- CSK का दौर खत्म नहीं हुआ है, लेकिन वो बदल रहा है. ये टीम अब ट्रांजिशन पीरियड में है.
- एक युग (धोनी) खत्म होने की ओर तो दूसरा (ऋतुराज) शुरू होने की कोशिश में है.
- स्टेडियम अब भी पीली जर्सी से अटी पड़ी है. लेकि अब फैंस पूछ रहे हैं कि CSK आखिर कब अपने पुराने रंग में आएगी?
बीते 19 सालों के दौरान जब भी चेन्नई सुपर किंग्स ने किसी भी स्टेडियम में कदम रखा तो वहां दर्शकों के बीच भारी तादाद में पीली जर्सी पहने प्रशंसकों ने इसका स्वागत किया. टीम चाहे हारे या जीते यह सिलसिला बदस्तूर जारी रहा. CSK वही टीम है जिसने धोनी के नेतृत्व में IPL को अपनी मुट्ठी में कर रखा था लेकिन 2023 में आखिरी बार चैंपियन बनने के पहले से ही यह बड़े ट्रांजिशन के दौर से गुजर रही है. बीते दो सालों से हम देख रहे हैं कि चेन्नई की टीम एक युग के धीरे-धीरे अवसान और दूसरे के बनने, गढ़ने की कहानी बन गई है. क्या अब यह पीली जर्सी वाली CSK वही पुरानी डैडी आर्मी वाली ताकत रखती है या बदलाव का दर्द झेल रही है?
ट्रांजिशन की शुरुआत, पहली कोशिश नाकाम
तो सबसे पहले चलते हैं 2022 के IPL की ओर. तब टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही थाला यानी एमएस धोनी की जगह रवींद्र जडेजा को कप्तानी सौंपी गई. टूर्नामेंट शुरू हुआ पर जडेजा न तो बतौर कप्तान और न ही खिलाड़ी के तौर पर चले. CSK ने शुरुआती 8 में से 6 मैच गंवाए और टीम प्लेऑफ की दौड़ से बाहर होने की कगार पर पहुंच गई. खुद कप्तान के तौर पर जडेजा ने केवल 112 रन बनाए और पांच विकेट ही ले सके.
बीच टूर्नामेंट जडेजा ने कप्तानी वापस महेंद्र सिंह धोनी को सौंप दी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया. दोनों के बीच नाराजगी की खबरें भी सामने आईं. तो जडेजा के होटल छोड़ने और CSK से नाराजगी की खबरें भी आईं, जिन्हें बाद में धोनी ने बातचीत के जरिए सुलझाया.
जडेजा से जब कैप्टन कूल कप्तानी वापस मिली तो CSK ने एक बार फिर जीतना शुरू कर दिया. अगला ही मैच हैदराबाद को 13 रन से तो दिल्ली को 91 रनों के बड़े अंतर से हरा दिया. हालांकि बाद के छह में से चार मैच में CSK को तब भी हार का सामना करना पड़ा था. कुल मिलाकर चेन्नई IPL 2022 के अपने 14 में से केवल चार मैच ही जीत सकी.
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2023 में CSK ने रखी अपनी पहचान बरकरार
2023 में भी धोनी ही कप्तान रहे. टीम एक बार फिर जीतने लगी. जडेजा लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहे. चाहे MI के खिलाफ मिली टूर्नामेंट की पहली जीत हो या फाइनल की जीत हो, जडेजा फिर चमके. मुंबई को अपनी गेंदबाजी से हराया तो फाइनल में अंतिम दो गेंदों पर जीत के लिए 10 रन चाहिए थे तब उन्होंने छक्का और चौका जड़ते हुए धोनी को पांचवीं बार ट्रॉफी जीतने वाला कप्तान बनाया. जीत के फौरन बाद धोनी का जडेजा को गोद में उठा लेने वाला यादगार जश्न तब वहां मौजूद हर कैमरे ने कैद किया था.
2023 तक 16 सीजन के दौरान CSK की टीम 10 बार फाइनल में थी. यह भी तब जबकि दो सीजन (2016, 2017) में यह टीम निलंबित रही.
ट्रांजिशन का दूसरा फेज, 0.07 NRR से प्लेऑफ में नहीं पहुंचे
फिर आया 2024 का सीजन जो CSK के लिए टर्निंग पॉइंट था. ऋतुराज गायकवाड़ को टूर्नामेंट से पहले ही टीम की बागडोर सौंप दी गई. यह बदलाव का दूसरा दौर था, जिसमें केवल कप्तान ही नहीं बदला गया, एक पूरी सोच को बदलने की कोशिश थी. पर 2024 के IPL में क्या हुआ? CSK ने RCB और GT को हराकर शुरुआत तो अच्छी की लेकिन बीच सीजन में लय टूट गई.
बल्लेबाजी में टॉप ऑर्डर पर निर्भरता साफ दिखी तो गेंदबाजी में डेथ ओवर्स बड़ा सिरदर्द बन गई. धोनी भले ही कप्तान नहीं थे, पर फिनिशर और मेंटर के रोल में उनकी मौजूदगी ही टीम का सबसे बड़ा सहारा रही. टीम अंतिम मैच तक प्लेऑफ के दौर में बनी रही लेकिन वो प्रभाव नहीं दिखा जिससे सामने वाली टीम डरा करती थी.
