खास बातें
- यदि आपने बम्बई स्टॉक एक्सचेंज के रियल्टी सूचकांक में एक माह पहले 100 रुपये लगाए होते, तो आज आपका धन 75 रुपये हो गया होता।
मुम्बई: यदि आपने बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के रियल्टी सूचकांक में एक माह पहले 100 रुपये लगाए होते, तो आज आपका धन 75 रुपये हो गया होता। जानकारों का मानना है कि कई विवादों के कारण रियल्टी क्षेत्र में अभी तेजी की कोई सम्भावना नहीं है। पिछले एक महीने में बीएसई के 13 सेक्टरों में से रियल्टी में सर्वाधिक गिरावट आई है। रियल्टी सूचकांक में 18 जुलाई के बाद से 24 फीसदी की गिरावट आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जनवरी 2010 के बाद से 11 बार मुख्य दरों में वृद्धि किए जाने से वाणिज्यिक बैंकों की ब्याज दर खासा महंगी हो गई है। बैंकों की ब्याज दरें पिछले साल जुलाई के बाद से 3.25 फीसदी बढ़ गई हैं। कोटक सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष टीना विरमानी ने कहा, "ब्याज दरों के काफी ऊंचे स्तर पर रहने और रियल्टी क्षेत्र में बिक्री कम होने के कारण अगली तिमाही में भी इस क्षेत्र के शेयरों में तेजी आने की सम्भावना नहीं है।" पिछले कुछ सालों में एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में हुई तेज प्रगति से मकानों, बेहतर सड़कों तथा अन्य ढांचागत सुविधाओं की मांग में तेजी आई है, जिसका लाभ रियल्टी क्षेत्र की कम्पनियों को मिला है। इसके साथ ही लेकिन पिछले कुछ सालों में विभिन्न विवादों के कारण यह क्षेत्र मंदी से भी ग्रस्त हो गया है। इसका ताजा उदाहरण ग्रेटर नोएडा का मामला है। इसके साथ ही भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने हाल में प्रमुख रियल्टी कम्पनी डीएलएफ पर 930 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा दिया है। आशंका जताई जा रही है कि आयोग दूसरी रियल्टी कम्पनियों के खिलाफ भी कड़ाई से तहकीकात करेगा। एंजल ब्रोकिंग के एक विश्लेषक शरण लिलाने ने कहा कि अभी दूसरी रियल्टी कम्पनियों पर आयोग के इस कदम का अधिक असर नहीं पड़ा है, लेकिन यदि आयोग अन्य कम्पनियों के खिलाफ जांच आगे बढ़ाएगा, तो इसका नकारात्मक असर होना निश्चित है। रियल्टी परियोजना में देरी करने के लिए डीएलएफ पर 630 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने के बाद अन्य कम्पनियां आयोग की आगे कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे और मामले सामने आते हैं, तो रियल्टी कम्पनियों के लिए धन जुटाना मुश्किल हो जाएगा।