हाउसिंग डिमांड दिल्ली-NCR जैसे बड़े रियल एस्टेट बाजारों तक सीमित नहीं रह गई है. चंडीगढ़ ट्राइसिटी में भी बड़े कॉन्फिगरेशन, गेटेड कम्युनिटीज और प्रीमियम लाइफस्टाइल सुविधाओं वाले घरों की मांग बढ़ रही है. चंडीगढ़, मोहाली, जिरकपुर और पंचकूला के साथ अब डेराबस्सी, खरड़, न्यू चंडीगढ़ और कुराली जैसे इलाकों में भी रेजिडेंशियल और कमर्शियल गतिविधियां बढ़ रही हैं. यहां एक नया शहर आकार ले रहा है और इलाके का नक्शा ही बदलने वाला है.
चंडीगढ़ ट्राइसिटी का रियल एस्टेट बाजार अब पुराने शहरों से बाहर निकलकर नए माइक्रो-मार्केट की ओर बढ़ रहा है. मोहाली-एयरोसिटी-एयरपोर्ट रोड, जिरकपुर, न्यू चंडीगढ़, डेराबस्सी, खरड़ और कुराली इस बदलाव के प्रमुख उदाहरण हैं.
बेहतर सड़क और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी इन इलाकों तक पहुंच आसान बना रही है. अब इनकी लंबी अवधि की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कनेक्टिविटी के साथ रोजगार, स्कूल, अस्पताल, बाजार और दूसरी शहरी सुविधाएं कितनी तेजी से विकसित होती हैं.
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण बेहतर कनेक्टिविटी और तेजी से विकसित होता शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर माना जा रहा है. CII-Knight Frank की रिपोर्ट में चंडीगढ़ ट्राइसिटी Chandigarh Tricity को देश के 11 उभरते शहरों में शामिल किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 से 2026 के बीच इन उभरते बाजारों में आवासीय कीमतों में 63% की बढ़ोतरी हुई, जबकि देश के 8 प्रमुख शहरों में ये वृद्धि 42% रही.
बेहतर कनेक्टिविटी ने बढ़ाया प्रॉपर्टी का दायरा
ट्राइसिटी में कई बड़े सड़क प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है. इनमें 31.23 किलोमीटर का जिरकपुर-कुराली 6-लेन ग्रीनफील्ड हाईवे, 10.30 किलोमीटर का चंडीगढ़ एयरपोर्ट-एयरोसिटी ग्रीनफील्ड हाईवे और 19.20 किलोमीटर का जिरकपुर बाईपास शामिल हैं.
इन परियोजनाओं की कुल लागत करीब 5,278 करोड़ रुपये बताई गई है.
इन सड़कों से सिर्फ ट्रैफिक कम करने में मदद नहीं मिलेगी, बल्कि ट्राइसिटी के बाहरी इलाकों तक पहुंच भी आसान होगी. जैसे-जैसे किसी इलाके तक पहुंचने का समय घटता है, वहां घर खरीदने और कारोबार शुरू करने की दिलचस्पी बढ़ सकती है.
2.एयरपोर्ट रोड और एयरोसिटी बने नए प्रॉपर्टी हब
मोहाली का एयरपोर्ट रोड इसका बड़ा उदाहरण है. एयरपोर्ट रोड, आईटी सिटी, एयरोसिटी और आसपास के सेक्टरों में रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स के साथ ऑफिस, होटल, रिटेल और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं.
होमलैंड ग्रुप के सीईओ उमंग जिंदल के मुताबिक, आज घर खरीदने वाला ग्राहक सिर्फ ये नहीं देखता कि प्रोजेक्ट शहर से कितनी दूर है. वो ये भी देखता है कि एयरपोर्ट, ऑफिस, स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंचने में कितना समय लगेगा.
यानी अब कनेक्टिविटी खुद प्रॉपर्टी वैल्यू का एक अहम हिस्सा बन रही है.
बड़े घर, गेटेड सोसाइटी और प्रीमियम लाइफस्टाइल
ट्राइसिटी में लग्जरी हाउसिंग की मांग सिर्फ लोकेशन की वजह से नहीं बढ़ रही. खरीदार अब बड़े कॉन्फिगरेशन, गेटेड कम्युनिटी, क्लब हाउस, बेहतर सुरक्षा और आधुनिक लाइफस्टाइल सुविधाओं को भी प्राथमिकता दे रहे हैं.
इसका फायदा उन माइक्रो-मार्केट को मिल रहा है जहां बड़े प्लॉट, नई टाउनशिप और आधुनिक रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट विकसित करने की गुंजाइश है.
न्यू चंडीगढ़, मोहाली और एयरपोर्ट रोड जैसे इलाकों में इसी वजह से रेजिडेंशियल डेवलपमेंट के साथ दूसरी शहरी सुविधाओं का विस्तार भी अहम हो गया है.
महंगे मुख्य इलाकों से बाहर बढ़ रही तलाश
जिरकपुर लंबे समय से चंडीगढ़ और पंचकूला के बीच बड़ा रेजिडेंशियल मार्केट रहा है. लेकिन बढ़ती कीमतों और ट्रैफिक की समस्या के चलते खरीदार अब आसपास के इलाकों को भी देख रहे हैं.
कुराली, लालड़ू, डेराबस्सी और कुराली-मोरिंडा रोड के आसपास रियल एस्टेट गतिविधियां बढ़ रही हैं. कुछ मामलों में यहां जमीन और घरों की कीमतें मुख्य शहरों की तुलना में कम होने से खरीदारों की रुचि बढ़ सकती है.
यानी ट्राइसिटी का रियल एस्टेट बाजार अब सिर्फ चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला और जिरकपुर तक सीमित नहीं है. ये धीरे-धीरे एक बड़े रीजनल रियल एस्टेट कॉरिडोर में बदल रहा है.
न्यू चंडीगढ़ में भी तेजी
न्यू चंडीगढ़ यानी मुल्लांपुर में आवासीय प्रोजेक्ट्स के साथ अस्पताल, स्कूल और दूसरी सुविधाओं का विकास हो रहा है. वहीं मोहाली में आईटी सिटी, एयरपोर्ट रोड, एयरोसिटी और नए सेक्टरों के आसपास निर्माण गतिविधियां बढ़ी हैं.
गिल्को ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर तेजप्रीत सिंह गिल के मुताबिक, सिर्फ सड़क बनने से किसी नए इलाके में लंबे समय तक रियल एस्टेट की मांग कायम नहीं रह सकती. इसके लिए रोजगार, स्कूल, अस्पताल, सार्वजनिक परिवहन और रोजमर्रा की सुविधाओं का विकास भी जरूरी है.
कमर्शियल प्रॉपर्टी को भी फायदा
बेहतर कनेक्टिविटी का फायदा सिर्फ रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी को नहीं मिल सकता. एयरपोर्ट रोड और प्रमुख हाईवे के आसपास शोरूम, दुकान, ऑफिस, होटल और मिक्स्ड यूज प्रोजेक्ट्स के लिए संभावनाएं बढ़ रही हैं.
हालांकि, नए इलाके में प्रॉपर्टी खरीदने से पहले सिर्फ प्रस्तावित हाईवे या भविष्य की परियोजनाओं को देखना पर्याप्त नहीं है. मौजूदा सड़क नेटवर्क, सार्वजनिक परिवहन, पानी-सिवरेज, स्कूल, अस्पताल, रोजगार केंद्र और आसपास का मौजूदा विकास भी देखना जरूरी है.