वेनेजुएला संकट से सस्ता हो सकता है कच्चा तेल, भारत को कैसे मिलेगा बड़ा फायदा? नीति आयोग के सदस्य समझाया पूरा गणित

Venezuela Oil crisis: डॉ अरविन्द विरमानी ने साफ कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होता है तो भारत को तेल आयात पर होने वाले खर्च में बड़ी बचत हो सकती है. इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलेगी.

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Venezuela crisis: वेनेजुएला संकट अगर कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाता है तो भारत को बड़ी राहत मिल सकती है.
नई दिल्ली:

Crude Oil Price: दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देश वेनेजुएला में चल रही उथल-पुथल का असर आने वाले महीनों में पूरी दुनिया पर दिख सकता है. खासकर कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बड़ी राहत की उम्मीद जताई जा रही है. नीति आयोग के सदस्य और जाने माने अर्थशास्त्री डॉ अरविन्द विरमानी का कहना है कि अगर वेनेजुएला की ऑयल फील्ड्स दोबारा काम करने लगती हैं तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ेगी और कीमतें नीचे आ सकती हैं. इसका सीधा फायदा भारत जैसे देशों को मिल सकता है.

वेनेजुएला की ऑयल फील्ड्स से सस्ता हो सकता है तेल

NDTV से एक्सक्लूसिव बातचीत में डॉ अरविन्द विरमानी ने कहा कि वेनेजुएला की कई ऑयल फील्ड्स इस वक्त खराब हालत में हैं. उनका मानना है कि अगर अगले छह महीने या उसके बाद ये ऑयल फील्ड्स फिर से पूरी तरह चालू होती हैं तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी ज्यादा कच्चा तेल आएगा. इससे ग्लोबल मार्केट में सप्लाई बढ़ेगी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है.

डॉ.अरविन्द विरमानी ने कहा, "कच्चा तेल भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. अगर यह स्थिति बनता है तो इससे भारत को फायदा होगा क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होगा". ज़ाहिर है, भारत अपनी ज़रुरत का 80% कच्चा तेल अलग-अलग बड़े तेल निर्यातक देशों से खरीदता है, और कीमतें सस्ती होने से तेल आयात पर होने वाले खर्च पर बचत होगी."

भारत के लिए क्यों अहम है यह बदलाव

डॉ अरविन्द विरमानी ने साफ कहा कि कच्चा तेल भारत के लिए बेहद जरूरी है. भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होता है तो भारत को तेल आयात पर होने वाले खर्च में बड़ी बचत हो सकती है. इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलेगी.

अनिश्चितता के बावजूद मजबूत रह सकती है भारतीय अर्थव्यवस्था

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में लगातार बनी अनिश्चितता के बीच भी डॉ अरविन्द विरमानी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश की है. उन्होंने कहा कि वित्तीय साल 2025-26 में भारत की GDP ग्रोथ 7 फीसदी से कुछ ज्यादा रह सकती है. उन्होंने बताया कि उन्होंने साल की शुरुआत में 6.5 फीसदी ग्रोथ का अनुमान दिया था, लेकिन अब हालात बेहतर दिख रहे हैं और ग्रोथ इससे ऊपर जा सकती है.

 सुधारों से बढ़ रही है अर्थव्यवस्था की रफ्तार

डॉ अरविन्द विरमानी के मुताबिक सरकार की तरफ से किए गए कई सुधारों का असर अब दिखने लगा है. इनकम टैक्स में बदलाव, जीएसटी सिस्टम में सुधार और लेबर से जुड़े कानूनों को लागू करने से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है. प्रधानमंत्री भी पहले कह चुके हैं कि आर्थिक सुधारों की गाड़ी तेजी से आगे बढ़ रही है.

यानी वेनेजुएला संकट अगर कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाता है तो भारत को बड़ी राहत मिल सकती है. साथ ही देश को विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर सुधारों की रफ्तार बनाए रखनी होगी.

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