- एमपी के सिंगरौली नगर निगम की आयुक्त सविता प्रधान मूल रूप से नर्मदापुरम जिले के मड़ई गांव की रहने वाली हैं
- सविता प्रधान ने पिछले दिनों एक बच्ची को विग बनवाकर देने के लिए अपने सिर के बाल मुंडवा लिए थे.
- सविता प्रधान ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा दो बार क्रैक की. पहले डीएसपी फिर पीसीएस अफसर बनीं.
मध्य प्रदेश राज्य सेवा की अधिकारी सविता प्रधान की नई इंस्टाग्राम पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. उन्होंने एक कविता के माध्यम से राधा, रुक्मिणी, सीता, उर्मिला, द्रौपदी, अहिल्या और यशोधरा जैसी पौराणिक स्त्रियों का उदाहरण देते हुए कहा है कि वह ऐसा कोई संबंध नहीं चाहतीं, जिसमें किसी महिला को केवल त्याग, परीक्षा, प्रतीक्षा, अपमान या समझौता करना पड़े.
पीसीएस अधिकारी सविता प्रधान वर्तमान में मध्य प्रदेश के सिंगरौली नगर निगम में आयुक्त पद पर कार्यरत हैं. पिछले दिनों वह एक कैंसर पीड़ित बच्ची को विग बनवाकर देने के लिए अपने सिर के बाल मुंडवाने को लेकर भी चर्चा में रही थीं. उनकी सफलता की कहानी भी लोगों को काफी प्रेरित करती है. सविता प्रधान ने ससुराल में प्रताड़ना झेलने के बावजूद बुलंद हौसलों के दम पर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर सफलता का नया अध्याय लिखा.
सविता प्रधान नई इंस्टाग्राम पोस्ट
सविता प्रधान ने अपनी नई इंस्टाग्राम पोस्ट में दो तस्वीरें भी साझा की हैं, जिनमें वह भक्ति भाव में लीन नजर आ रही हैं. पोस्ट शेयर किए जाने के महज दो घंटे के भीतर इसे 955 से अधिक लाइक मिल चुके हैं. इस पर बड़ी संख्या में यूजर्स कमेंट भी कर रहे हैं. कई यूजर्स इस पोस्ट को उनके जीवन संघर्षों से जोड़कर भी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
सविता प्रधान ने पोस्ट में क्या लिखा?
मैं नहीं हूं राधा जैसी,
जो बिन सम्मान प्रेमिका बस बन जाऊंगी!
मैं रुक्मिणी जैसी भी नहीं, जो बिन प्रेम
बस पत्नी कहलाऊंगी!
मैं सीता जैसी भी नहीं हूं, जो
अपना चरित्र बताने संसार को
अग्नि में चढ़ जाऊंगी!
मैं उर्मिला जैसी भी नहीं कि तुम मुझे छोड़
कर्तव्य निभाने जाओ,
तो मैं वर्षों विरह में जल जाऊंगी!
मैं द्रौपदी जैसी भी नहीं कि
हर ले कोई चीर मेरा तुम्हारे आगे!
और फिर भी चरणों में मस्तक झुकाऊंगी!
मैं अहिल्या जैसी भी नहीं, जो मुझे
अनजाने हुए अपराध के लिए पाषाण कर दे!
तो वर्षों किसी राम की प्रतीक्षा में
पाषाण ही रह जाऊंगी!
मैं नहीं यशोधरा जैसी भी कि तुम,
आधी रात मुझे छोड़ ज्ञान की खोज में जाओ!
तो बस एक त्यागी हुई,
अबोध शिशु की मां ही रह जाऊंगी!
मैं सती जैसी हूं प्रिय!
मुझे पाने तुमने तांडव किया!
तब ही “शिव” की “शक्ति” कहलाऊंगी.
–सविता
सविता प्रधान की सक्सेस स्टोरी
एमपी के सिंगरौली नगर निगम की आयुक्त सविता प्रधान मूल रूप से नर्मदापुरम जिले के मड़ई गांव की रहने वाली हैं. उनका जन्म एक आदिवासी परिवार में हुआ था. उनके पिता बीड़ी पत्ते तोड़ने, महुआ बीनने और मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते थे. सविता प्रधान अपने गांव से दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाली पहली महिला बनीं. महज 16 वर्ष की उम्र में उनकी शादी उनसे 11 वर्ष बड़े युवक से कर दी गई थी. बाद में उन्हें ससुराल में घरेलू हिंसा और प्रताड़ना का सामना भी करना पड़ा.
उन्होंने ब्यूटी पार्लर में काम करके अपने दोनों बेटों अर्थव और युजस का पालन-पोषण किया और उनकी पढ़ाई जारी रखी. साथ ही खुद भी MPPSC की तैयारी करती रहीं. वर्ष 2005 में पहले ही प्रयास में वह मध्य प्रदेश पुलिस सेवा में डीएसपी चुनी गईं. इसके बाद वर्ष 2006 में दूसरे प्रयास में उन्होंने पूरे प्रदेश में 83वीं रैंक हासिल कर राज्य प्रशासनिक सेवा में स्थान बनाया और पीसीएस अधिकारी बनीं.
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