Budget 2026: 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से खुलेगा राज्यों की किस्मत का पिटारा?

पिछले कुछ आयोगों ने राज्यों की हिस्सेदारी में महत्वपूर्ण बदलाव किए. 14वां वित्त आयोग के जरिए राज्यों का हिस्सा 32% से बढ़ाकर 42% किया. वहीं 15वें वित्त आयोग में एन.के. सिंह की अध्यक्षता में इसे 41% रखा गया.

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बजट 2026 के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है. यह बजट देश के लिए ऐतिहासिक होने जा रहा है क्योंकि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी गई 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट इस बजट का अहम आधार बनेगी. नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता वाले इस आयोग की सिफारिशें 1 अप्रैल 2026 से अगले 5 सालों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच पैसे के बंटवारे का नया फॉर्मूला तय करेंगी.

क्या है 16वें वित्त आयोग का मिशन?

31 दिसंबर 2023 को गठित इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट 17 नवंबर 2025 को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को सौंप दी थी. हालांकि रिपोर्ट अभी पब्लिक नहीं हुई है, लेकिन इसके टीओआर में केंद्र के वसूले गए टैक्स में राज्यों की हिस्सेदारी तय करना, राज्यों को दी जाने वाली वित्तीय मदद के साथ इमरजेंसी फंड पर योजना बनाई जाएगी.

संविधान के तहत केंद्र के इकठ्ठे किए गए टैक्स को राज्यों के साथ साझा किया जाता है. हालांकि, सेस और सरचार्ज इसका हिस्सा नहीं होता हैं, जो अक्सर केंद्र और राज्यों के बीच बहस का मुद्दा रहता है.

पुराना इतिहास बनाम नई उम्मीदें

पिछले कुछ आयोगों ने राज्यों की हिस्सेदारी में महत्वपूर्ण बदलाव किए. 14वां वित्त आयोग के जरिए राज्यों का हिस्सा 32% से बढ़ाकर 42% किया. वहीं 15वें वित्त आयोग में एन.के. सिंह की अध्यक्षता में इसे 41% रखा गया.

16वें वित्त आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनसंख्या के मानदंड को संतुलित करना है. दक्षिण भारतीय राज्यों का तर्क है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में शानदार काम किया है, इसलिए वे बेहतर राजकोषीय प्रबंधन और विकास सूचकांकों को ज्यादा से ज्यादा अहमियत देने की डिमांड कर रहे हैं.

दिग्गज टीम में कौन-कौन हैं शामिल

इस बड़ी रिपोर्ट को तैयार करने में पनगढ़िया के साथ पूर्व नौकरशाह एनी जॉर्ज मैथ्यू, अर्थशास्त्री मनोज पांडा, डॉ. सौम्या कांति घोष (SBI), और टी. रबी शंकर (RBI) जैसे एक्सपर्ट ने बड़ी भूमिका निभाई है.

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