अब दूध बिकेगा केवल शुद्ध: सरकार की सख्‍ती, यहां से लेना होगा लाइसेंस, पानी, यूरिया या कुछ भी मिलाया तो खैर नहीं!

इस फैसले का सीधा मतलब है, अब दूध बेचने वाला हर कारोबारी सरकार की निगरानी में होगा. अगर नियमों का पालन नहीं हुआ, तो कार्रवाई तय है. आप ग्राहक हैं तो आपको शुद्ध दूध मिलेगा.

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दूध बेचने के लिए लाइसेंस जरूरी होगा (To ensure safe milk supply and curb adulteration, FSSAI mandates registration for milk producers and vendors. Special state drives to begin soon)

Milk Adulteration Crackdown: देश में दूध पीना अब सिर्फ सेहत का सवाल नहीं, भरोसे का भी सवाल बनता जा रहा है. 'क्या ये दूध सच में शुद्ध है?' ये सवाल अब हर घर की रसोई में गूंजता है. इसी चिंता के बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने गुरुवार को बड़ा फैसला लिया है. FSSAI ने साफ कर दिया है कि देश में दूध उत्पादन और बिक्री के लिए लाइसेंस या पंजीकरण अनिवार्य होगा. यानी अब हर दूध उत्पादक और दूध विक्रेता को अपना खाद्य व्यवसाय शुरू करने से पहले FSSAI के साथ पंजीकरण या लाइसेंस लेना जरूरी होगा.

हालांकि डेयरी सहकारी समितियों के सदस्यों को इस नियम से बाहर रखा गया है. बाकी सभी उत्‍पादकों और विक्रेताओं को लाइसेंसिंग नियमों का पालन करना होगा.

क्यों उठाया गया यह कदम?

एजेंसी के बयान के मुताबिक, इस फैसले का मकसद दूध में मिलावट की बढ़ती घटनाओं को रोकना, खाद्य सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना और सुरक्षित भंडारण व स्वच्छ आपूर्ति के जरिए जनस्वास्थ्य की रक्षा करना है.

सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया है कि वे विशेष पंजीकरण अभियान चलाएं और इन्‍फोर्समेंट जांच तेज करें. साथ ही केंद्रीय और राज्य स्तरीय प्रवर्तन एजेंसियों से कहा गया है कि वे दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के लाइसेंस और पंजीकरण की सख्ती से जांच करें.

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FSSAI ने अपने नोट में यह भी कहा कि राज्यों में दूध में संभावित मिलावट की घटनाओं को देखते हुए पंजीकरण और लाइसेंसिंग नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए.

संसद में भी गूंजा था मुद्दा

खाद्य मिलावट का मामला पिछले महीने संसद में भी उठा था. आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कंपनियों पर सेहतमंद और एनर्जी बढ़ाने वाले झूठे दावों के नाम पर हानिकारक उत्पाद बेचने का आरोप लगाया था.

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उन्होंने संसद में कहा था कि रोजमर्रा की चीजों में खतरनाक मिलावट हो रही है-

  • दूध में यूरिया
  • सब्जियों में ऑक्सीटोसिन
  • पनीर में स्टार्च और कास्टिक सोडा
  • आइसक्रीम में डिटर्जेंट पाउडर
  • फलों के जूस में सिंथेटिक फ्लेवर और आर्टिफिशियल रंग
  • खाने के तेल में मशीन का तेल
  • मसालों में ईंट का पाउडर और लकड़ी का बुरादा
  • चाय में सिंथेटिक रंग
  • पोल्ट्री उत्पादों में एनाबॉलिक स्टेरॉयड

यहां तक कि देशी घी से बनने वाली मिठाइयां भी कई बार वनस्पति तेल और डालडा से तैयार की जाती हैं.

इस फैसले का आप पर क्‍या असर? 

इस फैसले का सीधा मतलब है, अब दूध बेचने वाला हर कारोबारी सरकार की निगरानी में होगा. अगर नियमों का पालन नहीं हुआ, तो कार्रवाई तय है. आप ग्राहक हैं तो आपको शुद्ध दूध मिलेगा. और अगर आप दूध विक्रेता हैं तो लाइसेंस लेना जरूरी होगा. 

दूध, जो हर घर की जरूरत है, उसकी शुद्धता सुनिश्चित करना अब कागजों तक सीमित नहीं रहेगा. सवाल यही है, क्या सख्ती से लागू होने पर यह कदम आम आदमी के गिलास तक सुरक्षित दूध पहुंचा पाएगा? सरकार का इरादा साफ है- मिलावट पर लगाम, आम जनमानस के सेहत की सुरक्षा. इस फैसले की सराहना भी हो रही है. 

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