (सबसे बड़ा हिस्सा, BCCI+फ्रेंचाइजी)
सबसे ज्यादा पैसा मीडिया राइट्स से आता है. जी हां, उसी पैसे से, जिसके लिए ब्रॉडकास्टरों (स्टार-स्पोर्ट्स और जियो) टीवी और डिजिटल राइट्स के लिए बीसीसीआई को 2023-27 तक करीब पचास हजार करोड़ रुपये चुकाएंगे. ऐसे में हर मैच से बोर्ड के खजाने में करीब 105 से लेकर 118 करोड़ रुपये मीडिया राइट्स से आते हैं. रविवार को दो मैच हुए, तो बोर्ड को मीडिया राइट्स से ही इन दो मैचों का शेयर 210-236 करोड़ रुपये मिलेंगे. इस पैसे को BCCI टीमों में बांटता है. अगर प्रतिशत के हिसाब से बात करें, तो कुल कमाई का 35 से 40 % पैसा पहले बीसीसीआई के पास जाता है और फिर यहां से आगे बंटता है. इसमें से 18 से 20 % BCCI का हिस्सा होता है, तो इतना ही फ्रेंचाइजी का हिस्सा होता है. मतलब 50-60 करोड़ रुपये बोर्ड के खाते में जाते हैं, तो इतना ही पैसा सभी 10 टीमों में बराबर बंटता है.
3. विज्ञापन से अकूत कमाई
हर मैच में विज्ञापनों की भरमार होती है. और यही ब्रॉडकास्टर की कमाई का ईंधन है. हर मैच से ब्रॉडकास्टर को 120-160 करोड़ रुपये की कमाई होती है. यह पैसा टीवी और डिजिटल संसाधनों से ब्रॉडकास्टर के पास आता है, लेकिन इससे फ्रेंचाइजी को कुछ नहीं जाता है. यह सीधा प्रॉफिट ब्रॉडकास्टर का है. प्रतिशत के लिहाज से कुल कमाई का 50-55 % पैसा ब्रॉडकास्टोर को विज्ञापन से आता है. उदाहरण के तौर पर अगर किसी मैच से कुल आमदनी 250 करोड़ रुपये होती है, तो 125-140 करोड़ रुपये ब्रॉडकास्टर के पास चले जाते हैं.
3. टिकटों की बिक्री
यह भी मैचों से होने वाली कमाई का एक बड़ा जरिया है. हर मैच से आयोजक टिकटों से 5-40 करोड़ रुपये की कमाई करते हैं. हालांकि, यह स्टेडियम के साइज और टीम की लोकप्रियता आदि जैसी बातों पर पर भी निर्भर करता है. अगर प्रतिशत में बात करें, तो संपूर्ण हिस्से में टिकटों की बिक्री रकम का योगदान 5-15 % होता है. यह पूरी तरह से मेजबान टीम के खाते में जाता है. संपूर्ण कमाई में यह करीब 15-35 करोड़ रुपये प्रति मैच हो सकता है.
5. प्रायोजक से होने वाली कमाई
-केंद्रीय प्रायोजक: यह प्रायोजक सीधे बीसीसीआई से अनुबंधित होते हैं. जैसे टाइटल स्पॉन्सर मतलब टाटा आईपीएल. ऐसे में टाटा से पूरी रकम बीसीसीआई के पास जाएगी. और इसमें से एक तय हिस्सा सभी टीमों में बराबर-बराबर बंटता है. अगर प्रतिशत में बात करें, तो एक मैच की प्रायोजन राशि का करीब 5-10 % हिस्सा बोर्ड सभी टीमों में बराबर बांटता है.
-टीम के प्रायोजक: हर टीम अपनी ओर से प्रायोजक ढूंढने के लिए स्वतंत्र है. अपना टाइटल स्पॉन्सर, जिसका बड़ा लोगो टीम की शर्ट के अलावा कई जगह होता है. और इससे हर टीम हर साल करीब 3-10 करोड़ रुपये की कमाई करती है और यह पूरी तरह से फ्रेंचाइजी की कमाई होती है.
3. किसके हिस्से में कितना पैसा
-बीसीसीआई को हर मैच से ब्रॉडकास्टर से अनुमानित 50-55 करोड़ रुपये मिलते हैं
-वहीं, केंद्रीय स्पॉन्सर से भी अच्छा खासा पैसा आता है. और दोनों मद को मिलाकर बोर्ड को हर मैच से 50-60 करोड़ रुपये मिलते हैं.
5. सभी फ्रेंचाइजी टीमों को बराबर पैसा
सेंट्रल पूल में आए पैसे से बीसीसीआई करीब 50 प्रतिशत पैसा सभी टीमों को बराबर -बराबर 10 टीमों को देता है. यह रकम 50-55 करोड़ रुपये बैठती है और हर मैच के हिसाब से फ्रेंचाइजी को 5-7 करोड़ रुपये मिलते हैं.
6. मेजबान फ्रेंचाइजी की कमाई थोड़ा ज्यादा
हर टीम अपने घरेलू मैदान पर मैच आयोजित करती है, तो इससे उसके खाते में ज्यादा पैसे आते हैं. फ्रेंचाइजी को हर सीजन करीब 25-40 करोड़ रुपये तक की रकम टिकट बिक्री से आती है, तो स्थानीय स्पॉन्सरों से सभी 3-10 करोड़ रुपये प्रति मैच मिलते हैं. दोनों को मिलाकर यह रकम हर मैच में करीब 40-50 करोड़ रुपये बैठती है.
7. ब्रॉडकास्टर का मुनाफा
ब्रॉडकास्टर हर मैच से 120-160 करोड़ रुपये कमाता है, तो हर मैच में प्रोडक्शन सहित बाकी बातों पर उसके 110 करोड़ रुपये का खर्च आता है. लेकिन खर्च कम होने के कारण उसकी कमाई मोटी होती है, जो हर मैच करीब 50-80 करोड़ रुपये बैठती है.
मैच के आयोजन पर खर्च
एक मैच के आयोजन पर करीब 12 से 20 करोड़ रुपये (अनुमानित, मैच के हिसाब) से आता है. इसे आप इस तरह ब्रेक-अप से समझें
1. स्टेडियम+ग्राउंड तैयारी: (1 से 2.5 करोड़ )
2. सिक्योरिटी (सबसे बड़े खर्चों में से एक): (1 से 1.5 करोड़)
3. टीम लॉजिस्टिक्स: (1.5 से 2.5 करोड़)
4. इवेंट प्रोडक्शनछ (1 से 1.5 करोड़)
5. स्टॉफ एंड ऑपरेशन (1 से 1.5 करोड़)
6. मैच अधिकारी: (करीब 50 लाख)
7. लोकल मार्केटिंग: (करीब 1 करोड़)
8. मिले-जुले खर्च: (1 करोड़)
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कुल खर्च: 12-20 करोड़ रुपये प्रति मैच
कमाई: 200-300 करोड़ रुपये प्रति मैच
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