पीएम मोदी ने APSEZ के हल्दिया टर्मिनल का किया उद्घाटन, जानें इसकी खासियत

APSEZ हर साल 633 मिलियन टन माल संभालती है, जो भारत के कुल पोर्ट ट्रैफिक का लगभग 28% है. कंपनी का लक्ष्य 2030 तक इसे बढ़ाकर 1 बिलियन टन तक पहुंचाने का है.

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पीएम मोदी ने 14 मार्च के दिन APSEZ के हल्दिया टर्मिनल का उद्घाटन किया. यह देश की पहली पूरी तरह से ऑटोमेटेड ड्राई बल्क सुविधा है. इस टर्मिनल का इस्तेमाल अनाज, कोयला, खनिज जैसे ड्राई बल्क सामान लाने-ले जाने के लिए किया जाएगा. इसकी सालाना क्षमता 4 मिलियन टन है. यह टर्मिनल हुगली नदी के किनारे बना है और यहां से सीधे रेल कनेक्शन भी मिलता है. इससे माल को तेजी से और कम खर्च में देश के पूर्वी हिस्से में पहुंचाया जा सकेगा. कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट पूर्वी भारत की समुद्री और माल ढुलाई व्यवस्था को और मजबूत बनाएगा.

APSEZ के पूर्णकालिक निदेशक और CEO अश्विनी गुप्ता ने कहा, "हल्दिया टर्मिनल एक आधुनिक सुविधा है जो पूरी तरह मशीनों से चलती है और माल सीधे रेल से भेजने की सुविधा देती है. इससे हुगली नदी क्षेत्र में कामकाज पहले से कहीं ज्यादा तेज और बेहतर हो जाएगा. जेट्टी पर माल रखने की जरूरत खत्म होगी और ऑटोमेटेड सिस्टम की वजह से माल का नुकसान भी कम होगा. इसका मतलब काम होगा ज्यादा साफ-सुथरा, सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर. यह टर्मिनल पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड की उद्योग सप्लाई चेन को मजबूत करेगा. साथ ही पीएम मोदी के उस लक्ष्य को भी सपोर्ट करेगा, जिसमें आधुनिक मल्टीमॉडल सुविधाओं के जरिए लॉजिस्टिक्स लागत कम करने की बात है."

हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स (HDC), जो स्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट कोलकाता का हिस्सा है. इसके अंदर यह नया टर्मिनल बनाया गया है. इसे 30 साल की लीज़ पर DBFOT मॉडल (Design, Build, Finance, Operate and Transfer) के जरिए HDC बल्क टर्मिनल लिमिटेड ने विकसित किया है. अच्छी बात यह है कि काम 14 जुलाई 2023 को शुरू हुआ था और तय समय में पूरा होकर आज संचालन के लिए तैयार है. इससे पता चलता है कि APSEZ हर बार प्रोजेक्ट समय पर पूरा करने की क्षमता रखता है.

यह टर्मिनल हुगली नदी के पश्चिमी किनारे पर एक अहम जगह पर बना है. यहां आयात किया हुआ कोयला और दूसरी सूखी थोक सामग्री आसानी से उतारी‑चढ़ाई जा सकती है. भारत के पूर्वी तट पर देश के लगभग 60% ड्राई बल्क आयात, जैसे कोयला, बॉक्साइट, लाइमस्टोन आते हैं, इसलिए हल्दिया पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड की स्टील, एल्युमिनियम और बिजली बनाने वाली कंपनियों के लिए सबसे सीधा और सुविधाजनक समुद्री रास्ता बन जाता है. नई सुविधा की वजह से इन उद्योगों के माल ढुलाई का खर्च कम होगा और सामान पहुंचने‑जाने में लगने वाला समय भी काफी घट जाएगा.

निर्माण शुरू होने के बाद से APSEZ ने ये काम पूरे किए हैं-

  • 2,000 टन क्षमता वाला रेलवे वैगन लोडिंग प्रणाली (RWLS) लगाया गया और 1.54 किमी लंबी एक अलग रेलवे लाइन तैयार की गई, जिससे माल सीधे जहाज से ट्रेन में लोड हो सके.
  • पुरानी जेट्टी की मरम्मत और अपग्रेड किया गया.
  • हाई क्वालिटी कन्वेयर सिस्टम लगाए गए, जिससे पूरा काम ऑटोमेटेड हो गया.
  • दो स्टैकर-कम-रीक्लेमर मशीनें लगाई गईं, जो स्टॉकयार्ड में माल को अपने आप संभालती हैं.
  • दो मोबाइल हार्बर क्रेन जोड़ी गईं, जिससे जहाज से माल उतारने की गति और तेज हो सके.

