India vs New Zealand: 18 महीने, टीम इंडिया के माथे पर 2 बड़े कलंक, 'गंभीर' सवालों का जिम्मेदार कौन?

India vs New Zealand, 3rd ODI: पिछले 14 महीनों के भीतर भारतीय क्रिकेट के माथे पर न्यूजीलैंड ने 2 ऐसे दाग लगा दिए हैं, जहां बीसीसीआई को बहुत ही गंभीर चिंतन-मनन करना होगा

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New Zealand tour of India, 2026: टीम इंडिया को बड़े सवालों का जवाब ढूंढना होगा

करोड़ों भारतीय क्रिकेट फैंस अभी भी साल 2024 में नवंबर में घर में टेस्ट में न्यूजीलैंड के हाथों  हुए 3-0 के सफाए को अभी भी नहीं भूले हैं. जब भी यह ज़हन में आता है, तो जख्म हरे हो जाते हैं. और आगे भी होते रहेंगे. लेकिन अब इन जख्मों में नमक छिड़कने का काम किया रविवार को इंदौर में मिली 41 रन से मैच और सीरीज में 2-1 की हार ने. पिछले 52 साल के न्यूजीलैंड के इतिहास में यह पहला मौका रहा, जब कीवी टीम ने भारत को उसकी धरती पर द्विपक्षीय सीरीज में मात दी. दोनों देशों के बीच पहला वनडे मुकाबला साल 1975 विश्व कप के तहत इंग्लैंड में 14 जून को खेला गया था. तब से न्यूजीलैंड भारत को वनडे में उसके ही घर में मात नहीं दे सका था, लेकिन पिछले 18 महीनों में उसे टीम इंडिया  और उसके करोड़ों फैंस को ताउम्र घाव दे दिए हैं, जो समय-समय पर या याद आने  पर सालते रहेंगे. अब सवाल है कि इसका जिम्मेदार कौन है?

तब गौतम गंभीर नए-नए थे!

जब न्यूजीलैंड के हाथों टेस्ट में 2024 जून में 3-0 से सफाया हुआ, तो कहा गया कि गौतम गंभीर नए थे. ऐसे में उन्हें ज्यादा दोष नहीं दिया जा सकता. गंभीर इसी साल जुलाई में टीम इंडिया के हेड कोच  नियुक्त हुए थे. और उनकी नियुक्ति के तीन महीने भी नहीं हुए थे, वह अपनी कुर्सी के अभ्यस्त भी नहीं हुए थे कि कीवियों ने माथे पर बड़ा कलंक लगा दिया.  करोड़ों फैंस इस दर्द से उबरे भी नहीं थे, कि करीब डेढ़ साल बाद कीवी टीम ने अपने 'स्टार क्रिकेटरों ' के बिना भारत को वनडे में उसी के घर में 2-1 से धोकर एक और बड़ा घाव दे दिया.

....लेकिन इस हार का दोषी कौन?

अब गौतम गंभीर को आए करीब डेढ़ साल का समय हो चुका है. यह सही है कि उनके मार्गदर्शन में ही भारत ने पिचले साल मार्च में ही दुबई में इसी न्यूजीलैंड टीम को फाइनल में 4 विकेट से हराकर चैंपियंयस ट्रॉफी जीती थी. हालांकि, यह भी एक तथ्य है कि रोहित ने सार्वजनिक तौर पर यह भी कहा था कि टीम इंडिया को जीत रवि शास्त्री द्वारा तैयार किए गए वर्क कल्चर और कामकाजी तरीके और उसके असर के कारण जीत मिली. लेकिन चैंपियंस ट्रॉफी की जीत से इतर अपने घर में हारने का दर्द यह बहुत ही ज्यादा सालने वाला है. और सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस हार का जिम्मेदार कौन है? 

मनसपंसद स्टाफ, सर्वोच्च पावर,  पसंदीदा खिलाड़ी, लेकिन कमी कहां?

अगर यह कहा जाए कि गौतम गंभीर भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे महंगे, सबसे पावरफुल कोच हैं. BCCI के संविधान के अनुसार हेड कोच का टीम चयन में कोई दखल नहीं होता. लेकिन BCCI ने दायरे से बाहर जाकर उन्हें वह सबकुछ दिया, जो उन्हें चाहिए था. मनपसंद सैलरी, स्टॉफ और बाकी तमाम बातें. इनके अलावा खिलाड़ियों के लिए खास नियम, खास प्रोटोकॉल, घरेलू क्रिकेट में सितारों का अनिवार्य रूप से खेलना वगैरह-वगैरह. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इसके बावजूद कहां और क्या गलत जा रहा है? कैसे न्यूजीलैंड टीम अपने सबसे बड़े सितारे केन विलियम्सन और मैच जिताऊ गेंदबाज मिचेल सेंटनर के बिना आती है और बहुत ही आसानी से भारत को 2- 1 से मात देने में सफल हो जाती है. जाहिर हैं कि कहीं न कहीं और मोटा अंतर जरूर है, जिसे जल्द से जल्द पाटना होगा. देखते ही देखते साल 2027 विश्व कप भी जा जाएगा. लेकिन इस सवाल का जवाब तो देना ही होाग कि घर में न्यूजीलैंड से 2-1 से पिटने का जिम्मेदार कौन है?


 

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