RBI Cancels PAYtm Bank License: केंद्रीय बैंक और बैंक रेगुलेटर RBI ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक (PAYtm Payments Bank) का लाइसेंस कैंसिल कर दिया है. इसी के साथ पेटीएम के बैंकिंग कारोबार पर एक तरह से ताला लटक गया है. आज शुक्रवार 24 अप्रैल, 2026 की शाम भारतीय रिजर्व बैंक ने पेटीएम पेमेंट बैंक का लाइसेंस रद्द करने की जानकारी दी. 24 अप्रैल को कारोबार समाप्त होते ही पेटीएम बैंक पर तत्काल प्रभाव से बैंकिंग कारोबार करने पर रोक लगा दी गई. ये कार्रवाई अचानक नहीं हुई है.
आपको शायद याद होगा जब साल 2022 में पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर RBI ने कार्रवाई की थी और मार्च 2022 से नए ग्राहकों को जोड़ना बंद करने का आदेश दिया था. फिर जनवरी-फरवरी 2024 में मौजूदा ग्राहक खातों, प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट्स और वॉलेट में आगे जमा, क्रेडिट और टॉप-अप पर भी रोक लगा दी गई थी. तब से बैंक, RBI की निगरानी में था. RBI की ये कार्रवाई बैंक की निरंतर अनदेखी और नियमों के उल्लंघन का नतीजा है.
RBI के आधिकारिक आदेश के अनुसार, लाइसेंस रद्द करने के पीछे कई वजहें रहीं:
- जमाकर्ताओं के हितों की अनदेखी: RBI ने पाया कि बैंक के कामकाज का तरीका ऐसा था जो बैंक और उसके जमाकर्ताओं के हितों के लिए हानिकारक (detrimental) था. बैंक बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट की धारा 22 (3) (b) का पालन करने में विफल रहा.
- मैनेजमेंट का संदिग्ध रवैया: केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बैंक के प्रबंधन (Management) का सामान्य चरित्र जमाकर्ताओं और जनहित के प्रतिकूल था. यह धारा 22 (3) (c) का गंभीर उल्लंघन माना गया है.
- लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन: पेटीएम पेमेंट्स बैंक को जिस आधार पर लाइसेंस दिया गया था, वह उन शर्तों को पूरा करने में नाकाम रहा. यह बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट की धारा 22 (3)(g) के तहत एक बड़ी चूक है.
- लगातार चेतावनी के बाद भी सुधार नहीं: बैंक को पहले मार्च 2022 में नए ग्राहक जोड़ने से रोका गया था. इसके बाद जनवरी और फरवरी 2024 में भी कई व्यावसायिक प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन बैंक सिस्टम को सुधारने में विफल रहा.
- सार्वजनिक हित की कमी: RBI का मानना है कि अब इस बैंक को आगे चलाने देने से कोई उपयोगी उद्देश्य या जनहित सिद्ध नहीं होगा.
हाई कोर्ट में अपील करेगा RBI
बैंक नियामक RBI अब इस बैंक को पूरी तरह बंद करने (Winding up) के लिए हाई कोर्ट में आवेदन करेगा. हालांकि, राहत की बात यह है कि बैंक के पास अपने जमाकर्ताओं की पूरी देनदारी चुकाने के लिए पर्याप्त नकदी (Liquidity) मौजूद है.