आखिर केवल 0.067 के नेट रन रेट के अंतर से RCB प्लेऑफ में पहुंच गई और चेन्नई के किंग्स पीछे छूट गए.
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2025 CSK के इतिहास का सबसे बुरा समय
एक साल बाद खेले गए आईपीएल 2025 में चेन्नई सुपर किंग्स के खेल के स्तर में काफी गिरावट देखा गया. इस सीजन के हर मैच ने टीम की कमजोरी को बार बार उजागर किया. टीम की सबसे बड़ी समस्या रही इसके मिडिल ऑर्डर का बार-बार फेल होना. साथ ही वो स्पिन गेंदबाजी जो कभी CSK की ताकत हुआ करती थी, अब कुंद दिख रही थी. पूरा स्पिन डिपार्टमेंट पूरे सीजन बेअसर रहा. तो तेज गेंदबाज भी कम बेअसर नहीं रहे, डेथ ओवर्स में उनसे रन लीक होता रहा.
गायकवाड़ ने बेशक कप्तानी में समझदारी दिखाई. लेकिन CSK को अपना टीम कॉम्बिनेशन बार-बार बदलना पड़ा, ऐसा करना धोनी की आदतों में कभी शुमार नहीं था.
जो CSK पहले एक सेट प्लेइंग XI के साथ लगभग पूरा टूर्नामेंट ही खेल डालती थी. जहां हर पोजिशन के खिलाड़ी को उसके किरदार की स्थिति की पूरी समझ हुआ करती थी. अनुभव को तरजीह दिया जाता था. टीम के कम्पोजिशन में एकरूपता बनी रहती थी. वहीं 2025 में टीम की बनावट में बार-बार बदलाव किए गए. खिलाड़ियों की बीच टीम में उनकी मौजूदगी को लेकर अनिश्चितता और असमंजस की स्थिति बनी रही. इसके खिलाड़ी मौका मिलने पर प्रदर्शन करने की मजबूरी के दबाव में आ गए.
2026 में उम्मीदें नईं, पर क्या दिख रहा है?
2026 का सीजन CSK के लिए बहुत अहम है. टीम पूरी तरह ऋतुराज गायकवाड़ के ईर्द-गिर्द बन रही है. धोनी की भूमिका सीमित होती जा रही है, फिलहाल वो चोटिल हैं और मैदान पर मौजूद भी नहीं हैं. लिहाजा मैदान पर लिया गया हर फैसला अकेले ऋतुराज गायकवाड़ का होगा. पर पहले मैच में टीम ने जैसा लचर प्रदर्शन किया उसे देखकर ऐसा लगता है कि बैटिंग के एरिया में टीम में कुछ खास बदलाव नहीं हुआ है. पहले मैच में ही दिखा कि शुरुआती तीन झटके के बाद टीम संभल नहीं पाई. तो फिनिशिंग में भी यह भरोसा नहीं रहा कि मौजूद बल्लेबाज एक बड़ा टोटल दे पाएंगे. वहीं गेंदबाजी में विविधता की पूरी कमी दिखी.
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अगर थाला होते तो...
कुल मिलाकर मैदान में टीम की आक्रामकता में कमी साफ दिखी. तो क्या CSK की सबसे बड़ी ताकत अब कमजोरी बन रही है. जो अनुभव उसकी सबसे बड़ी पहचान रही है, उसकी धार अब कुंद हो रही है. कहीं ऐसा तो नहीं कि अब GT और SRH जैसी अधिक आक्रामक टीमों से CSK इसी क्षेत्र में पिछड़ रही है. धोनी क्रिकेट की एक पूरी सिस्टम थे, ऋतुराज के लिए अपनी पहचान बनाने, टीम को नई सोच देने और प्रशंसकों की उम्मीदों पर खरे उतरने की चुनौती है क्योंकि उनके हर फैसले और टीम की हर हार के बाद कहीं न कहीं उनके मन में ये चल रहा होगा कि "अगर थाला होते तो..." और यही सबसे बड़ा दबाव भी है. बेशक CSK खत्म नहीं हुई, लेकिन बदल रही है. थाला अब साइलेंट गार्डियन हैं.
पहले मैच में खराब प्रदर्शन के बावजूद कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने घरेलू पिच पर होने वाले पहले मैच से ठीक पहले पक्के इरादे और मजबूत मानसिकता के साथ बैटिंग करने पर जोर दिया है. साथ ही वो टीम में एक ऐसा माहौल तैयार करना चाहते हैं जहां हर युवा खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित हो. उन्होंने कहा भी, "इनमें जोश है लेकिन अनुभव और अनुभवहीन खिलाड़ियों में फर्क भी साफ है. तो उन्हें गलतियां करने की छूट देनी होगी. उन्हें खुल कर जाहिर करने का मौका देना होगा.
यह ट्रांजिशन का दौर है और सवाल ये नहीं है कि CSK जीतेगी या नहीं. सवाल ये है कि CSK खुद को कितना जल्दी बदल पाएगी? पीली जर्सी की चमक अभी फीकी नहीं पड़ी है क्योंकि दर्शकों का कोलाहल अब भी बरकरार है, लेकिन उसे फिर वही चमचमाहट दिखाने के लिए नए अप्रोच, नए जज्बे और फौलाद सा जिगर रखने वाला चाहिए.














