Indian Premier League: अब टी20 वर्ल्ड कप की जीत की खुमारी लोगों के सिर से पूरी तरह उतर चुकी है. जो थोड़ी बहुत बाकी बची भी है, वह चंद दिनों के भीतर शुरू हो रहे इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) के साथ ही पूरी तरह खत्म हो जाएगी. ठीक वर्ल्ड कप की तरह फैंस और पूर्व क्रिकेटरों के बीच 19वें IPLसंस्करण की चर्चा, विमर्श ने गति पकड़ ली है. चहेते खिलाड़ियों और टूर्नामेंट के संभावित विजेता के बारे में बातें हो रही हैं, तो कोई किसी और पहलू से बात कर रहा है. बहरहाल, इससे इतर हम आपको उन 5 कुछ अहम नियमों के बारे में बताते हैं, जिसे आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ने इस बार भी बनाए रखा है. और ये नियम मेगा इवेंट पर बहुत ही गहरा असर छोड़ने जा रहे हैं. चलिए आप इनके बारे में बारी-बारी से जान लीजिए
1. इम्पैक्ट प्लेयर नियम
यह नियम को दो संस्करण पहले 2023 में शुरू किया गया था. रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों की आलोचना के बावजूद इसे साल 2027 तक जारी रखने का फैसला किया गया. इसके तहत टॉस के समय हर टीम को 11 खिलाड़ियों के साथ 5 सब्स्टीट्यूट खिलाड़ियों के नाम देने होते हैं.
2. अनकैप्ड खिलाड़ी नियम
यह नियम विशेष रूप से एमएस धोनी और उनके जैसी उम्र वाले दिग्गज खिलाड़ियों को ध्यान में रखकर बनाया गया था. इसके तहत यदि किसी भारतीय खिलाड़ी ने पिछले 5 वर्षों में कोई अंतरराष्ट्रीय मैच (Test, ODI, T20I) नहीं खेला है या उसके पास BCCI का सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट नहीं है, तो उसे 'अनकैप्ड' माना जाएगा.
3. मैच फीस
यह मैच फीस को लेकर बड़ा फैसला लेने के बाद दूसरा ही सीजन होगा, जब हर मैच खेलने वाले खिलाड़ी को अनुबंध से अलग तय मैच फीस मिलेगी. इसके तहत प्लेइंग इलेवन और इंपैक्ट प्लेयर का हिस्सा बनने वाले खिलाड़ी को 7.5 लाख रुपये मिलेंगे. मतलब अगर कोई खिलाड़ी सभी मैच खेलता है, तो वह अनुबंध से मिलने वाली राशि से अलग ही अपने आप में करोड़पति बन जाएगा.
4. एक ओवर में दो बाउंसर
टी20 में आम तौर पर एक ओवर में केवल एक बाउंसर की अनुमति होती है, लेकिन IPL में गेंदबाज दो बाउंसर फेंक सकते हैं. इसे गवर्निंग काउंसिल ने खेल में संतुलन बनाने और गेंदबाजों को राहत प्रदान करने के लिए बनाया था. लेकिन पिछले साल सनराइजर्स हैदराबाद ने जितने बड़े-बड़े स्कोर बनाए हैं, उसे देखकर लगता नहीं कि एक ओवर में 2 बाउंसर ने बॉलरों का ज्यादा भला किया हैा
5. स्मार्ट रिप्ले सिस्टम
DRS (Decision Review System) को और अधिक सटीक और तेज बनाने के लिए यह तकनीक जारी रहेगी. इस तकनीक के तहत टीवी अंपायर सीधे हॉक-आई (Hawk-Eye) ऑपरेटरों से बात करते हैं और स्क्रीन पर कई एंगल से फुटेज देखते हैं. इसका फायदा यह होता है कि इसमें इसमें टीवी डायरेक्टर की भूमिका खत्म हो जाती है. और इस वजह से स्टंपिंग, कैच और रन-आउट के फैसले बहुत जल्दी और बिना किसी गलती के लिए जाते हैं.














