RBI ने GDP ग्रोथ का अनुमान घटाया, जानिए इस साल 6.9% नहीं तो किस रफ्तार से बढ़ेगी इकोनॉमी

RBI ने मौजूदा वित्‍त वर्ष के लिए देश की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.9 से घटाकरक 6.6 फीसदी कर दिया है. गवर्नर ने कहा, 'ग्‍लोबल सप्‍लाई चेन में लंबे समय तक व्यवधान और तेल-गैस की बढ़ी हुई कीमतों का असर देश की ग्रोथ रेट पर पड़ सकता है. 

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RBI ने देश की GDP ग्रोथ का अनुमान कम कर दिया है
सांकेतिक तस्‍वीर (Canva/NDTV Gfx)

दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच चल रहे युद्ध के बीच ग्‍लोबल सप्‍लाई चेन प्रभावित होने और अन्‍य वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के चलते इस साल देश की इकोनॉमी की रफ्तार थोड़ी कम हो सकती है. केंद्रीय बैंक RBI ने देश की GDP ग्रोथ का अनुमान घटा दिया है. RBI गवर्नर के मुताबिक, मौजूदा वित्तीय साल के दौरान भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.6% रहने का अनुमान है. पहले RBI ने वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.9% का अनुमान जारी किया था. RBI गवर्नर ने कहा, 'वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति खराब हो रही है. सप्‍लाई चेन में लंबे समय तक व्यवधान और तेल-गैस की बढ़ी हुई कीमतों का असर देश की ग्रोथ रेट और महंगाई दोनों पर पड़ सकता है. 

इस साल किस तिमाही में कैसी रहेगी ग्रोथ?

गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने बताया कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए रियल GDP ग्रोथ अनुमान  6.9 से कम कर 6.6 फीसदी कर दिया है. RBI के आकलन के अनुसार, पहली तिमाही में GDP की वृद्धि दर 6.6% रहने का अनुमान है; जबकि Q2 में 6.3%; Q3 में 6.5% और Q4 में 6.8% रह सकती है. 

  • जून 2026 तिमाही: 6.6%
  • सितंबर 2026 तिमाही: 6.3%
  • दिसंबर 2026 तिमाही: 6.5%
  • मार्च 2027 तिमाही: 6.8%

इकोनॉमी के लिए कुछ अच्‍छे संकेत भी, लेकिन... 

गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने कहा, 'देश के फैक्टरी और सेवा क्षेत्र मजबूत हैं, कारोबारियों का भरोसा बढ़ा है और लोग जमकर खर्च कर रहे हैं, जिससे बाजार में मांग अच्छी है. साथ ही, लागत बढ़ने के बावजूद सरकारी और निजी निवेश दोनों में तेजी है. अप्रैल 2026 में सामान और सेवाओं के निर्यात (Goods ad Services Export) में अच्छी बढ़त देखी गई है. 

उन्‍होंने आगे कहा, '...हालांकि, दुनिया भर में चल रहे तनाव, सप्लाई चेन की दिक्कतों और ऊंची माल ढुलाई लागत का असर धीरे-धीरे दिखने लगा है, फिर भी भारतीय अर्थव्यवस्था इन चुनौतियों का मजबूती से सामना कर रही है.' 

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गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने कहा कि कमजोर मानसून, अल नीनो और दुनिया भर में महंगी होती चीजों की वजह से महंगाई बढ़ने का खतरा जरूर है, लेकिन राहत की बात यह है कि देश में अनाज का पर्याप्त भंडार है और जलाशयों में पानी का स्तर भी ठीक है. कुल मिलाकर, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत घरेलू मांग, निवेश और सेवा क्षेत्र के दम पर भारत की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है, और आरबीआई आने वाले समय में महंगाई व दुनिया के हालातों पर लगातार नजर बनाए रखेगा.

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