अभिषेक शर्मा के लिए क्या अब वो वक्त आ गया है? ऐसा किया तो स्टार से लीजेंड बनेंगे

अभिषेक शर्मा पिछले दोनों IPL सीजन में 400+ स्कोर किए लेकिन जब रन नहीं बन रहे थे तब उनकी बैटिंग तकनीक और अप्रोच पर गंभीर सवाल उठने लगे.

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अभिषेक शर्मा
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  • अभिषेक शर्मा पिछले कुछ समय से अपने फॉर्म से जूझ रहे हैं. उनके बल्ले से रन नहीं निकल रहे.
  • टी20 वर्ल्ड कप में अभिषेक जबरदस्त लड़खड़ाए और IPL 2026 के पहले मैच में भी उनका बल्ला रूठ गया.
  • लीजेंड कहते हैं अभिषेक को पिच पर संयम बरतना होगा. दिग्गज कहते हैं उन्हें अपनी तकनीक पर भी काम करना होगा.
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अभिषेक शर्मा IPL के पिछले दो सीजन में तूफान बनकर उभरे हैं. IPL 2025 में 193 के स्ट्राइक रेट से 439 रन. IPL 2024 में 204 के स्ट्राइक रेट से 484 रन उनके बल्ले से निकले हैं. IPL 2026 के पहले मैच में नाकाम रहे अभिषेक ने दूसरे ही मुकाबले में दमदार इनिंग्स खेली. अपने चिर परिचित अंदाज में 21 गेंदों पर 48 रनों की धुंआधार पारी खेली लेकिन इस साल फरवरी-मार्च में खेले गए टी20 वर्ल्ड कप में उनका फॉर्म गिरते ही उन पर सवाल उठने लगे. शुरुआती तीन मैचों में जीरो बनाए. वर्ल्ड कप के 8 मैचों में 158.43 के स्ट्राइक रेट से केवल दो अर्धशतक और कुल 141 रन ही उनके बल्ले से निकले तो उनकी बैटिंग तकनीक और अप्रोच पर गंभीर सवाल उठने लगे.

सबसे पहले तो बात उनके मैच अवेयरनेस का उठा. एबी डिविलियर्स जैसे दिग्गज ने साफ कहा कि 'अब वो बच्चा नहीं रहे'. उन्होंने कहा, "वे 25 साल के हो चुके हैं, 20 के नहीं हैं. तो उन्हें अधिक जिम्मेदारी लेनी होगी."

डिविलियर्स यह भी बोले, "अभिषेक के टैलेंट पर कोई शक नहीं है लेकिन कंसिस्टेंसी यानी एक समान प्रदर्शन बनाए रखने का बड़ा सवाल है. वर्ल्ड कप में उनका प्रदर्शन फीका ही माना जाएगा." साथ ही डिविलियर्स ने यह भी कहा, "जब पूरी दुनिया आपसे उम्मीद लगाए बैठी हो तो असली लड़ाई मेंटल होती है. आपको गेम समझने की जरूरत है. उन्होंने सीधे तरीके से समझाया कि अगर जसप्रीत बुमराह जैसा बॉलर हो, तो क्या हर बॉल पर मारेंगे? गेम यहीं पर है. ये समझना होगा कि कब अटैक करना है, कब रेस्पेक्ट देनी है और कब स्ट्राइक रोटेट करनी है." डिविलियर्स के मुताबिक यही अभिषेक के गेम में मिसिंग लिंक है.

गावस्कर बोले- बैलेंस गेम से गायब

डिविलियर्स की तरह की भारत के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर सुनील गावस्कर भी अभिषेक को लेकर कहते रहे हैं कि अभिषेक पहली गेंद से ही छक्का मारने का प्रयास करते हैं, यही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बनती जा रही है. इसका मतलब साफ है कि वो क्रीज पर सेट होने के लिए समय नहीं लेते. मैच के परिस्थितियों को पढ़े बिना बड़ा शॉट लगाने की कोशिश में जल्दी आउट हो रहे हैं. बेशक, टी20 में आक्रामक होना जरूरी है पर हर गेंद पर हमला करना जरूरी नहीं होती और यही बैलेंस उनकी गेम में अभी गायब दिख रहा है."

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शास्त्री ने कहा- सेट हो गए तो छक्के-चौकों की बरसात

रवि शास्त्री भी यही कहते हैं कि अभिषेक को क्रीज पर थोड़ा टाइम देना होगा खुद को. हालांकि शास्त्री यह भी कहते हैं कि, "अगर वो एक बार सेट हो गया तो छक्के-चौके निकालना उसके लिए बेहद आसान है."

क्या किशन के प्रदर्शन से दबाव में हैं?

