जिस वक्त भारत और भारत र न्यूज़ीलैंड की टीमें वडोदरा में वनडे सीरीज़ की पहली परीक्षा में एक-दूसरे पर ज़ोर आज़माइश करेंगी, उसी वक्त ICC के अध्यक्ष जय शाह शायद अपने कार्यकाल के एक और इम्तिहान में एक मुश्किल हल निकालने की कोशिश कर रहे होंगे. बांग्लादेश-टी 20 वर्ल्ड कप मुद्दे पर जय शाह बीसीसीआई के सदस्यों के साथ मुलाक़ात करेंगे. केकेआर द्वारा मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल 2026 के पहले रिलीज किए जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ते-बढ़ते बांग्लादेश के के मैच भारत के बाहर करने पर शिफ्ट हुआ. बांग्लादेश बोर्ड ने आईसीसी को इसके लिए दो चिठ्ठी भी लिखी और रविवार को होने वाली बैठक उसी चिठ्ठी का नतीजा है.
अगले 10 साल के क्रिकेट के लिए बनेगा उदाहरण
जय शाह की रविवार को बीसीसीआई के साथ बैठक एक नियमित चर्चा से कहीं अधिक बड़ी और कहीं अधिक मायने वाली साबित ह सकती है जिससे उपमहाद्वीप के अगले दस साल के क्रिकेट की दशा और दिशा निर्धारित हो सकती है. आईसीसी चेयरमैन के लिए यह एक मुश्किल मैनेजमेंट का इम्तिहान है जहां क्रिकेट के मसले को राजनीतिक मसलों ने मैदान और भावनाओं से भी कहीं बड़ा बना दिया है. इसलिए इस मसले का हल सिर्फ़ क्रिकेट की समस्या का समाधान नहीं बल्कि क्रिकेट प्रशासन को कूटनीति, धारणा और राजनीति के साथ मिश्रित समाधान होगा.
बांग्लादेश की मांग- वेन्यु शिफ़्ट से पूर्ण सुरक्षा तक
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और फ़िलहाल बांग्लादेश का अंतरिम खेल मंत्रालय टी20 वर्ल्ड कप में भारत नहीं आने की बात पर अड़ा हुआ है. जय शाह के लिए चुनौती है कि वो इस मसले का ऐसा हल ढूंढें जिससे बांग्लादेश के क्रिकेट फ़ैन्स, क्रिकेट टीम के साथ दुनिया भर के क्रिकेट खेलने वाले देश इसे एक मिसाल के तौर पर देख सकें. इसी बड़े उद्देश्य से जय शाह की बीसीसीआई के अधिकारियों के साथ मुलाक़ात बेहद अहम मानी जा रही है.
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क्रिकेट से बड़ा बना मुस्ताफ़िज़ुर का मुद्दा
मुस्ताफ़िज़ुर रहमान के आईपीएल से निकाले जाने का मुद्दा अचानक ही बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और बांग्लादेश के खेल से जुड़े अधिकारियों के लिए मान-सम्मान का प्रशन बन गया. आनन-फ़ानन में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की बैठक हुई. अंतरिम सरकार के खेल मंत्रालय के सलाहकार ने फेसबुक पर कुंठा भरे भड़काऊ पत्र से अपना इदारा साफ़ कर दिया.
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बांग्लादेश के बांग्लादेश खेल मंत्रालय के सलाहकार डॉ. आसिफ़ नज़रूल ने अपने आधिकारिक फ़ेसबुक अकाउंट से पोस्ट किया,"भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने कोलकाता नाइट राइडर्स को निर्देश दिया है कि वह उग्र सांप्रदायिक समूहों के लिए नीति स्वीकार कर बांग्लादेश क्रिकेटर मोफिजुर रहमान को टीम से बाहर करे. मैं इसकी कड़ी निंदा और विरोध करता हूं. खेल मंत्रालय के जिम्मेदार सलाहकार के तौर पर मैंने क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को पूरा मामला आईसीसी को समझाने को कहा. बोर्ड ने कहा कि जहां एक बांग्लादेश क्रिकेटर अनुबंधित होने के बावजूद भारत में नहीं खेल सकता है, वहीं बांग्लादेश की पूरी पूरी क्रिकेट टीम वर्ल्ड कप में जाने के लिए सुरक्षित महसूस नहीं कर सकती है. मैंने भी बोर्ड को बांग्लादेश वर्ल्ड कप खेल श्रीलंका में होने का अनुरोध करने का निर्देश दिया है. अब गुलामी के दिन गये."
