SIP Investment: अक्सर जब घर के खर्चे बढ़ जाते हैं या अचानक कोई बड़ा काम आ जाता है, तो हम सबसे पहले अपनी बचत या निवेश को रोकने के बारे में सोचते हैं. भारतीय निवेशकों के बीच यह बहुत आम बात है कि वे अपनी चल रही SIP (Systematic Investment Plan) को एक साल के लिए पॉज कर देते हैं. हमें लगता है कि सिर्फ 12 महीने की ही तो बात है, बाद में सब कवर कर लेंगे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि निवेश में लिया गया यह छोटा सा 'ब्रेक' आपके भविष्य के फंड को लाखों रुपये कम कर सकता है? यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन कंपाउंडिंग की ताकत को देखते हुए यह सच है कि एक साल की सुस्ती आपको 25 लाख रुपये तक का फटका दे सकती है.
दरअसल, SIP की ताकत लगातार निवेश करने में होती है जब आप हर महीने पैसा लगाते हैं तो उतार चढ़ाव के बावजूद धीरे धीरे बड़ा फंड बनता है समय के साथ वही पैसा आगे चलकर तेजी से बढ़ता है और यही SIP का असली फायदा होता है.
एक साल का ब्रेक क्यों पड़ता है भारी
जब आप SIP एक साल के लिए रोकते हैं, तो आप सिर्फ 12 महीने की किश्त ही नहीं छोड़ते, बल्कि आप उस पैसे पर मिलने वाले भविष्य के मुनाफे को भी हमेशा के लिए खो देते हैं. बाजार उस दौरान आगे बढ़ जाता है लेकिन आपका पैसा पीछे रह जाता है. शेयर बाजार आपके लिए रुकता नहीं है और जब तक आप आप दोबारा SIP शुरू करते हैं, तब तक मार्केट काफी आगे निकल चुका होता है.यही फर्क लंबे समय में लाखों का नुकसान बना देता है. इससे आपकी पुरानी इन्वेस्टमेंट की जो फ्लो बनी होती है, वह पूरी तरह टूट जाती है. यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी लंबी दौड़ में आप बीच में बैठ जाएं, फिर दोबारा दौड़ शुरू करने पर आप बाकी लोगों से बहुत पीछे रह जाते हैं.
SIP रोकने से उस वक्त जेब पर कोई बोझ नहीं लगता उल्टा थोड़ी राहत महसूस होती है, लेकिन असली असर सालों बाद दिखता है जब वही पैसा आपके बड़े सपनों के लिए काम आ सकता था. उस समय एहसास होता है कि एक साल का ब्रेक कितना महंगा साबित हुआ.
SIP में कंपाउंडिंग का जादू
SIP का असली जादू निवेश के आखिरी सालों में दिखता है, जिसे कंपाउंडिंग कहते हैं. शुरुआत में पैसा धीरे बढ़ता है, लेकिन 15-20 साल बाद यह तेजी से बढ़ने लगता है. अगर आप बीच में एक साल का गैप कर देते हैं, तो वह एक साल आपके अंत के सबसे बड़े मुनाफे वाले साल को कम कर देता है. SIP में इन्वेस्टमेंट जारी रखना ही सबसे बड़ी ताकत है.एक बार SIP रुकने का असर सिर्फ आपके पैसों पर नहीं, बल्कि आपकी आदतों पर भी पड़ता है. अक्सर लोग सोचते हैं कि एक साल बाद फिर से शुरू कर देंगे, लेकिन हकीकत में उस रूटीन को फिर से अपनाना बहुत मुश्किल हो जाता है. धीरे-धीरे एक साल का ब्रेक दो या तीन साल में बदल जाता है और कई बार लोग दोबारा शुरू ही नहीं कर पाते.
एक साल SIP रोकने का फैसला उस वक्त छोटा और सुरक्षित लगता है लेकिन यही फैसला आगे चलकर 20 से 25 लाख रुपये तक का फर्क पैदा कर सकता है.यह फर्क आगे चलकर आपके बड़े सपनों जैसे बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट के फंड पर असर डाल सकता है.
ज्यादा पैसा डालकर पूरा नहीं होता नुकसान
कई लोगों को लगता है कि जब उनके पास एक्सट्रा पैसा आएगा, तो वे ज्यादा निवेश करके यानी SIP की रकम बढ़ाकर इस नुकसान की भरपाई कर लेंगे. लेकिन शेयर बाजार में खोया हुआ 'समय' कभी वापस नहीं खरीदा जा सकता. आप बाद में चाहे जितनी भी ज्यादा रकम लगा दें, वह उस पैसे की जगह नहीं ले सकता जो 10-15 साल पहले बाजार में लगा होना चाहिए था. पैसा तो आप कमा सकते हैं, लेकिन वह समय वापस नहीं ला सकते जो आपके निवेश को बढ़ने के लिए चाहिए था.
अपनी SIP को कभी भी मामूली समझकर न रोकें. अगली बार जब SIP रोकने का मन बने तो याद रखें कि एक साल का ब्रेक आने वाले सालों में बहुत भारी पड़ सकता है. अगर हालात थोड़े मुश्किल भी हों तो पूरी SIP रोकने की जगह रकम कम करना ज्यादा समझदारी होती है क्योंकि निवेश जारी रहना सबसे जरूरी है.














