No Cost EMI: आसान किस्तों के पीछे की सच्चाई! आपके Credit Score पर कैसे पड़ता है असर? बहुत कम लोग जानते हैं ये बात

No Cost EMI का ऑप्शन देखने में यह बहुत आसान और सही लगता है क्योंकि एक साथ ज्यादा पैसे नहीं देने पड़ते और हर महीने थोड़ा-थोड़ा कट जाता है. इसी वजह से लोगों को लुभाता है लेकिन इस चमकदार ऑफर के पीछे कुछ ऐसी बातें छुपी होती हैं जो आम लोग ध्यान नहीं देते.

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आज के समय में जब हर चीज EMI पर मिल जाती है तब यह समझना बहुत जरूरी है कि आसान किस्तों के पीछे पूरी कहानी क्या है.
नई दिल्ली:

आजकल  के समय में मोबाइल खरीदना हो, लैपटॉप लेना हो या फ्रिज-वॉशिंग मशीन जैसे घर के सामान लेने हों, हर जगह एक ही लाइन दिखती है 'No Cost EMI'. ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स पर यह ऑप्शन इतना कॉमन हो गया है कि लगता है बिना सोचे-समझे EMI पर लेना ही सही है. महंगाई के इस दौर में महीने के छोटे-छोटे अमाउंट देकर महंगी चीज लेना आसान लगता है और सेविंग्स भी बैंक खाते में जमा रहता है. लेकिन इस आसान किस्तों के पीछे कुछ ऐसी बातें होती हैं जो आम लोगों को दिखाई नहीं देतीं. आजकल हर चीज EMI पर मिल जाती है लेकिन पूरी सच्चाई बहुत कम लोगों को पता है.

No Cost EMI में क्या सच में इंटरेस्ट नहीं लगता?

ज्यादातर मामलों में नो कॉस्ट EMI का मतलब जीरो इंटरेस्ट नहीं होता. बैंक अपना ब्याज (Interest) चार्ज करता ही है, लेकिन फर्क बस इतना होता है कि उस ब्याज के बराबर की रकम सेलर या शॉपिंग प्लेटफॉर्म 'डिस्काउंट' के नाम पर एडजस्ट कर देता है. कागज पर सब सब जीरो दिखाई देता है, पर असल में प्रोडक्ट की डील थोड़ी बदल जाती है. आपको लगता है कि आप बिना एक्स्ट्रा पैसे दिए EMI पर सामान ले रहे हैं, लेकिन कहीं न कहीं उसकी कीमत पहले ही जोड़ दी जाती है.

EMI चुनते ही डिस्काउंट क्यों हो जाता है गायब?

No Cost EMI का सबसे बड़ा नुकसान वो डिस्काउंट होता है जो आपको दिखाई ही नहीं देती. कई बार ऐसा होता है कि फुल पेमेंट करने पर ज्यादा डिस्काउंट मिलता है, लेकिन जैसे ही EMI चुनते हैं  वह ऑफर हट जाता है. मान लीजिए किसी फोन की कीमत 50,000 रुपये है और सीधा पेमेंट करने पर 4,000 का डिस्काउंट मिल रहा है, लेकिन EMI लेने पर सिर्फ 2,500 की छूट मिल रही है . ऐसे में किस्त पर सामान लेना भले ही आसान लगे, लेकिन प्रोडक्ट पहले ही सामान महंगा खरीद चुके होते हैं.

प्रोसेसिंग फीस और एक्स्ट्रा चार्जेस का क्या है खेल?

EMI लेने पर बैंक अक्सर प्रोसेसिंग फीस चार्ज लेता है. यह अमाउंट छोटा लगता है, पर महंगे प्रोडक्ट पर यह फीस भी काफी ज्यादा हो जाती है. इसके अलावा, ब्याज वाले हिस्से पर टैक्स यानी GST भी लगता है, चाहे वह ब्याज डिस्काउंट के जरिए एडजस्ट ही क्यों न दिखाया गया हो. ये चार्जेस चेकआउट पेज पर साफ-साफ नहीं दिखते और अक्सर पहली क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट आने पर ही समझ आते हैं.

क्रेडिट स्कोर पर क्या असर पड़ता है?

हर EMI एक लोन होता है, चाहे वह मोबाइल के लिए हो या टीवी के लिए. एक-दो EMI से कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन अगर आपके पास एक साथ काफी सारी EMI चल रही हैं, तो आपका 'क्रेडिट लोड' बढ़ जाता है. आगे चलकर जब आप होम लोन या कार लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो बैंक यह देखता है कि आप पहले से ही कितनी EMI चुका रहे हैं. इसी वजह से ज्यादा EMI आपके क्रेडिट स्कोर पर असर डाल सकती है.

कब No Cost EMI लेना फायदेमंद हो सकता है?

हर स्थिति में No Cost EMI गलत नहीं होती. अगर फुल पेमेंट पर कोई खास डिस्काउंट नहीं मिल रहा है और प्रोसेसिंग फीस भी कम है, तो EMI आपके कैश फ्लो को मैनेज करने में मदद कर सकती है. कभी-कभी इमरजेंसी, बजट प्लानिंग या बजट कंट्रोल में रखने के लिए EMI एक सही ऑप्शन होता है.ऐसे समय में किस्तों में पेमेंट करना समझदारी भी होती है. बस जरूरी यह है कि आप कुल खर्चे को कंपेयर करें और सिर्फ मासिक किश्त (Monthly Amount) देख कर फैसला न लें.

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हर किसी को खरीदारी से पहले पता होना चाहिए ये बात

आपको बस ये समझना है कि No Cost EMI कोई धोखा नहीं है, पर यह 'फ्री' भी नहीं है. यह एक सुविधा है जो आपको फ्लैक्सिबिलिटी देती है, लेकिन उसकी एक कीमत होती है. यह एक सुविधा है जिसके बदले आप कहीं न कहीं कीमत चुकाते हैं. इसलिए शॉपिंग के समय'Buy' बटन दबाने से पहले एक मिनट रुककर यह जरूर देखें कि फुल पेमेंट और EMI में असली फर्क क्या है. तभी आप यह तय कर पाएंगे कि आप सच में स्मार्ट शॉपिंग कर रहे हैं या चुपचाप एक्स्ट्रा पैसे दे रहे हैं. यह खबर इसलिए जरूरी है क्योंकि आजकल हर चीज EMI पर मिल जाती है, पर यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि EMI के पीछे पूरी कहानी क्या होती है.

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