क्या आपकी WhatsApp चैट्स सच में सेफ हैं? Meta पर लगा धोखाधड़ी का आरोप!

रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ व्हिसल ब्लोअर ने जांचकर्ताओं को बताया कि मेटा के कर्मचारियों और बाहरी कॉन्ट्रैक्टर्स के पास उन मैसेज तक रीच थी, जिन्हें सेफ और एन्क्रिप्टेड बताया गया.

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अगर आप ये सोचकर एकदम आराम में हैं कि आपकी WhatsApp चैट्स और मेटा मैसेज एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं और उन्हें आपके अलावा कोई नहीं पढ़ सकता, तो ये खबर आपको चौंका सकती है. मेटा और दुनिया के सबसे पॉपुलर मैसेजिंग ऐप WhatsApp पर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है. अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया गया है, जिसमें दावा किया गया कि मेटा सालों से अपने अरबों यूज़र्स को अंधेरे में रख रहा है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल इस मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि WhatsApp का ये दावा कि सिर्फ आप और सामने वाला व्यक्ति ही मैसेज पढ़ सकते हैं, पूरी तरह झूठ है. याचिका के अनुसार, मेटा ने तीसरे पक्ष के ठेकेदारों को इन मैसेज को इंटरसेप्ट करने, पढ़ने और स्टोर करने की अनुमति दी है. ये सिलसिला 2016 से चल रहा है, जिससे यूज़र्स की प्राइवेसी के साथ बड़ा खिलवाड़ हुआ है.

व्हिसल ब्लोअर ने खोली पोल

रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ व्हिसल ब्लोअर ने जांचकर्ताओं को बताया कि मेटा के कर्मचारियों और बाहरी कॉन्ट्रैक्टर्स के पास उन मैसेज तक रीच थी, जिन्हें सेफ और एन्क्रिप्टेड बताया गया. मुकदमे में कहा गया है कि ये यूज़र्स की गोपनीयता का उल्लंघन है और कंपनी ने जानबूझकर इस जानकारी को छिपाया.

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एलन मस्क और पावेल ड्यूरोव ने साधा निशाना

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इस विवाद ने टेक जगत में खलबली मचा दी है. टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने एक्स पर पोस्ट करते हुए साफ शब्दों में कहा, "WhatsApp पर भरोसा नहीं किया जा सकता." वहीं, टेलीग्राम के पावेल ड्यूरोव ने इसे इतिहास की सबसे बड़ी धोखाधड़ी करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि WhatsApp के सिस्टम में ऐसे लूपहोल्स हैं जो प्राइवेसी के दावों को खोखला करते हैं.

मेटा की सफाई

दूसरी तरफ, मेटा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया. कंपनी का कहना है कि WhatsApp सिग्नल प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करता है और एन्क्रिप्शन केवल यूज़र के डिवाइस पर होती हैं. मेटा ने दावों को बेतुका बताते हुए कहा कि वो अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे. फिलहाल, ये कानूनी लड़ाई मेटा के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है. अगर आरोप सच साबित होते हैं, तो ना केवल कंपनी को भारी जुर्माना भरना होगा, बल्कि दुनिया भर में उसकी साख को भी बड़ा धक्का लगेगा.

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