India U19 wins world Cup: जब बाद में बल्लेबाजी करने वाली के सिर पर खिताब जीतने के लिए बोझ 412 रनों का हो, तो वास्तव में 99 प्रतिशत परिणाम पहली पारी खत्म होने पर ही हो जाता है. और कुछ ऐसा ही शुक्रवार को हरारे के हरारे स्पोर्ट्स क्लब में इंग्लैंड और भारत (Ind vs Eng Final) के बीच खेले गए अंडर-19 विश्व कप फाइनल (U19 World Cup final) में देखने को मिला. वैभव सूर्यवंशी (175 रन, 80 गेंद, 15 चौके, 15 छक्के) के सुनामी अंदाज और ऐतिहासिक शतक से भारतीय जूनियरों ने इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 412 रनों का लक्ष्य रखा, तो तभी साफ हो गया कि इस बार जूनियर विश्व चैंपियन कौन है. और ऐसा आखिर में हुआ भी. जूनियर टीम इंडिया ने फाइनल में इंग्लैंड को 100 रनों से रौंदकर मेगा इवेंट के इतिहास में छठी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर लिया. वास्तव में भारत की पारी 411 पर जब खत्म हुई, तो तभी साफ हो गया कि यहां से इंडियंस जूनियर्स को सिर्फ औपचारिकत भर ही निभानी थी. और ठीक हुआ भी ऐसा. दीपेश देवेंद्रन ने दो, जबकि आरएस अंबरीश, खिलान पटेल, कनिष्क चौकान और आयुष म्हात्रे ने एक-एक विकेट लिया
ज्यादा ही भारी बोझ साबित हुआ इंग्लैंड के लिए
टीम इंडिया से मिले 412 रन के विशाल स्कोर के बावजूद उम्मीद थी कि इंग्लैंड अच्छा मुकाबला करेगा. लेकिन उसे अच्छी शुरुआत नहीं मिली और ओवर जोसेफ मूर्स (17) सस्ते में निपट गए. अच्छी बात यह रही कि दूसरे छोर पर बेन डावकिन्स (66) ने अच्छा अर्द्धशतक बनाया, तो नंबर-3 बेन मायस (45) सहित बाद में आने वाले थॉमस रेव (31) और सालेब फॉक्नर (नाबाद 75) रन ने भी अपनी ओर से पूरी कोशिश की, लेकिन रनों का बोझ इतना ज्यादा था कि इंग्लिश बल्लेबाज शॉट खेलने की कोशिश में विकेट गंवाते रहे. नतीजा यह रहा कि भारत ने उसे 100 रन से रौंद दिया. पूरी इंग्लिश टीम 35 ओवरों में 7 विकेट पर 268 रन बनाकर ऑलआउट हो गई. और अगर ऐसा हुआ, तो इसकी वजह रही वैभव की पारी और भारत का विशाल स्कोर, जिसके मनोज्ञानिक पहलू ने ही इंग्लैड को हत्थे से उखाड़ दिया.
भारत की पारी:
सबसे जरूरत के समय बोला सूर्यवंशी का बल्ला!
सूर्यवंशी ने यह पारी तब खेली जब इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी. उन्होंने सिर्फ 32 गेंद में अपना अर्धशतक पूरा किया और इसी अंदाज में खेलते हुए दूसरा अर्धशतक सिर्फ 23 गेंद में बना लिया. उनकी 175 रन की पारी में से 150 रन सिर्फ बाउंड्री से ही आए जिसमें 15 छक्के और इतने ही चौके शामिल थे. इस पारी के दौरान उन्होंने विपक्षी टीम के गेंदबाजों की पूरी तरह से धज्जियां उड़ा दी. अब उनके नाम युवा वनडे पारी में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड है. उन्होंने दिसंबर में आईसीसीए दुबई में संयुक्त अरब अमीरात के खिलाफ अपने ही 14 छक्कों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया.
इस बात से जानें वैभवशाली पारी का महत्व!
सूर्यवंशी के नाम अब अंडर-19 क्रिकेट में सबसे तेज 150 रन (71 गेंद में) बनाने का रिकॉर्ड भी है. उन्होंने टूर्नामेंट में पहले इसी मैदान पर इंग्लैंड के बेन मेयेस के रिकॉर्ड को बेहतर बनाया जिन्होंने 98 गेंद में 150 रन बनाए थे. सूर्यवंशी के दबदबे का अंदाजा इससे ही लग जाता है कि उनके 100 से 150 रन तक पहुंचने के दौरान दूसरे छोर पर खड़े वेदांत त्रिवेदी ने सिर्फ चार गेंदों का सामना किया. सूर्यवंशी की बल्लेबाजी इतनी जबरदस्त थी कि आधे मैच तक भारत का रन रेट लगभग 10 था और उस चरण पर टीम का अनुमानित स्कोर 500 था.
डेवाल्ड ब्रेविस को पीछे छोड़ दिया सूर्यवंशी ने
सूर्यवंशी ने जड़े 15 छक्कों के साथ इस संस्करण में 22 छक्के लगा दिए और दक्षिण अफ्रीका के डेवाल्ड ब्रेविस को पीछे छोड़ दिया. जिन्होंने 2022 में 18 छक्कों का रिकॉर्ड बनाया था. सूर्यवंशी इस टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे कम उम्र के शतक लगाने वाले खिलाड़ी भी बन गए हैं. उन्होंने इंग्लैंड के सभी गेंदबाजों की जमकर धुनाई की, लेकिन बाएं हाथ के स्पिनर राल्फी अल्बर्ट और ऑफ-स्पिनर फरहाद अहमद पर क्रमशः 27 और 22 रन बनाए. उनके आउट होने के बाद अभिज्ञान कुंडू (31 गेंद में 40 रन), वेदांत त्रिवेदी (36 गेंद में 32 रन), विहान मल्होत्रा (36 गेंद में 30 रन) और कनिष्क चौहान (20 गेंद में नाबाद 37 रन) ने उपयोगी योगदान दिया. और इससे भारत कोटे के 50 ओवरों में 9 विकेट पर 411 रनों के विशाल स्कोर तक पहुंचने में सफल रहा, तो यहीं तय हो गया कि कौन सी टीम विश्व चैंपियन बनने जा रही है.
कप्तान म्हात्रे का लगातार दूसरा अर्द्धशतक
पहला विकेट एरॉन जॉर्ज (9) के रूप में जल्द ही गिरने के बाद जहां एक छोर पर वैभव ने इंग्लिश बॉलरों की कटाई की, तो दूसरे छोर कप्तान आयुष म्हात्रे (53 रन, 51 गेंद, 7 चौके, 2 छक्के) ने भी पिछले मैच में मिली फॉर्म को आगे बढ़ाते हुए स्कोर को चार सौ के पार पहुंचाने में पूरा-पूरा योगदान दिया. इन दोनों ने मिलकर दूसरे विकेट के लिए 142 रन की साझेदारी की, जो विशाल स्कोर का एक बड़ा आधार साबित हुई, जिसे बाद में विकेटकीप अभिज्ञान कुंडु (40), कनिष्क चौहान (नाबाद 37 रन) ने बड़ा करने में पूरा-पूरा योगदान दिया.














