यह ख़बर 18 सितंबर, 2012 को प्रकाशित हुई थी

2-जी घोटाला : जेपीसी की बैठक फिर छोड़ गए भाजपा सदस्य

खास बातें

  • 2-जी घोटाले की जांच के लिए बनी जेपीसी की मंगलवार को आहूत बैठक से एक बार भाजपा के सदस्य बाहर आ गए। उन्होंने एक बार यह मांग दोहराई कि इस मामले में गवाहों की सूची बनाई जाए।
नई दिल्ली:

2-जी घोटाले की जांच के लिए बनी ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के सामने मंगलवार को आहूत बैठक से एक बार भाजपा के सदस्य बाहर आ गए। उन्होंने एक बार यह मांग दोहराई कि इस मामले में गवाहों की सूची बनाई जाए। इस सूची में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्तमंत्री पी चिदंबरम को शामिल करने की बात भाजपा सदस्यों ने रखी।

आज की बैठक में उन्होंने समिति के  अध्यक्ष पीसी चाको से पीएम और वित्तमंत्री को बुलाए जाने की मांग पर फैसला लेने को कहा। इस बात के जवाब में चाको ने कहा कि वह ऐसा नहीं करेंगे। उनका जवाब था कि जब भी कोई फैसला होगा तब भाजपा नेताओं को सूचित कर दिया जाएगा।
 
जेपीसी के सामने आज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर सुब्बा राव पेश हुए और उन्होंने साफ किया कि 2-जी स्पेक्ट्रम को लेकर चिदंबरम से उनके कोई मतभेद नहीं थे।

इससे पहले 22 अगस्त को बीजेपी के सदस्य जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा, रविशंकर प्रसाद बैठक से बाहर आ गए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस के सदस्यों ने असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया है।

दरअसल, बीजेपी और कांग्रेस के सदस्यों में उन लोगों की लिस्ट को लेकर मतभेद था जिन्हें पूछताछ के लिए जेपीसी के सामने बुलाया जाए। बीजेपी के सदस्य चाहते थे कि 2-जी मामले में पूछताछ के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्तमंत्री पी चिदंबरम को भी जेपीसी के सामने बुलाया जाए लेकिन, कांग्रेस सदस्य इसका विरोध कर रहे थे।

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उसके बाद जेपीसी की कोई बैठक नहीं हुई। जेपीसी के चेयरमैन पीसी चाको ने तय किया कि चाहे बीजेपी के सदस्य आए ना आएं वह मुख्य गवाहों को पूछताछ के लिए बुलाएंगे। इसी सिलसिले में आज डी सुब्बाराव को बुलाया गया है जो अप्रैल 2007 से सितंबर 2008 तक फाइनेंस सेक्रेट्री थे।