हफ्ते के आखिरी दिन बाजार धड़ाम, सेंसेक्स 1600 तो निफ्टी 450 अंक से ज्यादा गिरा, निवेशकों के करोड़ों स्वाहा

Stock Market Crash Today: शेयर बाजार में आए इस भूचाल से BSE पर लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू (M-Cap) ₹431 लाख करोड़ से घटकर ₹425 लाख करोड़ रह गई.

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Stock Market Crash: .बाजार में आई इस अचानक गिरावट से निवेशकों के ₹6 लाख करोड़ कुछ ही मिनटों में स्वाहा हो गए.

Stock Market Crash:  ग्लोबल मार्केट से आ रहे बेहद खराब संकेतों और मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव ने भारतीय बाजार का मूड पूरी तरह बिगाड़ दिया है.आज शुक्रवार, 27 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर से बिकवाली का माहौल देखा. बाजार बंद होने के समय सेंसेक्स 1,690.23 अंक यानी 2.25 प्रतिशत गिरकर 73,583.22 पर था, तो वहीं निफ्टी50 486.85 अंकों यानी 2.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,819.60 पर था.

टॉप गेनर्स

  • टीसीएस (0.49)
  • भारती एयरटेल (0.37)
  • पावरग्रिड (0.10)
  • सनफार्मा (0.04)

टॉप लूजर्स

  • रिलायंस (-4.55)
  • इंडिगो (-4.54)
  • बाजफाइनेंस (-4.32)
  • एसबीआई (-3.82)
  • एटरनल (-3.76)

कैसा रहा ओपनिंग सेशन?

सुबह बाजार खुलते ही बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 1% से ज्यादा टूट गए.  सुबह 9:16 बजे सेंसेक्स 835 अंक (1.13%) की भारी गिरावट के साथ 74,425.95 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. निफ्टी भी 217 अंक (0.93%) फिसलकर 23,089.05 पर आ गया. बाजार में आई इस अचानक गिरावट से निवेशकों के ₹6 लाख करोड़ कुछ ही मिनटों में स्वाहा हो गए. बाजार में आए इस भूचाल से BSE पर लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू (M-Cap) ₹431 लाख करोड़ से घटकर ₹425 लाख करोड़ रह गई. यानी निवेशकों ने पलक झपकते ही ₹6 लाख करोड़ का घाटा हुआ.

शेयर बाजार में गिरावट की 5 सबसे बड़ी वजहें 

1. ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेत 

दुनिया भर के बाजारों में मचे हाहाकार का असर भारतीय बाजार पर साफ दिख रहा है. अमेरिकी बाजार (S&P 500 और Nasdaq) कल रात 2% से ज्यादा गिरकर बंद हुए. इसी को देखते हुए एशियाई बाजार भी धराशायी हो गए. दक्षिण कोरिया का Kospi और जापान का Nikkei 2% तक लुढ़क गए हैं, जिससे भारतीय निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है.

2.युद्ध को लेकर 'कन्फ्यूजन' और ट्रंप का नया बयान

मिडिल-ईस्ट के युद्ध को लेकर आ रही अलग-अलग खबरों ने निवेशकों को उलझन में डाल दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि वे 6 अप्रैल तक ईरान के पावर प्लांट्स पर कोई हमला नहीं करेंगे, जो कि ईरानी सरकार के अनुरोध पर किया गया है. लेकिन दूसरी तरफ, मीडिया रिपोर्ट्स कह रही हैं कि इजरायल युद्ध खत्म होने से पहले ईरान के सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाने की योजना बना रहा है. इस मिले-जुले संकेतों और अनिश्चितता की वजह से निवेशक डरे हुए हैं और बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं.

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3.रुपये की रिकॉर्ड गिरावट (Rupee at All-time Low)

भारतीय रुपये की कमजोरी ने बाजार का मूड और बिगाड़ दिया है. रुपया आज डॉलर के मुकाबले ₹94.15 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. जब से मिडिल-ईस्ट में युद्ध शुरू हुआ है, रुपया करीब 3.5% कमजोर हो चुका है. कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों को भारत से पैसा निकालने पर मजबूर कर रहा है, जिससे बाजार गिर रहा है.

4. कच्चे तेल की कीमतों में 'आग' और भारत की टेंशन

भले ही आज तेल की कीमतों में मामूली गिरावट आई है, लेकिन पिछले एक महीने में ब्रेंट क्रूड का दाम करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ चुका है. फिलहाल यह 101 से 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है. भारत अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है, जिसका आधा हिस्सा 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के रास्ते आता है. तेल की कीमतें बढ़ने से भारत का आयात बिल बढ़ जाता है और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है, यही वजह है कि शेयर बाजार में आज बड़ी गिरावट देखी जा रही है.

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5. विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से निकाले ₹1.23 लाख करोड़

विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकालने की खबर ने बाजार में खलबली मचा दी है.NSDL के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने 25 मार्च तक भारतीय वित्तीय बाजार से कुल ₹1,23,688 करोड़ निकाल लिए हैं. इसकी मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल और अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते रुपये की रिकॉर्ड कमजोरी है. विदेशी निवेशकों को डर है कि युद्ध लंबा खिंचने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है, इसलिए वे अपना पैसा सुरक्षित करने के लिए बिकवाली कर रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि विदेशी निवेशकों की यह बिकवाली 2020 के कोविड-19 संकट के दौरान हुई बिकवाली से भी कहीं अधिक है.

15 मार्च को खत्म हुए पखवाड़े में FPIs की इक्विटी एसेट्स में $79 बिलियन की भारी गिरावट आई है, जो पिछले 6 सालों में सबसे बड़ी गिरावट है. बता दें कि मार्च 2020 के लॉकडाउन के दौरान यह गिरावट केवल $60 बिलियन थी. यानी मौजूदा युद्ध का डर कोरोना महामारी से भी ज्यादा गहरा होता दिख रहा है.
 

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