खास बातें
- 2010-11 की आखिरी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर घटकर 7.8% प्रतिशत पर आ गई। इससे पूर्व वित्तवर्ष की समान तिमाही में यह दर 9.4 फीसदी रही थी।
New Delhi: विनिर्माण और खनन क्षेत्र के खराब प्रदर्शन तथा व्यापारिक गतिविधियों में कमी से देश की आर्थिक वृद्धि दर 2010-11 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में घटकर 7.8 प्रतिशत रही है। इससे पिछले वित्तवर्ष (2009-10) की समान तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 9.4 प्रतिशत रही थी। इससे ये आशंकाएं पुष्ट हुई हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार घट रही है। हालांकि संतोष की बात यह है कि 2010-11 के पूरे वित्तवर्ष में जीडीपी की वृद्धि दर बढ़कर 8.5 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह 2009-10 में 8 फीसदी रही थी। कृषि उत्पादन में वृद्धि, निर्माण गतिविधियों में तेजी और वित्तीय सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन की वजह से वित्तवर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था की रफ्तार बेहतर रही है। इस बीच, 2010-11 की पहली और तीसरी तिमाहियों के आंकड़ों को संशोधित कर बढ़ा दिया गया है। पहली तिमाही के जीडीपी की वृद्धि दर को बढ़ाकर 9.3 प्रतिशत किया गया है, जबकि पहले इसका अनुमान 8.9 प्रतिशत का था। इसी तरह तीसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों को 8.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.3 फीसदी कर दिया गया है। 2010-11 की चौथी तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर घटकर 5.5 प्रतिशत पर आ गई, जो इससे पूर्व वित्तवर्ष की समान तिमाही में 15.2 प्रतिशत रही थी। इस दौरान खनन एवं खदान क्षेत्र की वृद्धि दर मात्र 1.7 प्रतिशत रही, जो इससे पूर्व वित्तवर्ष की समान तिमाही में 8.9 प्रतिशत रही थी।