अमेरिका में व्हाइट हाउस और फेडरल रिजर्व के बीच छिड़ी जंग ने पूरी दुनिया के बाजारों में हलचल मचा दी है, अमेरिका में फेडरल रिजर्व और व्हाइट हाउस के बीच तनाव की खबरें आ रही हैं और फेड चेयर जेरोम पॉवेल पर जांच शुरू हुई है. ऐसे समय में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ा भरोसा जगाया है. NDTV Profit को दिए अपने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में गवर्नर ने उन सवालों के जवाब दिए हैं जो हर आम आदमी जानना चाहता है.
उन्होंने रुपया, महंगाई, निवेश, आम आदमी के खर्च और केंद्रीय बैंक की आजादी जैसे कई मुद्दों पर खुलकर बात की. जैसे कि महंगाई के आंकड़े कम होने के बावजूद हमारी जेब पर बोझ कम क्यों नहीं हो रहा? रुपया डॉलर के मुकाबले कितना और गिर सकता है? और क्या वाकई आरबीआई अपनी आजादी को लेकर किसी दबाव में है? 2026 के लिए गवर्नर का यह संदेश भारत के हर निवेशक और आम नागरिक के लिए जानना बेहद जरूरी है।"
केंद्रीय बैंक की आजादी पर क्यों दिया जोर
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ कहा कि केंद्रीय बैंक की आजादी बहुत जरूरी है. उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिका के फेड चेयर पर चल रही जांच पर कुछ नहीं कहा लेकिन इशारों में यह जरूर बताया कि दुनिया भर में सरकार और सेंट्रल बैंक के बीच दूरी इसलिए बनाई गई है ताकि फैसले बिना दबाव के लिए जा सकें. उनका कहना था कि यह सिस्टम किसी वजह से बना है और इसे हर देश को मिलकर बचाए रखना चाहिए.
फेड विवाद के बीच भारत पर जताया भरोसा
गवर्नर ने संकेत दिया कि भारत का सेंट्रल बैंक सिस्टम मजबूत और स्थिर है. अमेरिका में जो हो रहा है उससे यह सीख मिलती है कि मौद्रिक नीति को राजनीति से दूर रखना कितना जरूरी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले सालों में दुनिया भर में सेंट्रल बैंक की आजादी और मजबूत होगी.
रुपया 90 के पास तो क्या घबराने की जरूरत?
रुपये को लेकर आम लोगों में चिंता रहती है कि डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत गिर रही है. इस पर आरबीआई गवर्नर ने साफ किया कि आरबीआई किसी भी तय लेवल को न तो टारगेट करता है और न ही बचाने जाता है. चाहे रुपया 90 हो या 91 आरबीआई का काम सिर्फ इतना है कि बाजार में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव न हो.
उन्होंने कहा कि भारत की फॉरेक्स नीति सालों से एक जैसी है और आगे भी रहेगी. बाजार कीमत तय करता है और आरबीआई सिर्फ तब दखल देता है जब अचानक बहुत तेज गिरावट या तेजी दिखती है.
भारत की इकनॉमिक ग्रोथ पर क्या बोले गवर्नर?
संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत की हालत बाहरी मोर्चे पर काफी मजबूत है. देश की ग्रोथ अच्छी है महंगाई कंट्रोल में है और करीब 690 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है. करंट अकाउंट डेफिसिट भी काबू में है.
उन्होंने यह भी बताया कि लंबे समय में रुपये का हर साल करीब 3 से 3.5 प्रतिशत कमजोर होना सामान्य है क्योंकि भारत में महंगाई विकसित देशों से थोड़ी ज्यादा रहती है. इस साल रुपये में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट आई है लेकिन पिछले साल यह 2.5 प्रतिशत थी जिससे औसत अब भी संतुलित है.
महंगाई 3- 4% के बीच रहने की उम्मीद
पिछले कुछ महीनों से महंगाई आरबीआई के तय दायरे से नीचे रही है. इस पर गवर्नर ने कहा कि इसकी बड़ी वजह खाने पीने की चीजों की कीमतें हैं. पहले फूड इन्फ्लेशन काफी ज्यादा थी इसलिए अब बेस ऊंचा होने की वजह से आंकड़े कम दिख रहे हैं.
