Petrol Diesel Windfall Tax: पेट्रोल-डीजल और ATF यानी जेट फ्यूल को लेकर बड़ी खबर है. केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव किया है. वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेशन के मुताबिक, केंद्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला टैक्स 1 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिया है. वहीं डीजल के निर्यात पर भी मोटा टैक्स देना होगा. इसमें करीब 10 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई है. दूसरी ओर विमानों में इस्तेमाल किए जाने वाले जेट फ्यूल पर लगने वाले निर्यात शुल्क में साढ़े सात रुपये की बढ़ोतरी की है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर ये बड़ा फैसला लिया है. केंद्र के मुताबिक, विंडफॉल टैक्स बढ़ाने का उद्देश्य देश में पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है. साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ावों का प्रभावी ढंग से सामना करना है. सोमवार 4 जुलाई की देर शाम आई इस जानकारी के मुताबिक, नई दरें 3 अगस्त से ही प्रभावी हो गई हैं. इस फैसले से दूसरे देशों में भारत से पेट्रोल-डीजल और ATF लेना महंगा हो गया है.
पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल पर अब कितना टैक्स?
सरकार ने पेट्रोल के निर्यात शुल्क को बढ़ाकर 3.5 रुपये/लीटर कर दिया है, जो पहले 2.5 रुपये/लीटर था. सरकार के अनुसार, ये फैसला घरेलू बाजार में पेट्रोल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए लिया गया है.
डीजल पर कुल एक्सपोर्ट ड्यूटी में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है. SAED और एक अन्य टैक्स मिलाकर अब डीजल पर 25.5 रुपये/लीटर शुल्क लगेगा. 15 दिन पहले तक यह 15.5 रुपये प्रति लीटर था.
केंद्र ने इसी तरह ATF के निर्यात पर लगने वाला शुल्क भी बढ़ा दिया है. अब ATF पर 22 रुपये/लीटर का निर्यात शुल्क देना होगा, जबकि पहले ये 14.5 रुपये/लीटर था.
क्या पेट्रोल-डीजल के दाम पर असर पड़ेगा?
आपके मन में भी ये सवाल होगा कि विंडफॉल टैक्स में किए गए इस बदलाव का असर क्या पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर भी पड़ेगा, इसका जवाब है- सीधे तौर पर नहीं. इंडियन ऑयल, एचपी या भारत पेट्रोलियम जैसी कंपनियां, जो विदेशों में तेल निर्यात करती हैं, उनपर ये टैक्स लगेगा. ये कंपनियां जो तेल विदेशों में एक्सपोर्ट करेंगी, ये टैक्स उनके लिए हैं. यानी तेल के इंपोर्ट यानी आयात पर ये टैक्स नहीं लगता है.
सरकार, विंडफॉल टैक्स इसलिए बढ़ाती है, ताकि देश से कम तेल एक्सपोर्ट हो और यहां तेल की कमी न हो. पेट्रोल पर टैक्स बढ़ाने का मतलब है कि सरकार चाहती हैं कि देश में पेट्रोल की उपलब्धता बनी रहे. वहीं डीजल और एटीएफ की स्थिति सामान्य होने या उपलब्धता ज्यादा होने के चलते इसमें थोड़ी ढील दी गई है.
सरकार का कहना है कि ये टैक्स घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान निर्यात से अनुचित लाभ कमाने से रोकने के लिए लगाया गया है.
हर 15 दिन में समीक्षा, बदलती हैं विंडफॉल टैक्स की दरें
केंद्र सरकार हर 15 दिन में देश में पेट्रोलियम उत्पादों के स्टॉक और इसपर होने वाली कमाई की समीक्षा करती है. इस समीक्षा के आधार पर विंडफॉल टैक्स की दरें चेंज होती हैं. ताजा फैसला भी पिछले महीने किए गए बदलावों के बाद आया है. तब केंद्र सरकार ने वैश्विक तेल कीमतों में तेजी और रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ने के बीच डीजल और एटीएफ पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाया था, जबकि पेट्रोल पर कर में कुछ राहत दी गई थी.
16 जुलाई को जारी वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, डीजल पर निर्यात शुल्क 8.5 रुपए से बढ़ाकर 15.5 रुपए प्रति लीटर किया गया था. वहीं एटीएफ पर शुल्क 7.5 रुपए से बढ़ाकर 14.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया था. उसी समय सरकार ने पेट्रोल पर निर्यात शुल्क 4 रुपए से घटाकर 2.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया था, ताकि इस क्षेत्र में संतुलन बना रहे.
इसके पहले जुलाई में ही एक अन्य संशोधन के तहत पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) 1.5 रुपए से बढ़ाकर 4 रुपए प्रति लीटर किया गया था. वहीं डीजल पर शुल्क 14 रुपए से घटाकर 8.5 रुपए प्रति लीटर और एटीएफ पर शुल्क 12.5 रुपए से घटाकर 7.5 रुपए प्रति लीटर किया गया था.
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