शेयर बाजार में निवेश करने वाले ज्यादातर लोग अपना मुनाफा गिनते समय ब्रोकरेज फीस और टैक्स पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन एक ऐसा हिडन चार्ज भी है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. देश के सबसे बड़े ब्रोकरेज फर्म जेरोधा (Zerodha) के फाउंडर नितिन कामथ ने हाल ही में निवेशकों को DP चार्जेस (Depository Participant charges) के बारे में अलर्ट किया है. उन्होंने बताया कि यही वजह है कि कई बार निवेशकों का रिटर्न उम्मीद से कम रह जाता है.
शेयर बेचते समय लगने वाला डीपी चार्ज एक ऐसा खर्च है जिसे समझना बहुत जरूरी है.जानिए कैसे ये छोटे दिखने वाले चार्ज आपके कुल मुनाफे को कम कर सकते हैं.
क्या होता है DP चार्ज और यह कब लगता है?
नितिन कामथ ने समझाया कि जब भी आप अपने डीमैट अकाउंट से शेयर बेचते हैं, तो उन शेयर्स को आपके अकाउंट से निकालकर क्लियरिंग कॉर्पोरेशन को भेजे जाते हैं ताकि सेटलमेंट पूरा हो सके..यह पूरा काम ब्रोकर के डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट यानी डीपी के जरिए होता है. इसीके बदले जो फीस ली जाती है, उसे DP चार्ज कहते हैं. यह चार्ज केवल शेयर बेचते समय लगता है, खरीदते समय नहीं. चूंकि यह ब्रोकरेज की तरह हर जगह चर्चा में नहीं रहता, इसलिए आम निवेशक इसे नोटिस नहीं कर पाते.
उन्होंने बताया कि ब्रोकरेज फीस की तुलना तो निवेशक करते हैं, लेकिन डीपी चार्ज पर उतना ध्यान नहीं देते. जबकि यह भी ट्रेडिंग के कुल खर्च का हिस्सा होता है.
फ्लैट फीस बनाम परसेंटेज का खेल
Zerodha के फाउंडर के मुताबिक, अलग-अलग ब्रोकर्स के चार्ज करने का तरीका अलग हो सकता है. उदाहरण के लिए, जेरोधा हर ट्रांजैक्शन पर ₹13.5 प्लस GST की फ्लैट डीपी चार्ज लेता है. इसमें से ₹3.5 डिपॉजिटरी (CDSL या NSDL) के पास जाता है और बाकी रकम सेटलमेंट प्रक्रिया और जोखिम को कवर करने में लगती है.लेकिन कुछ ब्रोकर चालाकी करते हैं और फ्लैट डीपी चार्ज के बजाय परसेंटेज (%) में चार्ज लेते हैं.
अगर कोई ब्रोकर ₹10 लाख की सेल पर 0.04% चार्ज करता है, तो आपको ₹400 चुकाने होंगे, जो फ्लैट फीस के मुकाबले बहुत ज्यादा है. ऐसे में भले ही ब्रोकरेज कम हो, लेकिन कुल खर्च ज्यादा हो सकता है. उन्होंने कहा कि कई ब्रोकर कम ब्रोकरेज का प्रचार करते हैं, लेकिन डीपी चार्ज ज्यादा होने से निवेशकों का कुल खर्च बढ़ जाता हैइसलिए कम ब्रोकरेज के विज्ञापन में न फंसें और DP चार्ज जरूर चेक करें.
बार-बार शेयर बेचने पर बढ़ सकती है फीस
नितिन कामथ ने एक और जरूरी बात बताई कि ये चार्ज कितनी बार लगते हैं, यह भी आपके ब्रोकर पर निर्भर करता है. कुछ ब्रोकरेज हाउस में हर सेल ट्रांजैक्शन परडीपी चार्ज लगाते हैं. इसका मतलब है कि अगर आपने एक ही कंपनी के शेयर दिन में तीन अलग-अलग समय पर बेचे, तो आपसे तीन बार DP चार्ज वसूला जा सकता है. यह फीस एक बार में छोटी लगती है, लेकिन समय के साथ यह बड़ा खर्च बन सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो ज्यादा ट्रेडिंग करते हैं.
निवेशकों के लिए सलाह
नितिन कामथ ने सभी निवेशकों को सलाह दी है कि वे अपने कॉन्ट्रैक्ट नोट्स (Contract Notes) को बहुत ध्यान से पढ़ें और यह समझें कि कुल मिलाकर वे कितनी फीस दे रहे हैं. क्सर लोग केवल फाइनल प्रॉफिट या लॉस देखते हैं, लेकिन अगर आप कॉन्ट्रैक्ट नोट के बारीक अक्षरों को पढ़ेंगे, तो आपको पता चलेगा कि असल में आपकी जेब से कितना पैसा जा रहा है.उन्होंने कहा कि सिर्फ ब्रोकरेज देखकर ब्रोकर चुनना सही नहीं है. सभी चार्ज को समझना जरूरी है ताकि लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिल सके.