इसके साथ ही ग्लोबल कमोडिटी के दाम भी नरम हैं. उन्होंने साफ किया कि यह मांग से ज्यादा सप्लाई से जुड़ा मामला है. जैसे जैसे बेस इफेक्ट खत्म होगा महंगाई धीरे-धीरे ऊपर जाएगी और आरबीआई के अनुमान के मुताबिक आने वाले समय में यह 3 से 4 प्रतिशत के बीच रहेगी जो आरामदायक स्तर है.
घट रहे महंगाई के आंकड़े, लोगों की जेब पर असर क्यों नहीं?
अक्सर लोग कहते हैं कि महंगाई के आंकड़े कम हैं लेकिन जेब पर असर नहीं दिखता. इस सवाल पर गवर्नर ने कहा कि हर घर का खर्च अलग होता है. किसी के लिए खाने का खर्च ज्यादा अहम है तो किसी के लिए दूसरे खर्च.उन्होंने बताया कि आरबीआई के कंज्यूमर सर्वे में भी यह दिखा है कि लोगों की महंगाई को लेकर चिंता कम हुई है. सरकार भी अब महंगाई के आंकड़ों का बेस बदल रही है ताकि लोगों की असली खपत ज्यादा सही तरीके से दिख सके.
इंफ्लेशन टारगेट में बदलाव होगा या नहीं?
महंगाई को लेकर 4 प्रतिशत प्लस माइनस 2 प्रतिशत का जो ढांचा है उस पर समीक्षा चल रही है. गवर्नर ने कहा कि इस पर आखिरी फैसला सरकार लेगी. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि जब से यह सिस्टम लागू हुआ है तब से भारत में महंगाई पहले से काफी काबू में रही है.
विदेशी निवेश और प्राइवेट कैपेक्स पर क्या है राय
बैंकिंग सेक्टर में आ रहे विदेशी निवेश पर गवर्नर ने कहा कि यह एक साल की मेहनत का नतीजा नहीं है. यह कई सालों में सिस्टम को मजबूत बनाने का असर है. निवेशक भारत को लंबे समय के लिए देख रहे हैं और यह पैसा जल्दी निकलने वाला नहीं है.
प्राइवेट निवेश को लेकर उन्होंने कहा कि निवेश की रफ्तार बदली है. अब पैसा नए सेक्टर जैसे रिन्यूएबल एनर्जी डिफेंस और स्टील में जा रहा है. टेक्नोलॉजी और बेहतर कामकाज की वजह से अब कम निवेश में ज्यादा काम हो रहा है इसलिए निवेश की तीव्रता पहले से कम दिखती है.
आम आदमी पर बढ़ा फोकस
आरबीआई गवर्नर ने साफ कहा कि आम नागरिक ही उनके काम का असली पैमाना है. उन्होंने बताया कि बीते सालों में रीकेवाईसी, अनक्लेम्ड डिपॉजिट और बैंक शिकायतों पर खास अभियान चलाए गए.
मृत खाताधारकों के पैसे पाने की प्रक्रिया भी आसान की गई है ताकि परिवारों को परेशानी न हो. अब ज्यादातर सेवाएं ऑनलाइन हैं और हर महीने इसकी निगरानी होती है. 99 प्रतिशत से ज्यादा काम तय समय में पूरे हो रहे हैं.
भारत का भविष्य मजबूत,2026 के लिए दिया ये मैसेज
इंटरव्यू के आखिर में गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत का भविष्य मजबूत है. आरबीआई महंगाई को काबू में रखते हुए ग्रोथ को सपोर्ट करता रहेगा. सुधारों का असर दिख रहा है और देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है.उनका साफ मैसेज है कि सिर्फ रुपये की कीमत देखकर देश की ताकत नहीं मापनी चाहिए. असली ताकत ग्रोथ स्थिरता भरोसे और आम आदमी की भलाई में होती है और इन मोर्चों पर भारत अच्छी स्थिति में है.














