इनकम टैक्स के अंधाधुंध मुकदमों पर चलेगी कैंची? इन सिफारिशों से टैक्सपेयर्स को मिल सकती है बड़ी राहत

संसदीय समिति ने आयकर विभाग की मुकदमा प्रणाली में बड़े बदलाव की सिफारिश की है. समिति ने एक्सपर्ट लिटिगेशन कमेटी बनाने का सुझाव दिया है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins

क्या टैक्स डिपार्टमेंट बिना सोचे-समझे करदाताओं को अदालतों में घसीट रहा है? क्या डिपार्टमेंट की हार का बोझ सरकारी खजाने पर पड़ रहा है? संसद की एक समिति की ताजा रिपोर्ट तो कुछ ऐसा ही इशारा कर रही है. भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली समिति ने आयकर विभाग की मुकदमा नीति में कुछ बड़े बदलाव की सिफारिश की है, जिन्हें अगर मान लिया गया तो देश के लाखों टैक्सपेयर्स को राहत की सांस मिल सकती है.

विभाग की हार का सिलसिला

समिति ने आंकड़े सामने रखते हुए बताया कि साल 2024-25 में हाई कोर्ट में आयकर विभाग सिर्फ 12% केस जीत पाया. वहीं ट्रिब्यूनल में विभाग की जीत का प्रतिशत सिर्फ 14.5% रहा. इसका मतलब है कि विभाग जो केस कोर्ट में ले जा रहा है, उनमें से लगभग 85 से 88% मामलों में वह हार रहा है. समिति ने कहा है कि विभाग को हर मामले में बिना किसी ठोस वजह के अपील नहीं करनी चाहिए. इसके बजाय एक विशेषज्ञों की टीम बनाई जाए. ये टीम हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले मामले की अच्छे से जांच करे कि क्या केस जीतने लायक है भी या नहीं. 

समिति का मानना है कि आयकर विभाग को मुकदमेबाजी के प्रति अपना रवैया बदलना होगा. फिजूल के केस लड़ने से ना केवल सरकारी पैसा और समय बर्बाद होता है, बल्कि करदाताओं को भी बिना वजह परेशानी झेलनी पड़ती है.

समिति ने कहा है कि टैक्स विभाग बार-बार कोर्ट में केस हार रहा है, जो यह बताता है कि सिस्टम के काम करने के तरीके में कोई बड़ी कमी है. अधिकारी अक्सर सिर्फ इसलिए अदालतों में अपील कर देते हैं जिससे बाद में उन पर ये आरोप ना लगे कि उन्होंने टैक्स वसूलने में ढिलाई बरती. वो अपनी जिम्मेदारी या विजिलेंस जांच के डर से बचने के लिए बस केस फाइल कर देते हैं, चाहे उस केस में दम हो या ना हो.

आंकड़ों से जानें पेंडिंग मामलों की कहानी

समिति का कहना है कि विभाग को मशीन की तरह हर मामले में अपील नहीं करनी चाहिए, बल्कि पहले ये देखना चाहिए कि केस कितना मजबूत है. आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 तक आईटीएटी के पास 3.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विवादित राशि वाले 23,230 मामले पेंडिंग हैं. इसी तरह उच्च न्यायालय में 5.65 लाख करोड़ रुपये के 41,321 मामले और उच्चतम न्यायालय में 25,403 करोड़ रुपये की मांग वाले 6,880 मामले ऐसे हैं, जिन पर अभी तक कोई फैसला नहीं आया है.

Advertisement
Featured Video Of The Day
हिंदी साहित्य में सृजन, संघर्ष और नई पीढ़ी, व्योमेश, जया, नवीन, अलिंद के साथ | NDTV Creators Manch