NDTV IGNITE: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की सालाना बैठक से एक दिन पहले यूरेशिया ग्रुप के अध्यक्ष इयान ब्रेमर (Ian Bremmer) ने NDTV से खास बातचीत की. उन्होंने विश्व की राजनीति में आ रहे उन बड़े बदलावों पर चर्चा की, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की वजह से अमेरिका और पूरी दुनिया में देखे जा रहे हैं.
ट्रंप बदल रहे हैं अमेरिका की परिभाषा
इयान ब्रेमर का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप विश्व में अमेरिका की भूमिका को फिर से परिभाषित कर रहे हैं. ट्रंप अमेरिका फर्स्ट की नीति को आगे बढ़ा रहे हैं, जिसने विश्व के बड़े संगठनों और व्यापारिक समझौतों को हिला कर रख दिया है. इसका मतलब है कि अमेरिका अब केवल उन्हीं समझौतों या देशों में दिलचस्पी दिखाएगा जहां उसे सीधा आर्थिक या फिर रणनीतिक फायदा हो.
'डॉन रो डॉक्ट्रिन'
ब्रेमर ने एक शब्द 'डॉन रो डॉक्ट्रिन' का जिक्र किया. उनके अनुसार अमेरिका अपने आस-पास के एरिया (जैसे वेनेजुएला और लैटिन अमेरिका) में अपना दबदबा बढ़ाना चाहता है. वह ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्रों में भी अपनी दिलचस्पी दिखा रहा है. अमेरिका यह संदेश दे रहा है कि वह अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में किसी भी बाहरी दखल को बर्दाश्त नहीं करेगा और जरूरत पड़ने पर सैन्य शक्ति का इस्तेमाल भी कर सकता है.
'ट्रंप अमेरिकी सिस्टम को बदल रहे'
ब्रेमर ने चेतावनी देते हुए कहा कि आज दुनिया के लिए सबसे बड़ा जोखिम अमेरिका के बाहर नहीं, बल्कि उसके अंदर है. ट्रंप अमेरिकी सिस्टम को अंदर से बदलने की कोशिश कर रहे हैं. वे संस्थानों (जैसे अदालतों और सरकारी विभागों) को अपने हिसाब से ढालने और राष्ट्रपति की शक्तियों को और ज्यादा बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.
क्या होगा वैश्विक असर?
इयान ब्रेमर ने आगे कहा कि अमेरिका के पीछे हटने से दुनिया के कई हिस्सों में पावर वैक्यूम पैदा हो रहा है. नाटो (NATO) और दूसरे मित्र देशों के बीच अमेरिका की भविष्य में भूमिका को लेकर संशय बढ़ रहा है. हम एक ऐसी दुनिया की ओर तरफ जा रहे हैं, जहां कोई एक देश नेतृत्व नहीं करेगा, बल्कि कई क्षेत्रीय शक्तियां अपने फायदे के लिए टकराएंगी.
भारत पर क्या होगा असर?
ब्रेमर का मानना है कि ट्रंप के दोबारा सत्ता में होने से भारत के लिए स्थिति मिली-जुली रहेगी. ट्रंप का चीन-विरोधी रुख भारत के लिए फायदेमंद हो सकता है. दूसरी ओर, ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति भारत के निर्यात और एच-1बी वीजा जैसे मुद्दों पर दबाव बढ़ा सकती है. हालांकि भारत को ट्रंप की धमकियों से ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इतिहास गवाह है कि ट्रंप आखिर में समझौता कर लेते हैं या पीछे हट जाते हैं.














