यह ख़बर 18 अक्टूबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'विकासशील देशों पर यूरोप, यूएस की मंदी का असर'

खास बातें

  • प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत, ब्राजील और द. अफ्रीका को वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से जान डालने का कोई उपाय तलाशने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
प्रिटोरिया:

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को यहां कहा कि भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका को वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से जान डालने का कोई उपाय तलाशने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। सिंह ने कहा कि विकासशील देश यूरोप और विकसित विश्व में मंदी पर मूकदर्शक नहीं बने रह सकते। भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका (इब्सा) समूह के शिखर सम्मेलन के सामान्य सत्र को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यूरोप में कर्ज संकट और विकसित विश्व में खासतौर से अमेरिका और जापान में मंद वृद्धि दर दुनिया के वित्तीय बाजारों को नकारात्मक संकेत दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, "विकासशील देश इन घटनाक्रमों के नकारात्मक प्रभाव से अछूते नहीं रह सकते। विकास सम्बंधी चुनौतियों से निपटने की उनकी क्षमता पर विपरीत असर हुआ है।" प्रधानमंत्री ने शिखर सम्मेलन में सुझाया कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के उभर रहे लोकतंत्रों को एकजुट किया जाए। मनमोहन सिंह ने कहा कि विकसित और विकासशील देशों के समूह, जी-20 ने अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक और वित्तीय संस्थानों के सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जी-20 के सदस्य हैं। सिंह ने नवम्बर के प्रारम्भ में कान्स में प्रस्तावित जी-20 शिखर सम्मेलन के पहले कहा, "हमें फ्रांस में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन के मद्देनजर अपने रुखों को समन्वित करना चाहिए ताकि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की प्राथमिकताएं उचित तरीके से जाहिर हो सकें।" इस अवसर पर ब्राजील की राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा भी उपस्थित थे।


Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com