जहां से सस्ता तेल मिलेगा, वहां से खरीदेंगे, संसदीय समिति में भारत की दोटूक रणनीति

India USA Trade Deal impact: बैठक में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने संसदीय समिति को बताया कि अमेरिका के साथ डील फाइनल करते समय भारतीय किसानों के हितों और कृषि क्षेत्र की संवेदनशीलता का पूरा ध्यान रखा गया है. अभी दोनों देशों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं.

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India USA Trade Deal impact: कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति की आज एक अहम बैठक हुई. इस बैठक में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर चर्चा की गई. संसदीय समिति के सामने प्रेजेंटेशन में अधिकारियों ने बताया कि सरकार जहां से सस्ता और अच्छा कच्चा तेल मिलेगा, वहां से कच्चे तेल का आयात जारी रखेगी.

जियोपोलिटिकल सिचुएशन पर फोकस

सूत्रों के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारियों ने संसदीय समिति को बताया कि भारतीय तेल कंपनियां मौजूद जियोपोलिटिकल सिचुएशन और सैंक्शन को ध्यान में रखकर कच्चे तेल के आयात पर समझौता कर रही है. साथ ही, अधिकारियों ने बताया कि रूस पर अमेरिकी पेनल्टी लागू होने से तीन महीने पहले ही कुछ अहम अनुबंध साइन हो चुके थे, जिनके तहत अभी तेल का आयात जारी है.

बैठक की शुरुआत में विदेश सचिव और वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुक्त व्यापार समझातों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन किया. सूत्रों के अनुसार बैठक में कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद ने वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों से पूछा कि किन-किन कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाया गया है और कितनी कटौती की गई है.

एक वरिष्ठ कांग्रेस सांसद और अन्य विपक्षी सदस्यों ने पूछा कि वे कौन से 'अतिरिक्त कृषि उत्पाद' हैं जिन पर भारत टैरिफ घटाने जा रहा है और यह कटौती कितनी होगी?

'किसानों के हितों को कोई खतरा नहीं'

बैठक में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने संसदीय समिति को बताया कि अमेरिका के साथ डील फाइनल करते समय भारतीय किसानों के हितों और कृषि क्षेत्र की संवेदनशीलता का पूरा ध्यान रखा गया है. अभी दोनों देशों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं.

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