मॉर्गन स्टेनली इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट, रिधम देसाई भारतीय बाजार को लेकर अब भी काफी सकारात्मक (bullish) हैं. यह भरोसा उन्होंने तब जताया है जब घरेलू शेयर बाजार विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और दबाव का सामना कर रहे हैं. मॉर्गन स्टेनली के लिए अपनी ताजा 'इंडिया स्ट्रैटेजी नोट' में देसाई ने तर्क दिया है कि भारतीय शेयर अब 'डिफेंसिव ग्रोथ' के चरण में प्रवेश कर रहे हैं. पिछले छह तिमाहियों से जारी सुस्ती के बाद अब कंपनियों की कमाई (earnings) में सुधार दिख रहा है. उनके अनुसार, यह स्थिति भारतीय शेयरों के लिए आने वाले साल में मजबूती का संकेत है.
ये 4 कारण भारतीय बाजार के पक्ष में
देसाई का कहना है कि अमेरिका और ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौतों में प्रगति, चीन के साथ सुधरते रिश्ते, रुपये का कम मूल्यांकन (undervalued rupee) और घरेलू निवेशकों का लगातार पैसा लगाना बाजार के लिए काफी मददगार साबित होगा.
हालांकि बाजार का सेंटिमेंट और वैल्यूएशन अभी काफी ऊंचे स्तर पर है, लेकिन देसाई का मानना है कि भविष्य में होने वाली कमाई की रफ्तार इस उम्मीद को सही ठहराती है. उन्होंने यह भी माना कि वैश्विक तनाव (geopolitical tension) एक नई चुनौती है, खासकर भारत की तेल पर निर्भरता को देखते हुए. लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर तेल की कीमतों का असर पहले की तुलना में काफी कम हो गया है.
इस सेक्टर को बताया 'छुपा रुस्तम'
सेक्टर के बारे में बात करते हुए देसाई ने भविष्यवाणी की कि IT सर्विसेज एक 'छुपारुस्तम' (dark horse) के रूप में उभर सकती हैं, क्योंकि पूरी दुनिया AI सॉल्यूशंस की तरफ तेजी से बढ़ रही है. भारतीय IT कंपनियां इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं, जिसका असर अभी उनकी कीमतों में नहीं दिख रहा है.
देसाई ने 'डिफेंसिव' के बजाय 'डोमेस्टिक साइक्लिकल' सेक्टर्स को प्राथमिकता दी है. उन्होंने फाइनेंशियल, कंज्यूमर डिस्क्रीशनरी और इंडस्ट्रियल सेक्टर्स को 'ओवरवेट' बताया है, जबकि एनर्जी, यूटिलिटी और हेल्थकेयर को 'अंडरवेट' श्रेणी में रखा है. बता दें कि ओवरवेट कैटगरी से आशय ज्यादा निवेश की सलाह होता है, जबकि अंडरवेट कैटगरी का मतलब कम निवेश की सलाह होता है.
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