RBI MPC Meeting: क्‍या होम लोन-कार लोन की EMI पर मिलेगी राहत? थोड़ी देर में RBI गवर्नर संजय मल्‍होत्रा सुनाएंगे फैसला

RBI MPC Meeting Decisions Today: एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिस तरह से वैश्विक हालात बदल रहे हैं, आरबीआई अभी 'वेट एंड वॉच' की पॉलिसी अपना सकता है.

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RBI Monetary Policy Meeting: क्‍या कम होगी आपके लोन की EMI? फैसला थोड़ी देर में
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

RBI MPC Meeting June 2026: क्‍या आपने रेपो रेट से लिंक्‍ड होम लोन, कार लोन या अन्‍य तरह का बैंक लोन लिया है? अगर हां तो आज आपके लिए अहम दिन है. बुधवार 3 जून से चल रही MPC की मीटिंग के बाद आज शुक्रवार को RBI रेपो रेट पर अपना फैसला सुनाएगा. केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्‍होत्रा आज सुबह 10 बजे से मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग के फैसलों के बारे में जानकारी देंगे. रेपो रेट बढ़ाया गया है, कम किया गया है या पहले की तरह 5.25% बरकरार रखा गया है, ये थोड़ी देर में क्लियर हो जाएगा. ज्‍यादातर इकोनॉमिस्‍ट का ऐसा मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव और आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए इस बार  ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम ही है.  

EMI कम होगी या वैसी ही रहेगी?

ज्यादातर इकोनॉमिसेट और जानकारों का कहना है कि रिजर्व बैंक इस बार रेपो रेट (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं करेगा. फिलहाल रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रहने की पूरी संभावना है. इसका मतलब है कि आपकी होम लोन या कार लोन की EMI अभी कम नहीं होने वाली. एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिस तरह से वैश्विक हालात बदल रहे हैं, आरबीआई अभी 'वेट एंड वॉच' की पॉलिसी अपना सकता है. हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में ये भी राहत की ही बात है कि केंद्रीय बैंक ब्‍याज दरें नहीं बढ़ाएगा.  

समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) के एक होराइजन सर्वे के मुताबिक, इस बार न तो लोन की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है और न ही इनके बढ़ने की ज्यादा संभावना है. क्रेडिट पॉलिसी को लेकर सर्वे में शामिल 11 प्रमुख अर्थशास्त्रियों (Economists) का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस बार रेपो रेट (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं करेगा और इसे मौजूदा स्तर पर ही बरकरार रख सकता है. हालांकि, बाजार पूरी तरह एकमत नहीं है; 4 विश्लेषकों का यह भी मानना है कि महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में 0.25% (25 बेसिस पॉइंट) की मामूली बढ़ोतरी का सख्त कदम भी उठा सकता है.

बदले वैश्विक हालात, 'देखो और इंतजार करो' की नीति

पिछले साल से लेकर अब तक आरबीआई रेपो रेट में कुल 1.25% (125 बेसिस पॉइंट) की कटौती कर चुका है. लेकिन अब पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की अस्थिरता के बाद केंद्रीय बैंक काफी संभलकर कदम उठा रहा है. राहत की बात यह है कि मुख्य महंगाई दर अभी भी आरबीआई के 4% के तय लक्ष्य से नीचे बनी हुई है. ऐसे में रिजर्व बैंक के पास ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के दूसरे दौर के असर (Second-round effect) को देखने और समझने का पूरा मौका है.

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एक्सपर्ट व्यू: क्या कहते हैं अर्थशास्त्री?

एचएसबीसी (HSBC) की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर (Status Quo) रख सकता है. हालांकि, आगे चलकर वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों के आधार पर कुछ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं. उन्होंने बताया कि बाजार को उम्मीद है कि साल 2026 के आखिरी महीनों में स्थितियां सुधरने पर आरबीआई ब्याज दरों में दो बार कटौती कर सकता है, इसलिए फिलहाल किसी बड़े नीतिगत झटके की आशंका नहीं है.

कच्चे तेल की कीमतों और नए अनुमानों पर रहेगी नजर

भंडारी के मुताबिक, इस बार बाजार की नजर मुख्य रूप से आरबीआई के नए आर्थिक और महंगाई के अनुमानों पर टिकी होगी. विशेष रूप से यह देखा जाएगा कि केंद्रीय बैंक ऊर्जा संकट के असर का आकलन कैसे करता है और क्या वह कच्चे तेल (Crude Oil) की औसत कीमत का अपना अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाता है या नहीं. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर कच्चे तेल का अनुमान बढ़ता है, तो देश में महंगाई दर भी पहले के अनुमानित 4.6 प्रतिशत से बढ़कर करीब 5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.

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