बांग्लादेश के लिए राष्ट्रीय गौरव की बात
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने अपने भारत में खेले जाने वाले मैचों के वेन्यु बदलकर श्रीलंका ले जाने की मांग रखी है और उस मांग पर अड़ गये हैं. बांग्लादेश बोर्ड ने साफ़ तौर पर कहा है कि स्पष्ट किया कि यह मुद्दा उनके लिए 'राष्ट्रीय गौरव चोट' को बचाने का है. उसने इतना ज़रूर कहा है कि अगर बांग्लादेश की टीम भारत आती है तो उसके हर सदस्य- खिलाड़ी, सपोर्ट स्टाफ़, अधिकारी और कोच की निजी सुरक्षा की गारंटी ली जाए, इसका उन्हें आश्वासन मिले. यानी मुद्दा टीम की सुरक्षा से बढ़ाकर सम्मान का कर दिया गया है. ये एक पॉलिटिकल मैसेजिंग या राजनीतिक संदेश का भी हिस्सा है.
जय शाह का बड़ा इम्तिहान
ICC के अध्यक्ष जय शाह के लिए ये एक बड़ी चुनौती बन गई है कि इस मसले का हल क्रिकेट के संदर्भ में निकाले जिससे हर स्टेकहोल्डर राजनीतिक जवाब तो ढूंढ सके पर जिसके बड़े राजनीतिक मतलब नहीं निकाले जा सकें. आईसीसी ने अभी तक बांग्लादेश बोर्ड को आधिकारिक तौर पर जवाब नहीं दिया है. उनका पहला काम आंतरिक ही होगा जहां उन्हें बीसीसीआई के साथ मिलकर मौजूदा टूर्नामेंट के मद्देनज़र सुरक्षा प्लान की समीक्षा करनी होगी. ये जानना होगा कि बांग्लादेश कहाँ सुरक्षा को लेकर कमी महसूस कर रहा है.
विवाद और हल का क्या होगा असर
ये भी देखना होगा कि आईसीसी, बांग्लादेश के मुद्दे को एक स्टेकहोल्डर की मांग और एक भावनात्मक प्रोटेस्ट के बीच संतुलन रखकर उनका पक्ष भी सुन सके. ऐसे में ऐसे प्लान की उम्मीद करनी होगी जो एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक हो जिसे बांग्लादेश बिना दबाव के मान सके. एक ऐसा हल जिससे ना आईसीसी की साख गिरे, ना भारतीय पक्ष का नुकसान हो और बांग्लादेश बोर्ड अपने क्रिकेट फ़ैन्स को उसे राजनितिक फेस सेविंग या जिससे उनके फ़ैन्स खुश हो सकें, उस तरह से पेश कर सकें. इन सबके बीच क्रिकेट को बिल्कुल केंद्र में रखने की ज़रूरत होगी.
इन सब समीकरण के बीच बांग्लादेश के पक्ष को नज़रअंदाज़ करना उनके लिए एक कानूनी और राजनीतिक दायरा खोल देगा. बांग्लादेश की टीम ने टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई कर लिया है, और उन्हें बाहर करना एक आइडियल हल तो बिल्कुल नहीं कहा जा सकेगा. ये मसला अगर आईसीसी के सदस्यों के बीच वोटिंग तक पहुंचता है तो उसके अलग ख़तरे हो सकते हैं, जहां पूरी दुनिया के क्रिकेट खेलनेवाले देश अचानक बंटे हुए नज़र आ सकते हैं. फिर आनेवाले वक्त में ये एक ख़तरनाक मिसाल के तौर पर भी पेश किया जाएगा.
बांग्लादेश के खेल सलाहकार आसिफ नज़रुल ने सार्वजनिक रूप से वर्तमान योजना का विरोध किया है. इस मुद्दे को राष्ट्रीय गौरव के अपमान के रूप में सबके सामने पेश कर दिया है. यहां आईसीसी चेयरमैन जय शाह की भूमिका निर्णायक होनेवाली है. उनके सामने कुछ भी करते हुए खुद को भारतीय क्रिकेट के चेहरे के रूप में नहीं, बल्कि पुरज़ोर तरीके से ग्लोबल खेल के एक न्यूट्रल अंपायर के रूप में पेश होने की ज़रूरत होगी- ताकि हर मामले में क्रिकेट की जीत हो सके.
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