वर्ल्ड कप में उनकी तुलना में ईशान किशन जबरदस्त फॉर्म में दिखे, शायद उस दौरान उनसे की गई तुलना ने भी दबाव बढ़ाया हो. पर IPL के पहले मैच में ईशान पिच पर आए ही उनके आउट होने के बाद और 38 गेंदों पर 80 रन बना डाले. RCB के खिलाफ उस मैच में भी अभिषेक 8 गेंदों पर केवल 7 रन ही बना सके.

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हालांकि अभिषेक का प्रदर्शन कुछ समय के लिए जरूर औसत से कमतर है, पर यह कहना बेमानी है कि वो ईशान किशन के प्रदर्शन से दबाव में आ गए हैं. अभिषेक खुद वर्ल्ड नंबर-1 टी20 बैटर हैं. ऐसा नहीं है कि इस पायदान पर वो हाल फिलहाल आए हैं. लंबे अरसे से हैं, तो ऐसा तो बिल्कुल भी नहीं है कि वो किसी अन्य खिलाड़ी के प्रदर्शन के प्रभाव में आएंगे.

सहवाग से तुलना लेकिन फर्क भी...

अभिषेक के हालिया प्रदर्शन पर एक टीवी कार्यक्रम के दौरान कुंबले ने उनकी तुलना वीरेंद्र सहवाग से की. कुंबले कहते हैं, “वो हर गेंद मारना चाहते हैं, बिल्कुल सहवाग की तरह.” लेकिन साथ ही ये फर्क भी बताया कि सहवाग वक्त से साथ अपनी पारी को पेस करना सीख लिए, अभिषेक को भी ऐसा ही करना होगा. इसका मतलब ये स्पष्ट है कि 200 का स्ट्राइक रेट अच्छा तो है पर हर मैच में 300 रन का टारगेट ही रखा जाए ये जरूरी नहीं है.

कहां चूक रहे हैं अभिषेक?

दरअसल जो टी20 वर्ल्ड कप अभी-अभी खत्म हुआ है और जिसमें भारत चैंपियन बना है उसमें शुरुआती तीन मैचों में तीन जीरो बनाने के बाद जब अभिषेक की बल्लेबाजी में खामियां बारिकी से देखी जा रही थीं तब जानकारों और क्रिकेटर के दिग्गजों ने कहा भी कि वो शॉर्ट पिच गेंदों पर गलती कर रहे हैं, खास कर राइट-ईयर लाइन यानी शरीर और सिर के पास आने वाली गेंदों पर उनका सिर पीछे हट जाता है और हाथ गेंद तक पहुंचने की कोशिश करता है, जिससे गलत शॉट निकलते हैं. गेंदबाज अब उन्हें उनकी रिब्स और हेलमेट के आसपास टारगेट करते हैं और अभिषेक बार-बार एक्रॉस द लाइन खेलते हुए आउट हो रहे हैं.

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ऑफ-स्पिन के सामने फंसते क्यों हैं?

इसके अलावा ऑफ स्पिनर्स उनकी एक और बड़ी कमजोरी बनते जा रहे हैं. पावरप्ले में अगर ऑफ स्पिनर लगाए गए और उसने स्टंप-टू-स्टंप लाइन रखी तो अभिषेक जगह नहीं बना पाते और आउट हो जाते हैं. वर्ल्ड कप में पाकिस्तान ने पहली ओवर ही ऑफ स्पिनर सलमान आगा को दी. सलमान ने विकेट-टू-विकेट बॉलिंग की. शुरुआती तीन गेंदों पर अभिषेक कोई रन नहीं बना सके. सलमान आगा ने चौथी गेंद बैक ऑफ लेंथ (गुड लेंथ से छोटी गेंद) पर टप्पा खिलाते हुए मिडिल और लेग स्टंप के बीच रखी. कौन सा शॉट लगाएं अभिषेक यह निर्णय नहीं ले सके और मिड ऑन पर कैच दे बैठे. ठीक अगले ही मैच में नीदरलैंड्स के आर्यन दत्त ने भी बैक ऑफ लेंथ गेंद पर ही अभिषेक को बोल्ड किया था.  

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ऐसे लगता है कि जब शुरुआत में बाउंड्री नहीं मिलती तो वे घबरा जाते हैं. क्रॉस-बैट शॉट खेलने लगते हैं. ऑफ स्पिन पर बार-बार गलती, हर गेंद पर अटैक करना और दबाव में गलत शॉट खेलना एक तरह से अभिषेक का फिलहाल चिर-परिचित अंदाज हो गया है. महान खिलाड़ी वही होता है जो ये समझे कि उसे क्या नहीं करना है. अभिषेक में टैलेंट कूट-कूट कर भरा है. वो पहले से ही स्टार है. अब समझदारी भरा फैसला मैदान पर लेना है. पिच पर संयम बरतना सीखना होगा जो उन्हें अगले लेवल पर ले जाएगा, जहां वो लीजेंड बनेंगे.

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