ईरान जंग के बाद भारतीय निवेशकों के 27 लाख करोड़ रुपये स्वाहा, एक्सपर्ट्स ने बताया-कैसे बनाएं निवेश का प्लान?

Middle East War Impact on Nifty, Sensex: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जंग होने से भारतीय शेयर बाजार में कोहराम मच गया है. 28 फरवरी से अब तक निवेशकों के 27 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं.

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Middle East War Impact on Nifty, Sensex: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई है. 28 फरवरी को अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच जंग शुरू होने के बाद से निवेशकों के करीब 27 लाख करोड़ रुपये डूब गए हैं. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, विदेशी निवेशकों का पैसा निकालना और भारत जैसे बड़े तेल आयात करने वाले देश पर इसके बड़े असर की आशंकाओं ने बाजार को और नीचे धकेल दिया है. इसी वजह से सेंसेक्स और निफ्टी लगातार नीचे जा रहा है.

Middle East War Impact on Nifty, Sensex

मार्केट की चाल

सोमवार 9 मार्च  के दिन सेंसेक्स 1,352.74 अंक गिरकर 77,566.16 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 422.40 अंक की गिरावट के साथ 24,028.05 के स्तर पर रहा. यह गिरावट पिछले एक साल में बाजार की सबसे तेज और भारी उतार-चढ़ाव में से एक मानी जा रही है.

अब तक निवेशकों के कितने करोड़ स्वाहा

बीएसई के आंकड़ों से पता चलता है कि हाल के भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बाद शेयर बाजार के मार्केट कैप में बड़ी गिरावट आई है. 28 फरवरी को जहां शेयर बाजार का मार्केट कैप 463 लाख करोड़ रुपये था, वो 6 मार्च को 444 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. यानी 19 लाख करोड़ रुपये की इसमें बड़ी गिरावट आई. वहीं 9 मार्च की 8 लाख करोड़ की गिरावट को जोड़ दें तो अभी तक बाजार में निवेशकों के 27 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो चुके हैं.

Middle East War Impact on Nifty, Sensex

तेल संकट बिकवाली की अहम वजह

बाजार में काफी हलचल है क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें अचानक बहुत बढ़ गई हैं. ब्रेंट क्रूड की कीमत सिर्फ एक हफ्ते में 25% से ज्यादा बढ़कर कुछ समय के लिए 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं. होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहा टेंशन तेल कीमतों में बढ़ोतरी की बड़ी वजह है.

भारत के लिए बढ़ती तेल की कीमतें बहुत मुश्किल पैदा कर सकती हैं, क्योंकि भारत अपनी 85% तेल जरूरतें दूसरे देशों से खरीदता है. तेल महंगा होने से देश में महंगाई बढ़ सकती है, विदेशों से व्यापार में घाटा बढ़ सकता है और सरकार पर भी खर्च का दबाव बढ़ सकता है.

विदेशी निवेशक लगातार निकाल रहे पैसा

विदेशी निवेशकों ने भारत में लगाया हुआ पैसा निकालना शुरू कर दिया है. दुनिया भर के बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने की वजह से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयरों को बेच रहे हैं. पिछले चार ट्रेडिंग दिनों में उन्होंने भारतीय शेयर बाजार से करीब 21 हजार करोड़ रुपये निकाल लिए हैं. इसकी वजह से फरवरी महीने में आए 22,615 करोड़ रुपये के बड़े निवेश का एक हिस्सा वापस चला गया.

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कैसे बनाएं निवेश का प्लान?

एनडीटीवी प्रॉफिट से मार्केट एक्सपर्ट विजय केडिया ने कहा कि हाल ही में शेयर बाज़ार में जो उतार‑चढ़ाव दिख रहा है, उसकी बड़ी वजह है कच्चे तेल की कीमतों का बढ़ना. तेल की कीमतें इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि जंग की वजह से निवेशकों को डर है कि तेल की सप्लाई में दिक्कत आ सकती है. अभी शेयर बाजार में रोज‑रोज के उतार‑चढ़ाव को देखकर घबराना नहीं चाहिए. अगर आप 3–4 साल की लंबी अवधि की सोच रखकर निवेश करेंगे तो छोटी गिरावटें आपको परेशान नहीं करेंगी. लंबे समय में भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत तरीके से बढ़ रही है, इसलिए निवेशक इस विकास का फायदा उठा सकते हैं.

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