पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर ना हो परेशान, सरकार ने एक्टिव किया 'प्लान-B'

युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है. ब्रेंट क्रूड 106 ड़लर के पार पहुंच गया है. वहीं भारतीय बास्केट की कीमतें 127 डॉलर को छू रही हैं. संकट के बीच भारत सरकार ने तेल सप्लाई के लिए दूसरे प्लान पर काम करना शुरू कर दिया है.

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मिडिल ईस्ट में जंग के बीच सोमवार को अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में जबरदस्त खलबली देखने को मिली. ग्लोबल सप्लाई चेन रुकने से ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स (Brent Oil Futures) की कीमत एक बार फिर 106 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई.ये पिछले करीब चार साल में सबसे ऊंचा स्तर है. पिछले एक महीने में ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स की कीमत करीब 54% तक बढ़ चुकी है. इसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बढ़ती जा रही है.

दूसरी तरफ मध्य पूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से भारतीय एक्सपोर्टर को कई तरह की चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास भारत के करीब 25 कार्गो जहाज फंसे हुए हैं. मिली जानकारी के अनुसार, संकट के इस दौर में भारत सरकार ने मिडिल ईस्ट युद्ध से प्रभावित एक्सपोर्टरों के लिए राहत पैकेज लाने का फैसला किया है.

इसके लिए वाणिज्य मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को राहत पैकेज का मसौदा भेज दिया है. कॉमर्स मंत्रालय में सोमवार को वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, "लॉजिस्टिक्स और एयर कार्गो सप्लाई पर असर पड़ा है, जिससे मिडिल ईस्ट को होने वाला एक्सपोर्ट प्रभावित होगा. हम जल्द ही निर्यातकों की मदद के लिए नए उपायों का ऐलान करेंगे."

कच्चे तेल की सप्लाई

भारत की क्रूड सप्लाई सिक्योर्ड है. भारत में हर दिन की खपत 55 लाख बैरल कच्चे तेल की है. औसतन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जितना कच्चा तेल आता है, आज हमने उससे ज्यादा क्रूड ऑयल की सप्लाई  के जरिये मैनेज कर लिया है. भारत आज 40 देशों से क्रूड आयात करता है. साथ ही देश में 70% क्रूड ऑयल का आयात आज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अलावा दूसरे समुद्री मार्गों से आ रही है. पहले ये 55% होता था.  

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