Petrol Diesel Prices in India: अमेरिका के साथ हुए नए व्यापार समझौते (Trade Deal) के बाद भारत अब रूस से मिलने वाले सस्ते कच्चे तेल के आयात में लगभग आधी कटौती करने की तैयारी में है. NDTV Profit ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि भारत-अमेरिका के बीच तय शर्तों के अनुसार भारत में रूसी तेल के आयात में आधी गिरावट आने की उम्मीद है. इस मामले की जानकारी रखने वालों के अनुसार, भारतीय सरकारी तेल कंपनियों ने स्पॉट खरीद रोक दी है.
रूस से मिलने वाला डिस्काउंटेड तेल भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखने में मददगार रहा है, इसलिए आशंका जताई जा रही थी कि आयात कम होने से भविष्य में घरेलू बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत, तेल आयात के स्रोतों में डायवर्सिटी यानी विविधता जारी रहेगी. केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी आश्वस्त किया है कि केवल इस वजह से तेल की कीमतें प्रभावित नहीं होंगी. उन्होंने जोर देकर कहा है कि भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
आइए पूरे मामले को 5 प्वाइंट में समझने की कोशिश करते हैं.
1). रूसी तेल के आयात में कटौती
अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा व्यापार समझौते की शर्तों का आदेश जारी करने के बाद, भारत द्वारा रूस से की जाने वाली तेल खरीद में 50% तक की कमी आने की संभावना है. सूत्रों के अनुसार, जनवरी में भारत औसतन 12 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल खरीद रहा था, जिसके अप्रैल तक घटकर आधा रह जाने का अनुमान है. पिछले एक हफ्ते से, नयारा एनर्जी (Nayara Energy) को छोड़कर, सभी सरकारी और निजी रिफाइनरियों ने रूस से तेल के नए 'स्पॉट कार्गो' ऑर्डर देना बंद कर दिया है.
2). तेल को लेकर अमेरिका की शर्त
व्हाइट हाउस द्वारा जारी आदेश के अनुसार, भारत ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूसी संघ से तेल आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है. अमेरिका ने रूस से तेल आयात कटौती करने के एवज में ही भारतीय सामानों पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ पूरी तरह हटा दी है. कंसल्टेंसी फर्म वंदा इनसाइट्स की फाउंडर वंदना हरि के मुताबिक, व्यापार प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारतीय आयात प्रतिदिन 4,00,000 से 5,00,000 बैरल के आसपास स्थिर होने की संभावना है. उनका कहना है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते का समग्र आर्थिक लाभ कच्चे तेल के आयात पर मिलने वाले रियायती लाभ से कहीं अधिक होगा.
3). अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील से होने वाला कुल आर्थिक लाभ, सस्ते रूसी तेल से मिलने वाले लाभ से कहीं अधिक होगा. हालांकि, 2024 में रूस से लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन तेल खरीदने वाला भारत अब अपनी रणनीति बदल रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से उसकी वित्तीय प्रणाली सुरक्षित रहे.
4). रिफाइनरी कंपनियों के सामने बड़ी चुनौती
इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance) जैसी कंपनियों ने फिलहाल नए ऑर्डर रोक दिए हैं. रिफाइनरियां इस समय एक कठिन राजनीतिक स्थिति में हैं, जहां एक तरफ रूस से मिलने वाला सस्ता तेल है और दूसरी तरफ वाशिंगटन की आक्रामक मांगें और ट्रेड डील के लाभ हैं. नयारा एनर्जी (Nayara), जिसे रूसी कंपनी रोजनेफ्ट का समर्थन प्राप्त है, संभवतः 4 लाख बैरल प्रतिदिन की खरीद जारी रखेगी क्योंकि प्रतिबंधों के कारण उसके पास अन्य विकल्प सीमित हैं.
5). केंद्रीय मंत्री और विदेश सचिव ने किया आश्वस्त
पेट्रोल-डीजल की कीमतें नियंत्रित रहें, इसको लेकर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी आश्वस्त किया है. वहीं भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा उनकी 'सर्वोच्च प्राथमिकता' है. भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तेल आयात के स्रोतों में विविधता (Diversify) लाना जारी रखेगा.
केंद्रीय मंत्री बोले- भारत के पास पूरी क्षमता
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा को बताया कि वैश्विक आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा की स्थिति में भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार 74 दिनों तक की जरूरतें पूरी करने में सक्षम हैं. इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) के पास फिलहाल लगभग 40.94 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल संग्रहित है, जो कुल भंडारण क्षमता का करीब 77 प्रतिशत है. उन्होंने यह भी बताया कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता और चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है. देश की रिफाइनिंग क्षमता 260 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से बढ़कर 320 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो गई है.
विदेश सचिव बोले- 'उपभोक्ता हित' सर्वोच्च प्राथमिकता
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा है कि भारत के ऊर्जा स्रोतों से जुड़े फैसले पूरी तरह राष्ट्रीय हित के आधार पर किए जाते हैं, जिनमें डायवर्सिफिकेशन और कंपीटिटिव प्राइस पर विशेष जोर दिया जाता है. रूसी कच्चे तेल को लेकर विदेश सचिव ने कहा कि एक विकासशील अर्थव्यवस्था और ऊर्जा का बड़ा आयातक होने के नाते भारत के लिए स्थिर और किफायती ऊर्जा आपूर्ति को प्राथमिकता देना अनिवार्य है.
उन्होंने कहा कि मिस्री ने बताया कि भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का 80 से 85 प्रतिशत आयात करता है और इतनी अधिक निर्भरता महंगाई को भी प्रभावित कर सकती है. भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
विदेश सचिव ने स्पष्ट किया, 'सरकार का लक्ष्य ये सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को सही कीमत पर, पर्याप्त मात्रा में और भरोसेमंद व सुरक्षित माध्यमों से ऊर्जा उपलब्ध हो. उन्होंने कहा कि ऊर्जा आयात नीति पूरी तरह इन्हीं उद्देश्यों से संचालित होती है.'
मिस्री ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में मौजूद अनिश्चितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत मूल्य स्थिरता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभा रहा है. उन्होंने दोहराया कि भारत की ऊर्जा नीति के प्रमुख आधार पर्याप्त उपलब्धता, उचित मूल्य और आपूर्ति की विश्वसनीयता हैं. साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि ऊर्जा आयात से जुड़े फैसले सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों की तेल कंपनियां करती हैं और ये निर्णय मौजूदा बाजार परिस्थितियों के अनुसार लिए जाते हैं.














