'20 हजार करोड़ का टैक्‍स, भरेगा सरकारी खजाना', क्रिप्‍टोकरेंसी पर आप सांसद राघव चड्ढा ने ऐसी क्‍या मांग कर दी?

Crypto Regulations in India: आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में क्रिप्टोकरेंसी पर स्पष्ट नियमों की मांग की, कहा टैक्स लीगल है लेकिन रेगुलेशन इलीगल जैसा व्यवहार हो रहा है. उन्‍होंने सरकारी खजाने में 20 हजार करोड़ रुपये तक भरने के फॉर्मूले का दावा किया.

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राघव चड्ढा ने क्रिप्‍टो पर स्‍पष्‍ट रेगुलेशंस की मांग की है

Tax And Regulation on Cryptocurrency: आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में 'वर्चुअल डिजिटल एसेट्स' (VDA) और क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार की मौजूदा नीतियों पर टिप्‍पणी करते हुए स्‍पष्‍ट रेगुलेशन की मांग की है. उन्‍होंने तर्क दिया कि देश में क्रिप्टो के साथ एक विरोधाभासी व्यवहार हो रहा है, जहां टैक्स तो 'लीगल' संपत्ति की तरह वसूला जा रहा है, लेकिन रेगुलेशन 'इलीगल' संपत्तियों जैसा है. 

'टैक्स लीगल जैसा, सुरक्षा इलीगल जैसी' 

राघव चड्ढा ने सदन में डेटा पेश करते हुए बताया कि भारत सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर 30% कैपिटल गेन टैक्स और 1% TDS वसूलती है. इसके बावजूद, निवेशकों को न तो कोई कानूनी मान्यता दी गई है, न ही उनके हितों की रक्षा के लिए कोई 'इन्वेस्टर प्रोटेक्शन' या समर्पित 'एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग' (AML) ढांचा तैयार किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि देश में क्रिप्टो पर टैक्स ऐसे लगता है जैसे वह कानूनी हो, लेकिन उसे रेगुलेट ऐसे किया जाता है जैसे वह गैर-कानूनी हो.

वीडियो में देखें, उन्‍होंने क्‍या कहा

देश को हो रहा है बड़ा आर्थिक नुकसान

राज्‍यसभा सांसद ने आगाह किया कि स्पष्ट नियमों के अभाव में भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है. उन्‍होंने कुछ आंकड़े पेश करते हुए चौंकाने वाले दावे किए हैं. 

  • पूंजी का पलायन: लगभग ₹4.8 लाख करोड़ का ट्रेडिंग वॉल्यूम भारतीय एक्सचेंजों से विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट हो गया है.
  • स्टार्टअप्स का पलायन: भारत के 180 से ज्यादा क्रिप्टो स्टार्टअप्स देश छोड़कर विदेशों (जैसे दुबई या सिंगापुर) में बस गए हैं.
  • निवेशकों का पलायन: लगभग 12 करोड़ भारतीय अब घरेलू प्लेटफॉर्म्स के बजाय विदेशी एक्सचेंजों के जरिए निवेश कर रहे हैं.
  • ट्रेडिंग वॉल्यूम लॉस: भारत के कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम का 73% हिस्सा अब विदेशी देशों में जा चुका है.

राघव चड्ढा की मांग, 'बैन नहीं, सैंडबॉक्स'

चड्ढा ने सरकार से मांग की कि VDAs को एक स्पष्ट 'एसेट क्लास' (Asset Class) का दर्जा दिया जाए. उन्होंने 'प्रोहिबिशन इज नॉट प्रोटेक्शन' की बात कहते हुए कुछ समाधान भी सुझाए हैं. 

  1. डोमेस्टिक रेगुलेटरी सैंडबॉक्स: एक ऐसा सुरक्षित कानूनी ढांचा तैयार किया जाए जहां स्टार्टअप्स भारत में रहकर काम कर सकें.
  2. मजबूत AML गार्डरेल्स: मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए कड़े नियम बनाए जाएं ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो.
  3. आय में बढ़ोतरी: यदि इसे सही से रेगुलेट किया जाए, तो सरकार को सालाना 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त टैक्स राजस्व मिल सकता है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर जा रहे कारोबार को वापस लाने का एकमात्र तरीका 'सख्त और स्पष्ट रेगुलेशन' है, न कि उसे अंधेरे में रखना. उन्‍होंने कहा कि हमें नवाचार (Innovation) से डरने के बजाय उसे गले लगाना चाहिए. 

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