- भारतीय क्रिकेटरों के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में बदलाव कर कई खिलाड़ियों के ग्रेड में परिवर्तन कर सकता है
- विराट कोहली और रोहित शर्मा को इस बार A ग्रेड से B ग्रेड में डिमोट किया जा सकता है
- जसप्रीत बुमराह, शुभमन गिल, अक्षर पटेल और कुलदीप यादव को A ग्रेड में रखा जाएगा
BCCI Central Contracts 2026: बीसीसीआई जल्द ही भारतीय खिलाड़ियों के लिए 2026 का सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट घोषित करने वाला है, इस बार के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में बदलाव देखने को मिलने वाले हैं. खासकर कई खिलाड़ियों के ग्रेड को बदला जा सकता है. खासकर विराट कोहली और रोहित शर्मा अब A+ ग्रेड से A Grade में जा सकते हैं. वहीं, जसप्रीत बुमराह, शुभमन गिल, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव जैसे खिलाड़ियों को A+ ग्रेड में रखा जाएगा. इन सबके अलावा ऋतुराज गायकवाड़, ध्रुव जुरेल, सूर्यकुमार यादव, श्रेयस अय्यर, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन जैसे खिलाड़ी भी सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में बी ब्रेड में रह सकते हैं. वहीं, विजय हजारे ट्रॉफी में कमाल का खेल दिखाने वाले देवदत्त पडिक्कल भी सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा होंगे.
संभावित सेंट्रेल कॉन्टैक्ट
A+ Grade: सालाना ₹7 करोड़
जसप्रीत बुमराह, शुभमन गिल, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव
A Grade: सालाना 5 करोड़ रुपए
विराट कोहली, रोहित शर्मा, जडेजा, ऋषभ पंत, हार्दिक, केएल राहुल, मोहम्मद सिराज, अर्शदीप सिंह, यशस्वी जयसवाल, वाशिंगटन सुंदर
B Grade: सालाना 3 करोड़ रुपए
ऋतुराज गायकवाड़, ध्रुव जुरेल, सूर्यकुमार यादव, श्रेयस अय्यर, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, वरुण चक्रवर्ती, तिलक वर्मा, ईशान किशन,
C Grade: सालाना 1 करोड़ रुपये
रिंकू सिंह, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, रवि बिश्नोई, मुकेश कुमार, प्रसिद्ध कृष्णा, रजत पाटीदार, सरफराज खान, नीतीश कुमार रेड्डी, आकाश दीप, हर्षित राणा
कैसे निर्धारित होता है ग्रेड
BCCI हर साल सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट ग्रेड की समीक्षा करता है, और यह प्रक्रिया किसी खिलाड़ी की प्रतिष्ठा या पिछली उपलब्धियों को देखकर पूरी किया जाता है. पिछले सीज़न के हालिया प्रदर्शन, निरंतरता, फिटनेस और कुल मिलाकर प्रभाव इस बात में अहम भूमिका निभाते हैं कि किसी खिलाड़ी को प्रमोट किया जाएगा, बनाए रखा जाएगा या डिमोट किया जाएगा. मैचों में हिस्सा लेना भी एक महत्वपूर्ण कारक होता है.
सीनियर क्रिकेटरों सहित खिलाड़ियों को कॉन्ट्रैक्ट के लिए योग्य बने रहने के लिए टेस्ट, वनडे या T20I में न्यूनतम मैच खेलने की शर्तों को पूरा करना होता है. ज़्यादा मैच खेलने से अपने आप ऊंचा ग्रेड नहीं मिलता. एक और बड़ा मापदंड घरेलू क्रिकेट में भागीदारी है, जब खिलाड़ी इंटरनेशनल ड्यूटी पर नहीं होते हैं, तो BCCI उनसे रणजी ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की उम्मीद करता है. यह नियम हाल के सालों में बहुत सख्त हो गया है.














