यह ख़बर 20 अप्रैल, 2013 को प्रकाशित हुई थी

चिदंबरम को भरोसा, 2013 का साल सकारात्मक रुख वाला होगा

खास बातें

  • चिदंबरम ने कहा, अभी वृद्धि की रफ्तार सुस्त है। तेज वृद्धि का अभी कोई संकेत नहीं है। 2013 का साल कठिन होगा, पर उम्मीद है कि यह चमकदार रुख के साथ समाप्त होगा।
वाशिंगटन:

वित्तमंत्री पी चिदंबरम को भरोसा है कि 2013 का साल सकारात्मक रुख के साथ समाप्त होगा, भले ही इस समय वृद्धि की रफ्तार सुस्त है। उन्होंने कहा कि भारत उन कुछ देशों में से है, जो 5 प्रतिशत की अधिक की दर से बढ़ रहे हैं।

वित्तमंत्री ने कहा, हम 6.1 से 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने वृद्धि दर 6.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। ऐसे में सिर्फ कुछ ही देश ऐसे हैं, जो 5 प्रतिशत से अधिक की रफ्तार से बढ़ रहे हैं। वहीं 6 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल करने वाले तो सिर्फ दो या तीन देश होंगे।

चिदंबरम ने पीबीएस चैनल पर लोकप्रिय चार्ली रोज शो में कहा, अभी वृद्धि की रफ्तार सुस्त है। तेज वृद्धि का अभी कोई संकेत नहीं है। 2013 का साल कठिन होगा, पर उम्मीद है कि यह चमकदार रुख के साथ समाप्त होगा। उन्होंने कहा कि भारत के पास संसाधन हैं। एक बार हम वृद्धि हासिल करना शुरू करें, यदि प्रत्येक साल 6 से 7 फीसदी की वृद्धि हासिल हो, तो आपकी अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी बन जाएगी।

वित्तमंत्री ने कहा कि भारत के साथ जनसांख्यिकीय लाभ की स्थिति भी है। 2020 तक भारत दुनिया का सबसे युवा देश होगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई आबादी पढ़ी-लिखी नहीं है, कुशल नहीं है, प्रशिक्षित नहीं है, तो वह आपको नीचे ले आएगी, लेकिन यदि आप उन्हें शिक्षित, कौशल प्रदान करने और प्रशिक्षित करने में सफल रहते हैं, तो यह आपके लिए 'संपत्ति' बन जाएगी।

चिदंबरम ने कहा कि भारत के मामले में ज्यादा से ज्यादा लोग कम कौशल और कम आमदनी वाले कृषि क्षेत्र से निकल सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों से जुड़ रहे हैं। उन्हें बेहतर नौकरी की ओर बढ़ना होगा, जिससे उत्पादकता बढ़ सके। इससे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में भी योगदान मिलेगा। ऐसे में लोगों के कृषि से अर्धशहरी सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्रों की ओर रुख करने से निश्चित रूप से आर्थिक वृद्धि दर बढ़ेगी।

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एक सवाल के जवाब में वित्तमंत्री ने कहा कि चीन की तुलना में भारत अपने सामाजिक तनाव को दूर करने में ज्यादा सक्षम है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को चीन और जापान जैसे देशों से यह सीखना चाहिए कि किस प्रकार से परियोजनाओं को समय पर उनकी लागत में बढ़ोतरी के बिना पूरा किया जाए।