Bank KYC Update: बैंक में केवाईसी अपडेट कराने वाले हैं? उससे पहले RBI की ये रिपोर्ट पढ़ लें

RBI ने बैंक ग्राहकों के लिए केवाईसी अपडेट प्रोसेस को आसान बना दिया है. अब पते में बदलाव या कोई बदलाव ना होने पर सिर्फ सेल्फ डिक्लेरेशन से काम चल जाएगा.

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क्या आपके पास भी बैंक से केवाईसी अपडेट करने का मैसेज आया है? अगर हां, तो इस खबर को जरा ध्यान से पढ़ें. आरबीआई ने धोखेधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए देशभर के सभी ग्राहकों को अलर्ट मैसेज भेजा है, जिसमें बताया गया है कि कैसे कस्टमर बिना किसी परेशानी के घर बैठे अपने बैंक अकाउंट की केवाईसी अपडेट कर सकते हैं. 

दरअसल केवाईसी का प्रोसेस इतना आसान हो गया है कि आप अपनी सुविधा के अनुसार इसे घर बैठे भी पूरा कर सकते हैं. लेकिन कई ठग इसका फायदा उठाकर आम आदमी के पैसों को उड़ा ले जाते हैं. मैसेज में आरबीआई ने उस पूरे प्रोसेस के बारे में जानकारी दी है, जिसे अपनाकर अपना काम पूरी सेफ्टी से किया जा सकता है. 

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कोई बड़ा बदलाव नहीं तो सेल्फ डिक्लेरेशन ही काफी

आरबीआई के अनुसरा अगर आपकी जानकारी, जैसे नाम और जन्मतिथि में कोई बदलाव नहीं हुआ है या सिर्फ आपके पते में बदलाव हुआ है, तो आपको दोबारा लंबे फॉर्म भरने की जरूरत नहीं है. ऐसी कंडीशन में एक सेल्फ डिक्लेरेशन ही काफी है. आप इसे नेट बैंकिंग या ऐप के जरिए जमा कर सकते हैं.

अपडेट करने के 3 सबसे आसान तरीके

  • अगर इसके अलावा कोई बड़ा बदलाव हुआ है तो आप आधार-ओटीपी बेस्ड ई-केवाईसी के जरिए अपनी डेटेल्स वैरिफाई करा सकते हैं.
  • साथ ही कई मामलो में वीडियो केवाईसी पर ऑफिसर के साथ बात करके भी इसके प्रोसेस को पूरा किया जा सकता है. यहां ध्यान रखने वाली यह बात है कि यह सारा प्रोसेस बैंक के ऑफिशियल ऐप के जरिए होना चाहिए, किसी थर्ड पार्टी के ऐप पर अपने आधार और ओटीपी की जानकारी शेयर नहीं करनी है.
  • इन सभी के साथ बैंक जाने का ऑप्शन आपके पास है ही. अगर आपको कोई गड़बड़ होने का संदेह होता है तो आप बैंक में जाकर इसके बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं. 

सावधान! ठगों से बचें

  • अपना पिन (PIN), ओटीपी या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें.
  • केवल बैंक के आधिकारिक ऐप, वेबसाइट या शाखा के माध्यम से ही अपडेट करें.
  • किसी अनजान लिंक पर क्लिक करके अपनी बैंकिंग जानकारी न भरें.

केवाईसी क्यों जरूरी?

केवाईसी केवल एक कागजी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह आपकी बैंकिंग सेवाओं को सेफ बनाए रखने का एक तरीका है. इसके जरिए बैंक को पता चलता है कि अकाउंट होल्डर ही अपने खाते का इस्तेमाल कर रहा है.

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