मिडिल ईस्ट जंग का भारतीय एक्सपोर्ट पर दोहरा प्रहार, दुबई हब ठप, 'पीक सीजन' पर संकट के बादल

मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के कारण दुबई का री-एक्सपोर्ट हब पूरी तरह बंद हो गया है, जिससे भारतीय कपड़ा निर्यातकों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के कारण दुबई व्यापार केंद्र पूरी तरह ठप हो गया है और भारतीय निर्यात प्रभावित हुए हैं
  • दुबई से मिडिल ईस्ट देशों में भारतीय माल की सप्लाई रुकने से व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है
  • युद्ध के चलते मध्य-पूर्व के बड़े खरीदारों ने भारतीय निर्यातकों को नया उत्पादन तुरंत रोकने के निर्देश दिए हैं
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

मध्य-पूर्व एशिया में छिड़े युद्ध ने भारतीय निर्यातकों की कमर तोड़ दी है. भारत के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्रों में से एक, दुबई के प्रभावित होने से न केवल खाड़ी देशों का व्यापार रुक गया है, बल्कि अमेरिका और यूरोप जाने वाला कपड़ा निर्यात भी गंभीर संकट में है. युद्ध के हालातों के बीच व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

दुबई एक्सपोर्ट हब पूरी तरह ठप
भारत से मिडिल ईस्ट के देशों में होने वाले निर्यात के लिए दुबई सबसे बड़ा री-एक्सपोर्ट हब है. पिछले 9 दिनों से जारी युद्ध के कारण स्थिति भयावह हो गई है. युद्ध की वजह से भारतीय निर्यातकों का सामान दुबई नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट एशिया में भारतीय माल की सप्लाई रुक गई है. इसके अलावा मध्य-पूर्व के बड़े खरीदारों ने भारतीय निर्यातकों को नया उत्पादन तुरंत रोकने के निर्देश दिए हैं.

दुबई में रहने वाले नागरिकों और व्यापारियों में अफरा-तफरी है. बड़ी संख्या में लोग दुबई छोड़ना चाहते हैं, जिससे व्यापारिक माहौल को फिर से पटरी पर लौटने में कई महीने लग सकते हैं.

यह भी पढ़ें: हवाई किराया 10 गुना ज्यादा, सामान कब तक पहुंचेगा, नहीं पता; मिडिल ईस्ट में संकट ने बढ़ाई एक्सपोर्टर्स की चिंता

टेक्सटाइल सेक्टर पर 'सीजन' की मार
मार्च का महीना भारतीय कपड़ा निर्यातकों के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है. यह वह 'पीक सीजन' है जब अमेरिका और यूरोप के खरीदार अपनी गर्मियों और आने वाले सीजन के लिए सबसे बड़े ऑर्डर देते हैं. अप्रैल के अंत से पश्चिमी देशों के स्टोर्स में नया स्टॉक लगना शुरू हो जाता है. आमतौर पर पानी के जहाज से इन देशों तक माल पहुंचने में 30 से 35 दिन लगते हैं. लेकिन युद्ध के कारण समुद्री रास्ते प्रभावित होने से पूरी सप्लाई चेन चरमरा गई है.

नोएडा अपेरल एक्सपोर्ट क्लस्टर के चेयरमैन ललित ठुकराल ने बताया कि अब विदेशी खरीदार मांग कर रहे हैं कि माल हवाई जहाज से भेजा जाए. लेकिन हवाई जहाज से भेजना समुद्री मार्ग के मुकाबले 10 गुना तक महंगा है. 10 गुना ज्यादा भाड़ा देना हमारे बिजनेस के लिए व्यावहारिक नहीं है. घाटे से बचने के लिए नए एक्सपोर्ट कंसाइनमेंट का प्रोडक्शन फिलहाल रोक दिया है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! 66% बढ़ सकती है बेसिक सैलरी, जानें क्या है नया फैमिली फार्मूला

Featured Video Of The Day
POCSO Act का खौफनाक सच! Airforce Jawan को Sali के Fake Dream Case में फंसाया, 7 Years बाद बरी