यह ख़बर 01 नवंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

कनिमोई, 4 अन्य की जमानत के खिलाफ नहीं : सीबीआई

खास बातें

  • सीबीआई ने न्यायालय को बताया कि उसने निचली अदालत में डीएमके की राज्यसभा सांसद कनिमोई और चार अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं का विरोध नहीं किया।
नई दिल्ली:

सर्वोच्च न्यायालय ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में आरोपी पांच कारपोरेट अधिकारियों की जमानत याचिका पर फैसला मंगलवार को सुरक्षित रख लिया। इस बीच, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने न्यायालय को बताया कि उसने निचली अदालत में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) की राज्यसभा सांसद कनिमोई और चार अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं का विरोध नहीं किया। जांच एजेंसी ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जीएस सिंघवी और न्यायाधीश एचएल दत्तू की खंडपीठ को बताया कि जो छूट कनिमोई और चार अन्य आरोपियों को दी गई है, वह अन्य आरोपियों पर लागू नहीं होती। अतिरिक्त महाधिवक्ता हरीन रावल ने न्यायालय में कहा कि जमानत याचिकाओं का विरोध क्यों नहीं किया गया, इस सम्बंध में विशेष लोक अभियोजक यूयू ललित को वे दो बार कारण बता चुके हैं। रावल ने कहा कि यदि न्यायालय चाहे तो वह इसका कारण बता सकते हैं। इस पर अदालत ने कहा कि सीबीआई और विशेष लोक अभियोजक को अदालत में अपनी स्थिति को लेकर निर्णय लेने की पूरी स्वतंत्रता है। उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को सीबीआई से यह स्पष्ट करने के लिए कहा था कि क्या वह निचली अदालत में 2जी घोटाले के आरोपियों की जमानत याचिकाओं के खिलाफ नहीं है? इससे पहले 24 अक्टूबर को सीबीआई ने विशेष अदालत के न्यायाधीश ओ. पी. सैनी के समक्ष कहा था कि कनिमोई, कुसेगांव फ्रूट्स एंड वेजिटेबल्स के आसिफ बलवा और राजीव बी. अग्रवाल, सिनेयुग फिल्म्स के करीम मोरानी तथा कलैगनार टीवी के प्रबंध निदेशक शरद कुमार को जमानत दिए जाने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद अदालत ने जमानत याचिकाओं पर फैसला तीन नवम्बर तक के लिए सुरक्षित रख लिया था।


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