यह ख़बर 24 जनवरी, 2013 को प्रकाशित हुई थी

कोयला ब्लॉक आवंटन के केन्द्र के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सवाल

खास बातें

  • उच्चतम न्यायालय ने कंपनियों को कोयला ब्लाक आवंटित करने के केन्द्र के अधिकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसे बहुत से ‘कानूनी स्पष्टीकरण’ देने होंगे क्योंकि सांविधिक कानून के तहत इसका अधिकार सिर्फ राज्यों को ही है।
नई दिल्ली:

उच्चतम न्यायालय ने कंपनियों को कोयला ब्लाक आवंटित करने के केन्द्र के अधिकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसे बहुत से ‘कानूनी स्पष्टीकरण’ देने होंगे क्योंकि सांविधिक कानून के तहत इसका अधिकार सिर्फ राज्यों को ही है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि केन्द्र खदान और खनिज कानून को नजरअंदाज नहीं कर सकता है जिसने केन्द्र को कंपनियों को कोयला ब्लाक आबंटित करने का कोई अधिकार नहीं दिया है।

न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा और न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर की खंडपीठ ने कोयला आवंटन में अनियमितताओं को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सरकार से कहा कि उसे दूसरे कानूनों, विशेषकर कोयला खदान (राष्ट्रीयकरण) कानून का गहराई से अध्ययन करके यह पता लगाना होगा कि क्या उसे इन संसाधनों के आवंटन का अधिकार है।

न्यायाधीशों ने कहा, ‘खदान और खनिज (विकास और नियमन) कानून, 1957 के तहत सरकार को कोई भी अधिकार नहीं है। इस कानून से आगे निकलने का कोई प्रावधान नहीं है। आपको बहुत कानूनी स्प्ष्टीकरण देने होंगे।’

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न्यायालय ने कहा, ‘सवाल यह है कि क्या केन्द्र सरकार को कानून के तहत अधिकार है और क्या समूचे विधायी तंत्र को नजरअंदाज करने का उसे अधिकार है। क्या आप कानून के विधायी प्रावधानों से आगे जा सकते हैं। कदाचित कानूनी नजरिये से इसमें बहुत संदेह है।’ अटार्नी जनरल गुलाम वाहनवती ने कहा कि इन सवालों पर वह बगैर सोच विचार के जवाब नहीं देना चाहते। उन्होंने इन सवालों पर गौर करने के लिए कुछ समय देने का आग्रह किया।