इंदौर में न्यूजीलैंड के खिलाफ जिस बात का डर था, वह दो सौ फीसदी सच निकली. पिछले दोनों मैचों में भारतीय बॉलरों की जमकर सुतली खोलने वाले कीवी बल्लेबाड डारेल मिचेल ने इंदौर में भी प्रचंड फॉर्म जारी रखते हुए भारत का बैंड बजा दिया. मिचेल ने सीरीज का लगातार दूसरा और करियर का नौवां शतक जड़ते हुए 131 गेंदों पर 15 चौकों और 3 छक्कों से 137 रन बनाए. वास्तव में परी सीरीज में मिचेल भारत के लिए बड़ी मारक मिसाइल बन गए. और उन्होंने मेजबानों को ऐसा बड़ा घाव दे दिया, जिसे गंभीर एंड कंपनी लंबे समय तक याद रखेगी. मिचेल ने सीरीज का समापन 176 के औसत से 352 रन के साथ खत्म किया. और इस सबसे ज्यादा रन और औसत रूपी घाव में दो शतक और 1 अर्द्धशतक भी शामिल रहा. इस आंकड़े के साथ ही मिचेल ने एक और बड़ा कारनामा कर दिया
डारेल मिचेल जैसा कोई नहीं
धाकड़ बल्लेबाज ने सीरीज का समापन 352 रनों के साथ किया है, तो इसी के साथ ही डारेल मिचेल अपने देश के वनडे इतिहास में तीन मैचों की सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए. कीवी टीम ने अपना पहला वनडे मैच 11 फरवरी 1973 को क्राइस्टचर्च में पाकिस्तान के खिलाफ खेला था. मतलब डारेल मिचले यह कारनामा करने वाले 52 साल में न्यूजीलैंड के पहले बल्लेबाज बन गए. मिचेल से पहले किसी भी कीवी बल्लेबाज ने तीन वनडे मैचों की सीरीज में पहले कभी इतने रन नहीं ही बनाए थे.
मिचेल का दम, न्यूजीलैंड का बड़ा चैलेंज!
यह मिचेल का ही असर रहा कि न्यूजीलैंड ने 5 रन पर 2 विकेट से उबरते हुए न केवल शानदार वापसी की, बल्कि भारत के सामने 337 रनों का ऐसा चैलेंज खड़ा कर दिया, जिसे भेदना मेजबानों के लिए खासा मुश्किल होगा. डारेल के अलावा ग्लेन फिलिप्स ने भी 106 रन बनाए. दोनों के बीच चौथे विकेट के लिए 212 रनों की साझेदादारी की, तो ब्रेसवेल ने भी 18 गेंदों पर 28 र बनाए. नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने कोटे के 50 ओवरों में 8 विकेट पर 337 का स्कोर खड़ा कर दिया. अर्शदीप और हर्षित ने तीन-तीन विकेट चटकाए, तो सिराज और जडेजा ने एक-एक विकेट लिया.