रेलवे वैगन लोडिंग प्रणाली और अलग बनी रेलवे लाइन इस टर्मिनल की अहम सुविधाएं हैं. दोनों मिलकर यह सुनिश्चित करती हैं कि जहाज से उतरा हुआ माल सीधे रेलवे वैगनों में लोड हो सके और तुरंत मुख्य रेलवे लाइन से जुड़ जाए. इससे बंदरगाह पर माल रुकने का समय कम हो जाता है और पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड की फैक्ट्रियों तक कच्चा माल पहुंचने की कुल लागत भी घट जाती है.

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हल्दिया टर्मिनल भारत की सागरमाला योजना और पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान का अच्छा उदाहरण है. इन योजनाओं का मकसद बंदरगाहों को सड़क, रेल और पानी के रास्तों से जोड़कर माल ढुलाई को आसान और सस्ती बनाना है. पीएम मोदी के इस टर्मिनल का उद्घाटन दिखाता है कि देश के पूर्वी समुद्री तट को बेहतर और आधुनिक बनाने पर सरकार कितना ध्यान दे रही है.

जरूरी बातें

  • इंस्टॉल्ड क्षमता- 4 MMTPA
  • कार्गो प्रकार- ड्राई बल्क, जैसे कोयला और दूसरे भारी सामान
  • ड्राफ्ट- 8.5 मीटर
  • बर्थ्स- 1 बर्थ (लंबाई: 193 मीटर; ज्यादा से ज्यादा बांधने की दूरी: 337 मीटर)
  • मोबाइल हार्बर क्रेन्स- 2 क्रेन
  • स्टैकर-कम-रीक्लेमर- 2 यूनिट
  • रेलवे वैगन लोडिंग सिस्टम- 1 यूनिट, 2,000 टन क्षमता वाला
  • समर्पित रेल लाइन- 1.54 किमी
  • कन्वेयर प्रणाली-    2.10 किमी
  • कंसेशन पीरियड- 30 साल

APSEZ, सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स कंपनी

APSEZ, अदाणी ग्रुप की एक कंपनी है. यह कंपनी पूरे देश में माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स का काम करती है. भारत में यह सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स कंपनी है. इसका मतलब किसी सामान को समुद्र से लेकर सीधे ग्राहक के घर तक पहुंचाने का पूरा काम यह कंपनी खुद कर लेती है. बीच में किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. APSEZ के पास सुविधाओं में शामिल हैं-

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  • अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई नेटवर्क
  • पोर्ट पर कार्गो संभालना
  • रेल परिवहन
  • मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क
  • बड़े-बड़े गोदाम
  • रोड ट्रांसपोर्ट के लिए खुद का बड़ा ट्रक नेटवर्क

डिजिटल टेक्नोलॉजी और एआई की मदद से ये सभी काम बहुत तेज और स्मार्ट तरीके से किए जाते हैं. इसी वजह से APSEZ आज भारत की सबसे भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स कंपनी मानी जाती है. कंपनी के पास भारत के पश्चिम, दक्षिण और पूर्व तट पर 15 बड़े पोर्ट और टर्मिनल हैं. इसके अलावा इनके पास 127 जहाजों का बेड़ा, 12 लॉजिस्टिक पार्क, 3.1 मिलियन स्क्वायर फीट गोदाम और 25,000 से ज्यादा ट्रक हैं. इन सभी की मदद से यह तटीय इलाकों से लेकर अंदरूनी राज्यों तक भारी मात्रा में सामान तेजी से पहुंचाती है.

अभी APSEZ हर साल 633 मिलियन टन माल संभालती है, जो भारत के कुल पोर्ट ट्रैफिक का लगभग 28% है. कंपनी का लक्ष्य 2030 तक इसे बढ़ाकर 1 बिलियन टन तक पहुंचाने का है. सस्टेनेबिलिटी के मामले में भी कंपनी को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है. APSEZ, एसएंडपी ग्लोबल कॉरपोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट (CSA) 2025 में दुनिया की ट्रांसपोर्ट कंपनियों में टॉप 5% में शामिल है. साथ ही, इसके 5 पोर्ट विश्व बैंक के कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स 2024 में भी शामिल हुए हैं.

(Disclaimer: New Delhi Television is a subsidiary of AMG Media Networks Limited, an Adani Group Company.)

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