शेयर बाजार और कच्चे तेल की कीमतों में मची उथल-पुथल का असर अब आपकी जेब और देश की करेंसी पर भी दिखने लगा है. शुक्रवार, 13 मार्च को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया (Rupee) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.37 के अपने सबसे निचले रिकॉर्ड स्तर (All-time Low) पर गिर गया.
रुपया आज रिकॉर्ड निचले स्तर पर
फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में शुक्रवार सुबह रुपया 12 पैसे टूटकर 92.37 के लेवल पर पहुंच गया. गुरुवार को यह 92.25 पर बंद हुआ था, लेकिन आज सुबह खुलते ही इसमें बड़ी गिरावट देखी गई. अगर रिजर्व बैंक (RBI) बीच-बचाव न करता, तो एक्सपर्ट्स का मानना है कि रुपया 93.00 के पार भी जा सकता था.
क्यों टूट रहा है भारतीय रुपया?
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के गिरने के पीछे तीन सबसे बड़ी वजहें हैं:
कच्चे तेल में आग
जब रुपया गिरता है और डॉलर महंगा होता है, तो विदेश से आने वाली हर चीज महंगी हो जाती है. इसमें कच्चा तेल सबसे अहम है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है, जिसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है.ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को स्थायी रूप से बंद करने की बात कही है, जिससे ब्रेंट क्रूड एक बार फिर $100 के करीब पहुंच गया है.
डॉलर की मजबूती
दुनिया भर की करेंसी के मुकाबले डॉलर इंडेक्स मजबूत होकर 99.77 पर पहुंच गया है, जिससे रुपया कमजोर पड़ रहा है.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी निवेशकों (FIIs) ने कल बाजार से करीब ₹7,049 करोड़ निकाल लिए, जिससे बाजार में डॉलर की डिमांड बढ़ गई.
महंगाई का भी बढ़ा दबाव
रुपये की गिरावट के बीच सरकार ने रिटेल महंगाई के आंकड़े भी जारी किए हैं. फरवरी में महंगाई दर बढ़कर 3.21% पर पहुंच गई है, जो पिछले महीने 2.74% थी. खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से आम आदमी की थाली महंगी हो रही है.
RBI का सहारा,रुपये को गिरने से बचा रही सरकार
इस मुश्किल वक्त में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये को पूरी तरह गिरने से बचाने के लिए बाजार में दखल दे रहा है. ट्रेडर्स का कहना है कि RBI समय-समय पर डॉलर बेचकर रुपये की गिरावट की रफ्तार को कम करने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, ग्लोबल हालात को देखते हुए रुपये पर दबाव अभी बना रहेगा.














