UPI पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने के फैसले के साथ ही 2 प्वाइंट्स पर खूब चर्चा हो रही है. पहला ये कि UPI फ्री क्यों नहीं, ये चार्ज लगाने की जरूरत क्या थी... और दूसरा ये कि MDR से होने वाली कमाई कहां-कहां जाएगी, मोटे फायदे में कौन रहने वाला है... Google Pay, PhonePe, PAYtm जैसे UPI ऐप्स, बैंक या फिर सरकार.
NDTV से बातचीत में EY इंडिया के पेमेंट्स सेक्टर लीडर रणदुर्जय तालुकदार ने कहा कि नया फ्रेमवर्क UPI को सब्सिडी पर चलने वाले मॉडल से निकालकर टिकाऊ डिजिटल इंफ्रा की दिशा में ले जाता है. NPCI और वित्त मंत्रालय का भी तर्क ऐसा ही है.
आपको क्या लगता है, किसे होगा मोटा फायदा?
हर 100 में करीब 80 UPI पेमेंट PhonePe और Google Pay जैसे प्लेटफॉर्म से होते हैं. सोशल मीडिया पर एक चर्चा यही चल रही है कि UPI पेमेंट पर चार्ज लगने से मोटी कमाई 'अमेरिका' चली जाएगी, फोनपे और गूगलपे जैसे ऐप्स के जरिये.
ऐसे में पहली नजर में शायद आपको भी यही लग सकता है कि UPI पेमेंट का बड़ा हिस्सा संभालने वाले ऐप्स की चांदी होगी और MDR से मोटा माल ये ऐप्स ही छापेंगे.
मान लीजिए आपने किसी बड़े स्टोर से 5,000 रुपये की खरीदारी की और UPI से भुगतान किया. इस भुगतान पर 0.4% के हिसाब से 20 रुपये MDR बनेगा. ये 20 रुपये आपकी जेब से नहीं कटेंगे, बल्कि ये चार्ज दुकान चलाने वाला देगा. अब यही 20 रुपये डिजिटल पेमेंट की पूरी दुनिया में बंटेंगे- बैंक, पेमेंट ऐप, प्रोसेसिंग बैंक और नेटवर्क से जुड़े दूसरे हिस्सेदारों के बीच.